@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर 

हजारों साल से हिंदू धर्म में चली आ रही अपराधिक वैवाहिक व्यवस्था को 180 डिग्री से बदलने का वक्त आ चुका है। 

अब समय आ गया है कि दुल्हा और उसका परिवार अपनी औकात और हैसियत के हिसाब से दुल्हन को वो सब दे, जो वो अब तक विवाह के नाम पर सदियो से लेता आ रहा हैं।

जिस तरह मोदी सरकार ने मुस्लिम समाज में तीन तलाक जैसी इस्लामिक परम्पराओं को गैर कानूनी और अपराधिक बनाकर मुस्लिम लड़कियों को सुरक्षित किया है। उसी तरह हिंदू विवाह व्यवस्था की वर, दुल्हा और ससुराल प्रधान व्यवस्था को बदलकर इसे वधु, दुल्हन प्रधान बनाकर हिंदू लड़कियों को सुरक्षित किया जाए क्योंकि सदियों से विवाह और ससुराल के नाम पर लड़कियों का आर्थिक, शारीरिक और मानसिक शोषण इस देश में किया जा रहा हैं। जो मानवता के नाम पर सबसे बड़ा अपराध है।

अब समय आ गया है कि समाज और सरकार खत्म करे पुरुष (वर) प्रधान वैवाहिक व्यवस्था। दूल्हे को दहेज के रूप में एक मुस्त धन राशि से लेकर अन्य कीमती सामान जिसे हम दहेज कहते है, की परम्परा को खत्म कर वधु को नगद, गोल्ड और घरेलू सामान शादी के समय वर पक्ष को देना अनिवार्य कर उसका भविष्य सुरक्षित करना वर पक्ष के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे न केवल बेटियों पर से ‘बोझ’ का ठप्पा हटेगा, बल्कि समाज में वास्तविक समानता की शुरुआत होगी।

समाज और सरकार दोनों को मिलकर इस पुरुष (वर) प्रधान वैवाहिक मानसिकता को जड़ से खत्म करना होगा। विवाह दो परिवारों और दो जिंदगियों का एक समान मिलन है। इसे किसी एक पक्ष पर आर्थिक बोझ डालने का जरिया नहीं बनाया जा सकता। और न हीं कानून और समाज किसी घर की लाडली का ससुराल के नाम पर शारीरिक और मानसिक शोषण करने की अमानुषिक और अपराधिक परम्परा को जारी रहने देने का अपराधिक कृत्य कर सकता हैं।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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