@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
इंदौर रियल एस्टेट सेक्टर ग्राहकों की पारंपरिक मानसिकता को आधुनिक, सर्व-सुविधा युक्त टाउनशिप के पक्ष में बदलने में विफल क्यों दिख रहा है?

इंदौर के रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों से चल रही मार्केटिंग रणनीतियों और अरबों रुपये के विज्ञापन बजट की प्रभावशीलता पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती हुई दिख रही हैं। यह कहना कि ये पूरी तरह विफल हो चुके हैं, शायद एकतरफा मूल्यांकन होगा, लेकिन यह भी बिल्कुल सच है कि पारंपरिक मार्केटिंग का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) न्यूनतम स्तर पर आ गया है।
करोड़ों-अरबों रुपये के फुल-पेज अखबार विज्ञापन, रेडियो एफएम, सोशल मीडिया कैंपेन, शहर भर में लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स, भोजन और भव्यता के साथ आकर्षक उपहारों और कई तरह की छूटों से सजे ‘आवास मेले’, भारी-भरकम मार्केटिंग स्टाफ और दलाल-एजेंटों की फौज… यहां तक कि शहर के लगभग हर सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में स्पॉन्सरशिप (प्रायोजक) होने के बावजूद, इंदौर का रियल एस्टेट सेक्टर स्थानीय लोगों का माइंडसेट बदलने में विफल क्यों हो रहा है? आखिर क्यों इतनी आक्रामक मार्केटिंग के बाद भी लोग सर्व-सुविधा युक्त और आधुनिक टाउनशिप संस्कृति को पूरी तरह नहीं अपना पा रहे हैं?
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
