@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
छात्र और अभिभावक कैसे पता करे कि किस यूनिवर्सिटी और किस कॉलेज में एडमिशन उनके भविष्य के बेहतर निर्माण के लिए सर्वश्रेष्ठ होगा? ये कौन बताएगा और किसकी जिम्मेदारी है?

इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग और यूनिवर्सिटियों के लिए कि उनके पास प्रदेश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों का रिजल्ट, शोध, उपलब्धि, प्लेसमेंट और स्किल के वार्षिक आधार पर सार्वजनिक किये जाने वाला कोई डाटा उपलब्ध नहीं है?
आज मध्यप्रदेश में तकरीबन 30 सरकारी और 40 से ज्यादा प्राइवेट यूनिवर्सिटियां संचालित हो रही हैं, इसके अलावा तकरीबन 3500 कॉलेज संचालित हो रहे है। प्रति वर्ष लाखों छात्र इन कॉलेजों में एडमिशन के लिए आते है। लेकिन छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह रहती हैं कि कौनसा कॉलेज या यूनिवर्सिटी छात्र के भविष्य निर्माण के लिए बेहतर या सर्वश्रेष्ठ होगी?
देश में उच्च शिक्षा की सर्वोच्च नियामक संस्था UGC (University Grants Commission) और सरकार का उच्च शिक्षा विभाग रिजल्ट, प्लेसमेंट और स्किल के आधार पर यूनिवर्सिटियों और मान्यता प्राप्त कॉलेजों की रैंकिंग क्यों नहीं लागू करती हैं?
इंदौर में मध्यप्रदेश सरकार की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) से मान्यता प्राप्त तकरीबन 230 से ज्यादा कॉलेज संचालित हो रहे है!! लेकिन आज तक देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने इन 230 कॉलेजों के वार्षिक रिजल्ट, शोध, और प्लेसमेंट से संबंधित कोई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं करवाई है, और न ही इन 230 कॉलेजों की श्रेष्ठता, उपलब्धि, प्लेसमेंट और रिजल्ट के आधार पर कोई रैंकिंग प्रथम 1 से अंतिम 230वें नंबर तक की वरीयता सूची जारी की है!?
यही हाल पूरे प्रदेश की सभी सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटीयो का है।
प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटियों और कॉलेजो में पढ़ने वाले छात्रों जिनको प्लेसमेंट की आवश्यकता है, उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार 100 फीसदी प्लेसमेंट के अधिकार की जिम्मेदारी यूनिवर्सिटियों और उनसे मान्यता प्राप्त कॉलेजों के लिए आवश्यक होगा। ऐसा कानून भारत सरकार और प्रदेश सरकार क्यों पारित नहीं करती हैं।
प्रदेश सरकार और भारत सरकार की सरकारी नौकरियों में योग्यता और काबिलियत के आधार पर प्रदेश की यूनिवर्सिटियों का कोटा निर्धारित करें।
राज्य के इंडस्ट्रियल क्षेत्रों और व्यवसायिक जगत में कितने उद्योगों में किस प्रकार के रोजगार उपलब्ध हैं? कितनी वेकेंसी है? क्या योग्यता और स्किल की आवश्यकता है? इसका कोई डाटा किसी भी वर्ष में प्रदेश सरकार ने कभी भी यूनिवर्सिटियों और कॉलेजो को उपलब्ध नहीं कराया है।
सरकार के सरकारी विभागों, निकायों और निगमों द्वारा प्रति वर्ष कितने छात्रों को परमानेंट या कुछ वर्षों के लिए प्लेसमेंट दिया जा सकता है। ऐसा कोई डाटा प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को कभी उपलब्ध नहीं करवाया जाता हैं??
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
