@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
काले रंग के “हेल्मेट” को जिसमें ग्लास और फाइबर का फ्रंट भी होता हैं, को तपते सूरज और भीषण गर्मी में, सरकार की पुलिस किस वैज्ञानिक और मेडिकल आधार पर अनिवार्य रूप से पहनने का कानूनी फरमान जारी कर सकती हैं??

भीषण गर्मी में टू व्हीलर वाहन चालकों को सर गमछे, टोपी, पगड़ी आदि से ढक कर घर से बाहर निकलने को बुजुर्गों से लेकर मेडिकल साइंस तक अनिवार्य बताती है।लेकिन क्या भीषण गर्मी में शहर में काले रंग का हेलमेट लगाने को क्या मेडिकल साइंस अनिवार्य मानती है, सरकार को इसका भी पता कर लेना चाहिए।
एक तरफ कानून के जानकार न्यायालय के वकीलों को भीषण गर्मी में काले कोट पहनने की छूट होती हैं। लेकिन शहर के अंदर व्यस्त मार्गों में काले रंग के हेल्मेट पहनने को कानूनी रूप से अनिवार्य कर प्रशासनिक और सरकारी आदेश को पूर्ण रूप से लागू करना सरकार की पुलिस की पहली प्राथमिकता है??
टू व्हीलर वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाने की अनिवार्यता बायपास, रिंग रोड, और हाईवे पर होना कानूनी रूप से अनिवार्य होना चाहिए कि शहर में ज्यादा से ज्यादा 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में भीड़ भरे और रेंगते हुए ट्रैफिक और ट्रैफिक सिग्नल पर लगने वाले जाम पर?
अंतर्राष्ट्रीय गैंगस्टर से लेकर गली के गुंडे, मवाली, आदतन अपराधियों और पूरे शहर में फैले नशे के सौदागरो से शहर को बचाने से पहले पुलिस की पहली प्राथमिकता टू व्हीलर वाहन चालकों के लिए भीषण गर्मी में हेलमेट कानूनी रूप से अनिवार्य करना और चालान बनाना है!!
इंदौर शहर के विधायक और सांसद शहर की 40 लाख जनसंख्या को यह बताए कि इंदौर पुलिस प्रशासन द्वारा 43 डिग्री से 45 डिग्री के बीच, शहर के रेंगते और जाम हुए ट्रेफ़िक में हेलमेट की अनिवार्यता का आदेश टू व्हीलर चलाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए कैसे और किस प्रकार से अनिवार्य करना डॉ मोहन यादव की सरकार की पहली प्राथमिकता है?
अवैध रूप से चल रहे शहर की सभी शराब दुकानों से लगे अहातो पर अपराधिक प्रवृति के शराबियों को पकड़ने के बजाय शहर के हाईवे और रिमोट इलाकों में चलने वाले रेस्टोरेंट, ढाबों और रिसॉर्ट में छापा मारकर सभ्य, शरीफ और कामकाजी लोगों की शांतिपूर्ण लाइफ स्टाइल में खलल डालकर खुद की पीठ थपथपाना! पहली प्राथमिकता है!!
शहर के अपराधिक क्षेत्रों, गरीब, मजदुर और श्रमिक बस्तियों को अपराध और अपराधियों को ढूंढने और पकड़ने से ज्यादा शरीफ, सभ्य और शिक्षित लोगों की कारों में शराब की बॉटल ढूंढना? न जाने कौनसा पाईप में फूंक लगवाकर? कितनी शराब पी है? क्वार्टर, हॉफ या बॉटल? यह उस पाईप से जुड़ी मशीन कैसे बता देती हैं यह आज तक किसी को समझ नहीं आया? चूंकि 10 हज़ार रुपए कानूनी जुर्माना है इसलिए तोड़ बट्टे की काफी गुंजाइश है। अतः ऐसे लोगों को पकड़ना पहली प्राथमिकता है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
