@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

महापौर पुष्यमित्र भार्गव तुम निर्दोष हो, शहर तुम्हें बा – इज्जत बरी करता है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि शहर के असली आरोपी खुले आम सत्ता की मलाई और सरकार का सुख भोग रहे है?

पहली बार महापौर बने पुष्यमित्र भार्गव के 4 साल के कार्यकाल को भारी-भरकम उम्रदराज और अकर्मण्य हो चुकी राजनीतिक और भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था को साथ रखकर देखना न्यायोचित होगा।

क्योंकि इस शहर की कमान न केवल यहां के महत्वाकांक्षी नेताओं और रसूखदार धनाढ्य व्यवसायियों के हाथों में है बल्कि भोपाल में बैठे सत्ताशीर्ष और उनके प्रशासनिक सिपहसलारों की गिद्ध नजरें भी इस शहर की कमान हथियाने पर लगी है।

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव का यह पहला कार्यकाल है। यदि उनके चार साल के सफर का आकलन शहर की पूरी राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में किया जाए—जिसमें 85 पार्षद, दो दशकों से जमे 6 विधायक, 8 सालों से प्रतिनिधित्व कर रहे सांसद, दो कद्दावर कैबिनेट मंत्री जिसमें एक नगरीय विकास मंत्री तो दूसरा जल संसाधन मंत्री और इंदौर शहर के प्रभारी स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित उनके द्वारा पदस्थ नौकरशाही शामिल है— इन सभी दिग्गजों की जनता के प्रति जवाबदेही और शहर के विकास के प्रति जागरूकता की कसौटी पर परखे तो सिर्फ निराशा ही शहर के खाते में आती हैं।

यदि इस पूरे तंत्र की जवाबदेही की कसौटी पर पहली बार चुनकर आए महापौर पुष्यमित्र भार्गव के 4 साल के कार्यकाल की….सफलता-असफलता को तौला जाए, तो शहर के ज्वलंत मुद्दों के प्रति उनकी ईमानदारी, अटूट मेहनत और जनता से जुड़ाव उन्हें बेहद सराहनीय और प्रशंसा का पात्र बनाता है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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