@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
अब तो चंदे और चढ़ावे का पूरा हिसाब चाहिए: 1992 से अब तक मिले चंदे, चढ़ावे, दान, सोना, चांदी, हीरे, बहुमूल्य कीमती रत्नों और वित्तीय खातों को सार्वजनिक किया जाए – प्रभु श्री राम

1992 से कार सेवा के दौर से भव्य मंदिर निर्माण तक कितना चंदा, दान और चढ़ावा आया? क्विंटलो में चढ़ाए गए सोने, चांदी, आभूषण, मुकुट, हीरे और अन्य बहुमूल्य रत्नों की वर्तमान में स्थिति क्या है? विदेशी और घरेलू चंदा और देश-विदेश से मिले अरबों रुपए के वित्तीय खातों को आम जनता और रामभक्तो के लिए सार्वजनिक किया जाए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल जैसे संगठनों ने सन् 1992 और उसके बाद से ही मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश में व्यापक स्तर पर निधि समर्पण अभियान चलाए।
सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में फैले सनातन धर्म के मानने वालों और राम भक्तों ने इस पावन कार्य के लिए अपनी श्रद्धा के अनुसार अरबों रुपए का दान दिया।
अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए केवल आम जनता ने ही नहीं, बल्कि देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों, हीरा व्यापारियों और कॉरपोरेट जगत के दिग्गजों ने भी दिल खोलकर दान दिया है।
मंदिर निर्माण पूरा होने और राम लला के विराजमान होने के बाद से मंदिर में सोने, चांदी, कीमती रत्नों और नकद राशि के रूप में भारी चढ़ावा आ रहा है।
मंदिर के लिए जमीन अधिग्रहण से लेकर मंदिर निर्माण में लगी अरबों रुपए की रकम किस मद में कितनी -कितनी खर्च की गई, लेबर से लेकर साज सज्जा तक के खर्च की पूरी बैलेंस शीट को सार्वजनिक किया जाए।
दुनिया भर के करोड़ों भक्तों की यह भावना है कि उनके द्वारा समर्पित की गई पाई-पाई का उपयोग पूरी तरह से पारदर्शी और प्रामाणिक तरीके से हो।
सनातन धर्म की साख और करोड़ों भक्तों के विश्वास को अक्षुण्ण रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि दान और चढ़ावे से प्राप्त अरबों रुपए के वित्तीय खातों (Audit Reports) को सार्वजनिक किया जाए।
यदि कहीं भी किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता की आशंका है, तो उसकी पूरी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई पूरी दुनिया के सामने आ सके।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
