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कांग्रेस से भाजपा में आए काबिल और प्रतिभाशाली नेताओं को संगठन और सरकार में पद, प्रतिष्ठा और सम्मान का मौका कब मिलेगा?

कांग्रेस और कांग्रेसी परिवारवाद और पट्ठावाद की राजनीति से मुक्त भारत की पहल के तहत मोदी-शाह का दूसरे दलों से आए प्रतिभावान और काबिल नेताओं को सम्मान की राजनैतिक विचारधारा का अनुसरण मध्यप्रदेश भाजपा संगठन, मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता करेंगे??

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय राजनीति में एक नई परंपरा शुरू की है। उन्होंने दूसरे दलों से आए काबिल नेताओं को न केवल अपनाया, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जैसे शीर्ष पदों से नवाज कर यह संदेश दिया कि भाजपा में ‘प्रतिभा’ का सम्मान सर्वोपरि है। 

क्या मध्य प्रदेश भाजपा का वर्तमान नेतृत्व मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश के कद्दावर नेता इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस से आए युवा और योग्य चेहरों को निगमों, मंडलों और निकायों में उचित स्थान देकर नई मिसाल कायम करेंगे?

लेकिन…….? कांग्रेस से दो तरह के नेता भाजपा में पिछले कुछ सालों में आए हैं। एक वो जिन्हें कांग्रेस ने सब कुछ दिया पार्षद, विधायक और सांसद बनवाने से लेकर मंत्री तक बनवाया। लेकिन किसी दवाब, प्रभाव या राजनीति में वक्त की नजाकत को देखकर उन्होंने पाला बदल लिया या कांग्रेस को छोड़ दिया! वो ही इसे बेहतर तरीके से बता सकते हैं।

दूसरा वर्ग उन नेताओं का है जो पीढ़ियों से वैचारिक रूप से जुड़े थे, लेकिन कांग्रेस की ‘पट्टावाद’ और ‘परिवारवाद’ की संस्कृति के कारण खुद को घुटन में महसूस कर रहे थे। कांग्रेस ने चुनावी राजनीति में उनका इस्तेमाल तो किया, लेकिन जब उन्हें आगे बढ़ाने की बात आई, तो परिवारवाद और पट्ठावाद आड़े आ गया। ये वे काबिल युवा हैं जो कांग्रेस के ‘स्वर्ण युग’ में भी केवल उपेक्षा के शिकार रहे।

क्या मध्य प्रदेश भाजपा का संगठन इन ‘उपेक्षित लेकिन काबिल’ युवाओं को वह मान-सम्मान और पद दे पाएगा, जिसकी उम्मीद में उन्होंने एक नया राजनैतिक वैचारिक सफर शुरू किया है? यदि प्रदेश नेतृत्व मोदी-शाह की तरह दरियादिली दिखाता है, तो यह न केवल संगठन को मजबूती देगा बल्कि अन्य दलों के युवाओं के लिए भी भाजपा को एक ‘उम्मीद की किरण’ के रूप में स्थापित करेगा।

यदि अन्य दलों से आए काबिल युवा नेताओं को उपेक्षित रखा जाता है, तो भविष्य में अन्य दलों के प्रतिभाशाली नेताओं के लिए भाजपा के दरवाजे बंद महसूस होने लगेंगे। राजनीति में संदेश बहुत महत्वपूर्ण होता है; यदि संदेश यह गया कि “भाजपा केवल चुनाव जीतने के लिए इस्तेमाल करती है और बाद में दरकिनार कर देती है” तो पार्टी की राजनैतिक विश्वसनीयता वैचारिक स्वीकार्यता कम हो सकती है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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