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लव, सेक्स और युवा, वर्जनाओं को तोड़ते युवा
अपोजिट सेक्स के प्रति प्यार न सही, वरन पैदा होते आकर्षण ने लड़कियों में बॉयफ्रेंड बनाने का प्रचलन तेजी से बढ़ाया है। भावनाओं पर हावी इच्छाओं से अधिकांश लड़कियों ने बॉयफ्रेंड बनाने को कल्चर एवं प्री-मेरिटल सेक्स संबंधों को लगभग सामान्य जीवन प्रक्रिया मान लिया है।

बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड के साथ भविष्य की चिंताओं से दूर बेहिचक बांहों में बांहें डाल घूमते बिंदास युवाओं की प्री-मेेरिटल सेक्स के प्रति सोच नए भारतीय समाज की रचना कर रही है। अपोजिट सेक्स के प्रति प्यार न सही, वरन पैदा होते आकर्षण ने लड़कियों मेें बॉयफ्रेंड बनाने का प्रचलन तेजी से बढ़ाया है। भावनाओं पर हावी इच्छाओं से अधिकांश लड़कियों ने बॉयफ्रेंड बनाने का कल्चर एवं प्री-मेेरिटल सेक्स संबंधों को लगभग सामान्य जीवन प्रक्रिया मान लिया है। आधुनिक सोच की नुमाइंदगी करती ऐसी लड़कियां के मन में वर्जिनिटी खोने का भय नहीं है। आकर्षण से पैदा होते संबंधों ने ग्लैमर एवं रुपयों की चकाचौंध से वर्ण व्यवस्था एवं जातिगत भेद को दरकिनार करते हुए समाज में हाईब्रीड (वर्णसंकर) पीढ़ी के निर्माण की शुरुआत कर दी है। आज के युवाओं में प्री-मेेरिटल संबंध या वर्जिनिटी भारतीय समाज को भविष्य के प्रति सकारात्मक तरीके से सोचने की चेतावनी है। बिंदास होते युवाओं और उनकी खोती वर्जिनिटी के बारे में पेश है एक रिपोर्ट-
कुछ महीनों पहले घर से दूर आई प्रिया की लाइफ स्टाइल आजकल बदली-बदली सी है। सलवार सूट्स में रहने वाली प्रिया आज शाट्र्स और स्कट्र्स में नजर आती है। घंटों फोन पर बातें करना, पब, पार्टियों में जाना उसकी रोजमर्रा की जिंदगी मेें शुमार है। कभी खर्च को लेकर सचेत प्रिया आज खर्च करने में जरा भी नहीं झिझकती है। जब सहेलियों ने इसकी वजह खोजी तो पता चला कि प्रिया का नया बॉयफ्रेंड बना है, जो उसका पूरा खर्च उठाता है। ऐसे में उसे उसके साथ बेहिचक बांहों में बाहें डालकर घूमना गलत नहीं लगता। प्यार हो न हो, मगर बायफ्रेंड की चमचमाती गाडिय़ों और क्रेडिट काड्र्स ने उसे लुभाया था। यही वजह है कि चार दिन की चेटिंग के बाद ये नेट फ्रेंड्स आज गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड बन गए। ये सिर्फ प्रिया की ही नहीं, बल्कि ऐसी कुछ लड़कियों की कहानी है, जो कॅरियर बनाने के लिए घर से दूर हैं। ग्लैमर और रुपयों की चकाचौंध में भले ही सच्चा प्यार न सही, लेकिन एक गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के साथ ने युवाओं में स्टेटस को बढ़ाया है। आजकल युवाओं में गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड बनाना स्टेट्स सिंबल बन गया है। आज के अधिकांश युवा गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड के न होने से शर्मिंदगी महसूस करते हैं। नेट और रांग नंबर से शुरू हुई बातें कब डेटिंग में बदल जाती हैं, पता ही नहीं चलता। कुछ ऐसे प्रसंगों का सुखद अंत भी मुमकिन है, वहीं शादी से पहले अंतरंग संबंध आम बात हो गई है।
लव, सेक्स और समाज

