@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर 

धूर्त, धोखेबाज़ भू माफियों के साथ संपूर्ण षड्यंत्र में बराबर की भागीदार फरार श्रीमती नीना पति संजय अग्रवाल और रितु पति मनोज अग्रवाल को प्लॉट के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के मामले में सेशन न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत!!

आरोपियों के खिलाफ 17 गंभीर आपत्तियां!! गैर जमानतीय 7 से 10 साल की जेल की सजा के अपराध में FIR! करोड़ो रूपए लेकर न तो प्लॉट दिए और न ही रजिस्ट्री करवाई! पति और साथी आरोपी वर्षों से फरार है! निगम में बंधक प्लॉट भी अवैध रूप से बेच डाले! टाउनशिप की संपूर्ण भूमि की टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमति के बावजूद टाउनशिप की भूमि का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा अवैध रूप से अन्य को विक्रय किया!! आरोपी महिलाओं के घर इंदौर में विभिन्न जगहों से लेकर मुम्बई और विदेशों तक में……सभी आरोपियों के पास पासपोर्ट भी है…..! टाउनशिप की जमीनें आरोपी पत्नियों के नाम….! न्यायालय की आदेश पत्र में आरोपी महिलाओं को गृहिणी की जगह व्यवसायिक और बिजनेस महिलाएं बताया गया है, ज़मीन के मालिकाना हक और संपूर्ण सरकारी अनुमतियाँ आरोपी महिलाओं के नाम पर ही है…..! फिर गृहिणी और सीमित भूमिका बताकर इंदौर सेशन न्यायालय ने कैसे अग्रिम जमानत के आदेश दे दिए!!

देश के न्यायिक सिस्टम (पुलिस, वकील और न्यायालयों में बैठे जज) से किसी पीड़ित को सही वक्त पर न्याय न मिलने की मुख्य वजह न्याययिक सिस्टम में बैठा हर वो शख़्स हैं, जो धूर्त, भ्रष्ट और अपराधी है। चूंकि वो संवैधानिक और वैधानिक पद पर बैठे है। और सरकार की सेवा में है तो उसके फैसले के खिलाफ आवाज उठाना इस आजाद हो चुके गुलाम देश में कानून की अवमानना, सरकारी काम में हस्तक्षेप और राष्ट्रद्रोह या राष्ट्रविरोधी जैसे गंभीर अपराध का दोषी है??

कुख्यात आशीष दास, पुष्पेंद्र वढेरा, गुरुनाम सिंह धालीवाल, गिरीश वाधवानी, रविंद्र, नवीन और दीपक तीनों पिता अमरदास माटा के साथ नीना पति संजय अग्रवाल और रितु पति मनोज अग्रवाल ने अपने धूर्त और धोखेबाज़ पतियों के साथ धूर्तता, धोखेबाजी, कूटरचना, जालसाजी और बेईमानी की सभी सीमाओं को पार करते हुए पिनेकल ड्रीम और पिनेकल द ग्रांड टाउनशिप का ऐसा जाल बुना और उस जाल से घर और प्लॉट खरीदने वालों से करोड़ो रूपए हड़प लिए। आज 11 साल बाद भी पीड़ितों को न तो प्लॉट मिला और न ही खून पसीने की गाढ़ी कमाई वापस मिली!!

तकरीबन 17 पीड़ितों द्वारा जिला कलेक्टर इंदौर, इंदौर नगर निगम, राज्य आर्थिक अपराध शाखा, क्राइम ब्रांच इंदौर के अलावा विभिन्न फोरमो में शिकायते की गई।

न्यायालय अपर कलेक्टर जिला इंदौर के अपर कलेक्टर श्रीमान गौरव बेनल ( IAS) के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 0224/ब -121/2024-25 में समस्त सबूतों और साक्ष्यों के साथ विस्तृत सुनवाई कर आदेश पारित किया। 

पारित आदेश में अपर कलेक्टर गौरव बेनल ने स्पष्ट रूप से यह फैसला देते हुए आदेश दिया कि “प्रकरण में यह सिद्ध पाया जाता है कि अनावेदकगणों द्वारा साथ मिलकर शिकायतकर्ताओं से प्लॉट के एवज में राशि प्राप्त की गई, परंतु प्लॉट नहीं दिया गया और न ही राशि वापस की गई। प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी की गई है। धोखाधड़ी के संबंध में कार्यवाही हेतु शिकायतकर्ताओं को सक्षम पुलिस अधिकारी के समक्ष समस्त साक्ष्यों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया जाना चाहिए।”

2 सितंबर 2026 को थाना क्राइम ब्रांच ने नीना अग्रवाल, रितु अग्रवाल और संजय अग्रवाल के खिलाफ भादवि की धारा 420, 409, 467, 468 और 120 बी 7 साल से लेकर 10 साल तक कि सजा और गैर जमानतीय अपराध की धाराओं में FIR दर्ज की। 

दिनांक 29 सितंबर 2026 को अपर सत्र न्यायालय इंदौर के माननीय न्यायाधीश मनीष कुमार लोवंशी ने 6 पीड़ित आवेदकों की गंभीर आपत्तियो के अलावा एक मुख्य फरियादी आपत्तिकर्ता रोहित सूद की तरफ से माननीय न्यायालय को बताया गया कि आरोपीगणों द्वारा BNSS की धारा 528 के तहत लगाई गई एक याचिका क्रमांक 45227/2026 लंबित है!! 

इसके अलावा नगर निगम में बंधक रखे प्लॉटो को अवैध रूप से विक्रय करना! टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से 22 एकड़ की अनुमति प्राप्त करने के बाद उसमें से 9.3 एकड़ जमीन किसी अन्य को विक्रय करना! 17 पीड़ितों एवं आवेदक गणों से करोड़ो रूपए प्लॉट के नाम पर लेने के बाद भी न तो रजिस्ट्री की और न ही कब्जा दिया!! फरियादियों और पीड़ितों की उपरोक्त गंभीर आपत्तियो के बावजूद न्यायाधीश ने मात्र 50 – 50 हजार रुपए की जमानत राशि पर नीना पति संजय अग्रवाल और रितु पति मनोज अग्रवाल को अग्रिम जमानत के आदेश दे दिए!!

क्या यह जमानत स्थिर रखे जाने योग्य है? यदि आरोपी ही पुलिस की गिरफ्तारी से बचाए जायेगे तो जाँच कैसे होगी?

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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