@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
महात्मा गांधी को भुलाने का ख्वाब देखने वालों, जरा आँखें खोलकर सच देख लो!

जब-जब जनता सत्याग्रह, अहिंसा और उपवास को अपना हथियार बनाएगी, तब-तब बड़े से बड़े भ्रष्ट, ज़िद्दी और अहंकारी शासकों को घुटने टेक कर जनता की चौखट पर नाक रगड़नी ही पड़ेगी!
आज आजादी के 80वें वर्ष में भी देश के किसान आंदोलन, जंतर-मंतर पर युवाओं (जेन-जी) के प्रदर्शन और झारखंड में देवेंद्र महतो व छात्रों के सत्य-अहिंसा पर आधारित संघर्षों की सफलता ने यह फिर सिद्ध कर दिया है कि गांधीवादी विचारधारा कल भी प्रासंगिक थी, आज भी है और हमेशा रहेगी।
इतिहास गवाह है कि सत्ता के अहंकार को हमेशा जन-प्रतिरोध के सामने झुकना पड़ा है। चाहे वह दमनकारी ब्रिटिश साम्राज्य हो जिसका सूर्य कभी अस्त नहीं होता था, या फिर आजाद भारत में आपातकाल का वह दौर जब इंदिरा गांधी को ‘इंदिरा ही इंडिया है’ का भ्रम हो गया था—जिन्हें जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में चले जेपी आंदोलन ने धूल चटा दी।
आज के वर्तमान युग में भी, जहां सत्ता ‘स्वयंभू और एकमेव’ होने के अहंकार में चूर दिखती है, वहाँ गांधी के विचार ही सबसे बड़ा सहारा हैं।
यह प्रमाणित हो चुका है कि सत्याग्रह, अहिंसा और उपवास को हथियार बनाकर किसी भी अत्याचारी, सामंतवादी और दमनकारी शासन की जिद और घमंड को घुटनों पर लाया जा सकता है।
मीडिया के शोर और आईटी सेल की साज़िशों से बापू के विचार को मिटाने की चाह रखने वालों… सुन लो! गांधी कल भी तुम्हारी तानाशाही का काल थे, आज भी हैं।
महात्मा गांधी… तुम्हें भुलाने वालों को समय ने हमेशा कड़ा जवाब दिया है। क्योंकि गांधी की सत्य और अहिंसा पर आधारित विचारधारा ही शाश्वत सत्य है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
