@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

“यथा राजा तथा प्रजा” को मानने वाले इस सनातनी देश में किस लोकतंत्र, कौन सी संवैधानिक संस्था और किस संविधान को बचा लेगा इंडियन एक्सप्रेस, सोशल मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवी?? 

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमर्जी और देश के चुनावों में वोटों की कथित हेराफेरी, चोरी, कांट – छांट को लेकर दो सहयोगी चुनाव आयुक्तों द्वारा की गई 14 आपत्तियों को दरकिनार कर!! सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाने के लिए देश के लोकतंत्र के साथ की गई डकैती की खबर इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रकाशित होने के बाद विपक्षी पार्टियों और मीडिया में जो हल्ला और सोशल मीडिया में जो कोहराम मचा है। उससे क्या हासिल कर लेगा अनपढ़, गँवार, रूढ़िवादी, परंपरावादी, अपराधिक और सदियों से गुलाम रहा भारत का गणतंत्र या जनतंत्र या जनता ??

भारत में चुनाव कैसे होते है और वोट कैसे डाले जाते है? किस तरह डलवाए जाते है? क्यों डाले जाते है? यह चुनाव आयोग से अच्छा भारत की जनता जानती है।

जब आज से 8 साल पहले देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था भारत की उच्चतम न्यायपालिका सुप्रीम कोर्ट में ठीक ऐसा ही मामला घटित हुआ था, तब से लेकर अब तक कुछ नहीं हुआ तो ये तो चुनाव आयोग है?? 

संवैधानिक संस्थाओं में सबसे सर्वोच्च संस्था भारत की उच्चतम न्यायपालिका सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में 12 जनवरी 2018 को एक ऐसी अभूतपूर्व और ऐतिहासिक घटना घटी थी। जब सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने देश के सामने आकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। भारतीय इतिहास में यह पहली बार हुआ था कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया से सीधे संवाद करके अदालत के प्रशासन पर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले ये चारों न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) दीपक मिश्रा के बाद सबसे वरिष्ठ थे।

चारों जजों ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली और सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक तौर-तरीकों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया था। 

जजों का मुख्य आरोप था कि मुख्य न्यायाधीश मुकदमों को आवंटित में अपनी मनमर्जी चला रहे थे। देश पर दूरगामी प्रभाव डालने वाले महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुकदमों को वरिष्ठ जजों की अनदेखी करके, बिना किसी तार्किक आधार के जूनियर जजों की चुनिंदा बेंचों को आवंटित किया जा रहा था। 

 प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जस्टिस चेलमेश्वर ने एक बेहद गंभीर बयान देते हुए कहा था, “यदि इस संस्था (सुप्रीम कोर्ट) को अक्षुण्ण नहीं रखा गया और इसने अपना संतुलन खो दिया, तो इस देश में लोकतंत्र जीवित नहीं रह पाएगा। “उन्होंने यह भी कहा कि वे नहीं चाहते कि 20 साल बाद इतिहास के बुद्धिजीवी यह कहें कि चारों जजों ने अपनी आत्मा बेच दी थी। 

बाद में इन चारों जजों में से एक रंजन गोगोई देश के मुख्य न्यायाधीश बन गए और रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा से मेंबर ऑफ पार्लियामेंट का पद प्राप्त कर लिया था।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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