lovers in garden

कुछ वर्ष पूर्वं रिलीज फिल्म लव, सेक्स और धोखा की कहानी मेें कितना सच है और कितना झूठ… यह तो समाज समीक्षक जानें। अब तक यही कहा जाता था कि भारतीय समाज में पारिवारिक बंधनों और मर्यादाओं की जड़ें बहुत गहरी हैं और यह आसानी से काटी नहीं जा सकती, लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं, खासकर शहरों में। इससे इंदौर भी अछूता नहीं है। महिलाओं का बढ़ता वर्चस्व जहां पुरुषों के एकाधिकार वाले क्षेत्रों में चुनौतियां पेश कर रहा है, वहीं बिंदास होती युवतियों में बॉयफ्रेंड का क्रेज तथा प्री-मटेरियल सेक्स ने नए समाज को जन्म दिया है। आधुनिकता की दौड़ में तेजी से उभरे इंदौर में भी खुलापन जोर पकड़ रहा है। इस प्रचलन में बाहर से पढऩे आए युवक-युवतियां ज्यादा सहभागिता निभा रहे हैं, जो कई सवालों को जन्म दे रहे हैं, जैसे- क्या युवाओं में बढ़ रहा गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का क्रेज जायज है? क्या आने वाली पीढिय़ां हाईब्रीड हो जाएंगी? अंतरजातीय विवाह क्यों बढ़ रहे हैं? इनका जवाब मुश्किल नहीं होगा। वहीं लड़कियां पब, पार्टी कल्चर की ओर तेजी से आकर्षित हो रही हैं। यह भी एक कारण है शादी से पहले सेक्स के मामले बढऩे का। गर्भनिरोधक के उपयोग के चलते अब लड़कियां खुलेपन के साथ शादी से पहले सेक्स संबंधों को स्वीकारने से नहीं हिचकिचाती। ये सभी सवाल मुंह बाए खड़े हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे तो हम भविष्य में एक ऐसे समाज से रूबरू होंगे, जहां एक-दूसरे के आदर की जगह जरूरतों को ज्यादा अहमियत दी जाएगी। वैसे भी सामान्य होते लिव-इन रिलेशनशिप के चलते समाज में कई रिश्ते बन रहे हैं। इस पर कानूनी मुहर लगने के बाद यह और खुलकर सामने आ गया है। युवाओं के लिए शादी के पहले संबंध कोई बड़ा मुद्दा नहीं रह गया है? यही इनकी बदलती बिंदास स्टाइल की ओर इशारा करता है?
क्या अगली जनरेशन हाईब्रीड होगी

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कायस्थ की लड़की, ब्राह्मण का लड़का एक प्रसिद्ध धारावाहिक की यह लाइन समाज के हर वर्ग में देखने को मिलती है। मिलीजुली जातियों के इस विवाह का परिणाम एक हाईब्रीड पीढ़ी के रूप में सामने आएगा। नई सोच, नई दिशा का दावा करने वाले युवा ऐसे समाज की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं, जहां वर्षों से चली आ रही वर्ण व्यवस्था या जातिगत भेद कोई मायने नहीं रखेगी। कहीं दबे-छिपे तो कहीं खुलकर समाज भी इस नए बदलाव को अपना रहा है। अपने इकलौते बेटे या बेटी की खुशियों के लिए अधिकतर मां-बाप उस रिश्ते को अपना रहे हैं, जो भले ही उनकी जाति या समाज का ना हो। विद्रोही बच्चों की आवाज के नीचे परिजन की इच्छाएं मायने नहीं रखती। कहीं तो यह बात सौ फीसदी सच है, मगर इसका दूसरा पहलू भी है, जहां मां-बाप खुद अपने वैल एजुकेटेड बेटे या बेटी के लिए उसी स्टेटस का हमसफर चाहते हैं, भले ही वह अन्य किसी समाज का हो। अब तो गोत्र को लेकर चली आ रही परंपराएं भी बौनी साबित हो रही हैं। जिसका उदाहरण इंदौर के रवि और रेणु वर्मा ने शादी करके दिया हैं। रेंगर समाज के बहिष्कार के बावजूद ससुर बीएल वर्मा ने रेणु को अपनी बहू स्वीकार किया। इस वाकये से पहले भी हरियाणा में मनोज-बबली कांड हुआ। भले ही खाप पंचायत ने दोनों को मौत के घाट उतार दिया, लेकिन सच तो यह है कि मनोज और बबली नई रीत चला गए। वैसे भी अंतरजातीय विवाह को गलत ठहराने वालों के पास कोई जोरदार तर्क नहीं है। हो सकता है कि इस मिली-जुली पीढ़ी के आने के बाद धर्म और जाति के नाम पर होने वाली सांप्रदायिकता हिंसा बंद हो जाए। किसी को भी नीची निगाहों से न देखें, सभी का सामाजिक स्तर एक हो, समान अधिकार मिल जाए, आरक्षण खत्म हो जाए, यही तो सब चाहते हैं। शादी से पहले सेक्स को जायज नहीं ठहराया जा सकता, वहीं अंतरजातीय विवाह में भी कोई बुराई नहीं है। आज का युवा परिस्थितियों और जरूरतों को समझता है, लेकिन किशोर अवस्था में उठाए गए गलत कदम उसके भविष्य को बिगाड़ सकते हैं।
वर्जिनिटी : युवाओं में अब मुद्दा नहीं
इंटरनेट से मिलता है बढ़ावा

