@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

दैनिक भास्कर व्यवसायिक मीडिया की इस तरह की पत्रकारिता को क्या कहेंगे? रियल एस्टेट इंडस्ट्री को डराने, धमकाने और दवाब बनाने की पत्रकारिता? या सफेद पोश ब्लैकमेलिंग पत्रकारिता?

दैनिक भास्कर का स्टिंग ऑपरेशन या व्यवसायी की साख गिराने की शर्मनाक कोशिश?

तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया के नाम से जाना जाने वाला दैनिक भास्कर अखबार ने शहर के दशकों पुराने प्रतिष्ठित, रेरा द्वारा मान्यता प्राप्त रियल एस्टेट बिल्डर की वैध और रेरा द्वारा मान्यता प्राप्त टाउनशिप में प्लॉट खरीदने के लिए, अखबार के पत्रकार को फर्जी ग्राहक बनाकर प्लॉट खरीदने की बात कंपनी की सेल्स एक्जीक्यूटिव से करवाकर उस बातचीत को भास्कर इंवेस्टिगेशन का नाम देकर सोमवार 3 अगस्त को फ्रंट पेज की पहली खबर बनाकर प्रकाशित कर दिया?

खबर में इस बात को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया कि टाउनशिप के पास प्लॉट बिक्री के सभी कानूनी अधिकार और रेरा अप्रूवल मौजूद हैं।

जब तक कोई कानूनी वित्तीय अनियमितता या टाउनशिप की वैधता और कानूनी मान्यता को लेकर किसी ग्राहक की कोई शिकायत न हो, किसी सरकारी विभाग से कोई रोक या मंजूरी न हो तो निवेशकों के प्लॉट वैध और रेरा द्वारा मान्यता प्राप्त टाउनशिप में खरीदना और बेचना कब से अपराध की श्रेणी में आ गया है? या किसी मीडिया संस्थान की सनसनी खेज खबर बनाने की पत्रकारिता की श्रेणी में??

व्यवसाय की सामान्य बातचीत या प्लॉट को रिसेल करने की बातचीत को पत्रकार द्वारा फर्जी ग्राहक बनकर रियल एस्टेट संस्थान को बदनाम करने के उद्देश्य से प्रकाशित करना सीधे सीधे ब्लैकमेलिंग है। 

संस्थान के मालिक द्वारा मोबाईल न उठाना या sms का जवाब न देना कोई यह लिखकर प्रकाशित कर देना कि वो डायरियों और पर्चियों पर हुए सौदों से जुड़े सवालों से बचते रहे! यह सीधे सीधे ब्लैकमेलिंग और मानहानि के लिए प्रकाशित किया गया। 

जवाब देने से बचते रहे यह लिखने का आधार क्या है? यह तो तथाकथित पत्रकार या संपादक महोदय ही बता सकते हैं।

बिना किसी ठोस वित्तीय अनियमितता या दस्तावेजी गड़बड़ी के, सिर्फ एक सेल्स एग्जीक्यूटिव से दैनिक भास्कर के पत्रकार ने फर्जी ग्राहक बनकर की गई बातचीत को मुख्य आधार बनाकर मनगढ़ंत खबर बनाकर उसे फ्रंट पेज की पहली खबर बनाने के पीछे दैनिक भास्कर प्रबंधन की नीयत और व्यवसायिक दृष्टिकोण साफ परिलक्षित होता हैं। 

पिछले कई वर्षों से तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया स्टिंग ऑपरेशन के नाम पर सिर्फ प्रबंधकों और संस्थान के व्यवसायिक लाभ के लिए फर्जी मनगढंत और बनावटी खबर अपने पत्रकारों और संपादकों के माध्यम से तैयार कर, उसे स्टिंग ऑपरेशन या इंवेस्टिगेशन का नाम देकर फ्रंट पेज पर प्रकाशित करते आ रहे है। इज्जतदार और शाख वाले संस्थानों को मजबूर करते हैं लाखों करोड़ो के अनैतिक लाभ के लिए!! शर्मनाक है ऐसी पत्रकारिता।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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