@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
ऐसे नेता भी व्यक्तिगत स्वार्थ और निजी हित के लिए पार्टी के प्रति वफादार नहीं होते हैं!! पार्टी के प्रति कृतज्ञ बनो, इतना भी कृतघ्न मत बनो।

नेता जी 6 बार भाजपा से विधायक रहे! 2003 से 2026 तक राज्य मंत्री से लेकर गृह मंत्री पद तक सत्ता के चरम सुख, सम्मान और वैभव का आनंद लिया।
पार्टी और सरकार ने मान-सम्मान और शुभ-लाभ के अनगिनत अवसर दिए, जिसकी बदौलत लक्ष्मी जी की अपार अनुकम्पा बरसी…। आगामी सात पुस्तो के लिए ऐशो आराम से जिंदगी बिताने की व्यवस्था हो चुकी हैं।
67 साल की उम्र में एक बार पार्टी ने विधायकी का टिकट क्या काट दिया आज वही नेता पार्टी के प्रति कृतज्ञ होने के बजाय कृतघ्नता की सारी हदें पार कर रहे हैं! इसे ही कहते हैं अहसान फरामोशी की पराकाष्ठा! और घोर कृतघ्नता का जीता-जागता उदाहरण है।
यदि ऐसा ही चलता रहा तो नई ऊर्जावान, युवा और बुद्धिजीवी कर्मठ कार्यकर्ताओं को तो कभी मौका ही नहीं मिलेगा?
रही बात कार्यकर्ताओं की वो तो अपने निजी स्वार्थ और व्यक्तिगत संबंधों की खातिर हमेशा नेता और मंत्री के प्रति निष्ठावान होते है। उनके लिए नेता पहले पार्टी बाद में विचारधारा सर्वोपरि रहती हैं।
कद्दावर, धनाढ्य और बाहुबली नेताओं के कार्यकर्ता जहाँ नेता वहां वो की विचारधारा से चलते है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