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आज शादी से पहले सेक्स के मामले जिस तरह बढ़े हैं, उसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल हो गया है। दरअसल बिना रोक-टोक के चलते युवाओं को और उन्मुक्त कर दिया है। सेक्स की इच्छाओं को दबाना, सामाजिक मजबूरियां और परिवार का डर दिमाग में द्वंद्व पैदा करता है। एक तरफ समाज और उसके नियम होते हैं, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक सोच की नुमाइंदगी करता मन, जो खुद को किसी नियम-कानून और रूढि़वादिता से नहीं बांधना चाहता। नवरात्रि, होली, दीवाली जैसे त्योहार अब मिलने का बहाना बन गए हैं, तभी तो इन दिनों आई-पिल्स और कंडोम की बिक्री अचानक बढ़ जाती है।
विज्ञापन दे रहे गलत संदेश

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प्री-मेरिटल सेक्स की घटनाएं या तो दोनों की रजामंदी से होती हैं या बॉयफ्रेंड इसके लिए गर्लफ्रेंड को उत्साहित करते हैं। हजारों युवा इस तरह की साइट सर्च करते हैं, जिन पर सुरक्षित सेक्स से जुड़ी जानकारियां मौजूद रहती हैं। एक उम्र के बाद सेक्स की इच्छाएं बहुत प्रबल हो जाती हैं। कॅरियर और पढ़ाई के चलते युवा 30 से पहले शादी को प्राथमिकता नहीं देते। ऐसे में गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के जरिये अपनी जरूरतें पूरी करते हैं।

आई पिल्स का खेल

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प्री-मेेरिटल सेक्स से जुड़ी साइट्स के अलावा टीवी भी एक बड़ा जरिया बन गया है। टीवी पर दिए जाने वाले आई-पिल्स एड या दूसरे सिक्युरिटी रीजन भी अविवाहितों को इस ओर आकर्षित करते हैं। आई पिल्स के एड में युवती अपनी सहेली को दबी आवाज में कोने में जाकर इस तरह की असुरक्षा की बात करती है, जो यही इंगित करता है कि परेशानी बता रही कि दूसरी युवती अविवाहित है। इसके अलावा भी दूसरी सुरक्षाओं के बारे में खुलेआम बताते हैं, जिस कारण गर्भपात के मामले बढ़ रहेे हैं।धीरे-धीरे खुलापन कई बार महंगा साबित होता है, लेकिन गर्भनिरोधक गोलियों ने इसे और आसान बना दिया है। इंदौर में किए गए सर्वे के अनुसार होस्टल और कॉलेज के आसपास मेडिकल स्टोर्स पर हर दिन गर्भनिरोधक वस्तुएं ज्यादा बिकती हैं, वहीं होस्टल बहुल भंवरकुआं और नौलखा क्षेत्र के आसपास हर दिन दर्जनों पैकेट बिकते हैं। एक अन्य सर्वे के अनुसार बड़े शहरों में खोती वर्जिनिटी का अनुपात 80 फीसदी है, तो छोटे शहरों में 60 व गांवों में 40 प्रतिशत।
फ्लैट्स बने ठिकाने

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बाहर के युवाओं के लिए अनजान शहर में यूं तो ठिकानों की कमी नहीं है। क्लब, रेस्टारेंट से लेकर गार्डन या पार्किंग एरिया लवर्स पाइंट में कपल आसानी से देखे जा सकते हैं। फिर भी लोगों की निगाहों से बचने की सबसे अच्छी जगह उनका या दोस्तों का फ्लैट्स होता है, जहां बिना रोकटोक के मौजमस्ती की जा सकती है।

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