@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
क्या न्यायालय में बैठा जज?? पुलिस, सरकारी वकील और पुलिस के इन्वेस्टिगेटिग़ ऑफिसर (जांच अधिकारी) के हाथों की कठपुतली हो सकता हैं?
पति राजा रघुवंशी की हत्या में मुख्य षड्यंत्रकारी आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सेशन जज ने जमानत पर जेल से रिहा किया??

भारतीय कानून और सुप्रीम कोर्ट के अनेकों फैसलों में दिए गए न्याय दृष्टांतो के अनुसार, पुलिस की जांच या पुलिस जांच अधिकारी द्वारा न्यायालय में आरोपी और कथित अपराध के संदर्भ मे पेश की गई चार्जशीट को न्यायालय में पीठाधीश जज आंख मूंदकर नहीं मान सकता हैं।
जज के पास ‘Judicial Mind’ (न्यायिक विवेक) इस्तेमाल करने की शक्ति होती है। न्यायालय में बैठे जज सामान्य या व्यक्तिगत बुद्धि की जगह judicial mind से ही फैसला दे सकते है। इसलिए उसे जज, जस्टिस या न्यायाधीश कहा जाता हैं।
अगर पुलिस की जांच में कमी है, तो जज उसे खारिज कर सकता है, दोबारा जांच का आदेश दे सकता है। इसलिए कानूनी रूप से जज कठपुतली नहीं, बल्कि पुलिस के द्वारा पेश की गई जांच और चार्जशीट का परीक्षक होता है। न्यायालय में बैठे न्यायाधीश को अपने जूडिशियल माइंड का इस्तेमाल करते हुए अपराध की गंभीरता, आरोपी की संलिप्ता और घटित हुए अपराध का समाज में प्रभाव देखकर फैसला करना होता हैं।
उपरोक्त विधिक मान्य प्राकृतिक न्याय और न्यायादृष्टांतों को अनदेखा करते हुए, पूरे देश में चर्चित इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस में मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय की सेशन न्यायालय के जज ने जमानत दे दी!
सुनियोजित साजिश के तहत अपने पति की हत्या को अंजाम देने वाली मुख्य षड्यंत्रकारी आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सेशन जज द्वारा जमानत देने का मुख्य आधार पुलिस के अभियोजन पक्ष और जांच अधिकारियों के द्वारा की गई खामियों, जांच और विवेचना में कानूनी गलतियों, लिपिकीय त्रुटियों, गिरफ्तारी की प्रक्रिया का पालन न करने और मुकदमे में हो रही देरी को बनाकर आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को जमानत पर रिहा करने के आदेश पारित कर दिए!!
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
