@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

सन् 2014 से मोदी मंत्रिमंडल के मंत्रियों की अयोग्यता, अक्षमता, अनुभवहीनता और अदूरदर्शिता भाजपा के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं?

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में संगठन के पदाधिकारियों से लेकर केंद्र और राज्यों के मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों के चयन और यहा तक कि महापौर, विधायकों व सांसदों के टिकट वितरण तक—भाजपा आलाकमान अपने अप्रत्याशित (चौंकाने वाले) निर्णयों के लिए जाना जाता है। शीर्ष नेतृत्व के इन फैसलों से अक्सर पूरी पार्टी अचंभित रह जाती है। यह आश्चर्य स्वाभाविक भी है, क्योंकि इन निर्णयों में पारंपरिक पैमाने जैसे कि वरिष्ठता, अनुभव, योग्यता, विद्वता, वफादारी या ईमानदारी की कोई स्पष्ट कसौटी दिखाई नहीं देती। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अप्रत्याशित फैसलों की इस निरंतरता ने पार्टी के भीतर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। जब निर्णयों का आधार वरिष्ठता, अनुभव, योग्यता और वफादारी जैसी स्थापित कसौटियों के बजाय पूरी तरह अप्रत्याशित होने लगे, तो कार्यकर्ताओं में भ्रम फैलना स्वाभाविक है। बिना किसी ठोस पैमाने के लिए जा रहे ये चौंकाने वाले फैसले कहीं आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी के सुदृढ़ भविष्य को अंधकार की ओर न धकेल दें, यह चिंता अब पार्टी के भीतर भी महसूस की जाने लगी है।

अटल, आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की भारतीय जनता पार्टी और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले अनुभवी और जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं को पिछले 12 सालों में न सिर्फ हाशिए पर डाला गया वरन् समय समय पर उन्हें उनके ही जूनियरों और विपक्षी पार्टियों से मोदी की भाजपा में आए नेताओं के सामने उपेक्षित और अपमानित करवाया जा रहा है?? 

राज्यों के मुख्यमंत्रियों के चयन से लेकर केंद्रीय मंत्रीमंडल में मंत्रियों के चयन तक में यह स्पष्ट रूप से नजर आता है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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