@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

80 फीसदी विधायक और सांसदों की औकात नहीं है कि वो निर्दलीय चुनाव जीतकर दिखा दे! फिर दूसरी – तीसरी बार चुनावी टिकिट क्यों?

आज की चुनावी राजनीति में चुनाव उम्मीदवार नहीं राजनैतिक पार्टियां लड़ रही है। पार्टियों के चुनाव चिह्न पर वोट डाले जाते हैं। इसलिए कोई भी ऐरा गेरा अपराधी, गुंडा, माफिया, गधा, मूर्ख, बुद्धिहीन पार्टी की टिकिट पाकर चुनाव जीत सकता है! मंत्री यहां तक मुख्यमंत्री भी बन सकता हैं! और लगातार बना रह सकता हैं।

आज हालात यह है कि भाजपा और कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतने वाले 80 फीसदी विधायक और सांसदों की औकात नहीं है कि वो निर्दलीय चुनाव जीतकर बता दे!! फिर क्यों एक या दो बार से ज्यादा चुने गए विधायक को पार्टियां वापस टिकट देकर चुनाव में उतारती है?

सैकड़ों कार्यकर्ता ऐसे है जो दिन रात पार्टी का और पार्टी की विचारधारा के लिए काम करते है। और सबसे बड़ी बात यह है कि वो मौजूदा, पार्षदों, विधायकों, मंत्रियों, यहां तक कि मुख्यमंत्री से भी ज्यादा काबिल, बुद्धिमान और राष्ट्रभक्त है। उन्हें कब मौका मिलेगा?

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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