Ad31

अभी तक आपने फर्जी साधू ,फर्जी डॉक्टर ,नकली सामान बेचनेवाले सुने होंगे अब आप फर्जी शिक्षाविद और फर्जी पाठ्य पुस्तकों के लेखक को भी जान ले !?इन्दोर मे एक मूलतः कोयले व ट्रांसपोर्ट का व्यवसायी है नाम है पुरषोत्तम अग्रवाल इनकी शेक्षणिक योग्यता मात्र ४ थी क्लास है? पिछ्ले कुछ वर्षो से ये शहर मे अपने पैसे के बल से ३ स्कूल संचालित कर रहे है! अग्रवाल पब्लिक स्कूल व चमेली देवी पब्लिक स्कूल पार्ट 1 व पार्ट 2, चमेली देवी पब्लिक स्कूल पार्ट २ नर्सरी से ५वी तक है यशवंत प्लाज़ा बिल्डिंग जो रेलवे स्टेशन के पास है उसकी तीसरी मंज़िल की दुकानो व गलियारे मे चलाया जा रहा है?जहा न खेलने का मैदान है!ना ही प्राकृतिक हवा व प्रकाश की व्यवस्था है? ये तीनो स्कूल भी सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है? अग्रवाल पब्लिक स्कूल और चमेली देवी पब्लिक स्कूल है जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है !? इस स्कूल की खासियत है की यहाँ न सीबीएसई से मान्यताप्राप्त न ही NCERT की पाठयपुस्तके चलती है!?न ही उनसे पढाया जाता है. यहाँ के छात्रो के लिए स्वय 4थी क्लास पास कोयले के व्यापारी जिनका नाम पुरुषोत्तम अग्रवाल है ने लिखी है. यहाँ पर पढाई सीबीएसई पैटर्न से नहीं!?LBF पैटर्न से होती है. पाठयपुस्तको में गलत ,अर्थ का अनर्थ करने वाले विषयो एवं तथ्यों की भरमार है !?इस शिक्षा के हठयोगी की वजह से इसके यहाँ शिक्षक रोज नौकरी छोड़ते है!?पता नहीं शिक्षा विभाग व सीबीएसई LBF पाठ्यपुस्तकों और पद्धति से पढ़ाने कैसे दे रहा है.

LBF-LOGO1

एक सोची समझी योजना के तहत इस लालची व्यापारी को स्कूल मे पढ़ाई जाने वाली किताबो और कापियों के धंधे मे ४०० प्रतिशत से ज़्यादा मुनाफ़ा दिखने की वजह से खुद लेखक बनकर जबकि खुद सिर्फ़ ४ थी क्लास तक पढ़े है!एक कंपनी एल. बी. फ पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर खोली? नर्सरी से ८ वी तक की पाठ्य पुस्तको का स्वयं को लेखक ,प्रकाशक बता कर पूरे देश मे बेचने का जाल बनाया गया. कोढ़ मे खाज वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए जो पाठ्य पुस्तके निकाली उनमे ग़लत, भ्रामक और अर्थ का अनर्थ सिखाने वाले तथ्यो एवम पाठ का समावेश किया गया!?जब एक मासिक पत्रिका ने इसका खुलासा किया तब इस लालची व्यापारी ने किताबो को फाड़कर फेकने के बजाए हर किताब के पहले पन्ने पर एक चिपकी चिपका दी की किताब मे ये ग़लत जानकारी है! कृपया इसकी जगह ये पढ़े ! इस आदमी को कोई ये बताए की २ री ,३री,४थी,५वी क्लास के अबोध बच्चो को तेरी ग़लतियो की चिपकी देखने का ध्यान रहेगा? और इस ४ थी पास पढ़े लालची व्यापारी की किताबे खरीदना कम्पल्सरी है? शर्म आनी चाहिए इस प्रशासन ,सरकार और स्कूली शिक्षा विभाग तथा पालको को जो इस स्कूली शिक्षा के लालची व्यापारी जो आपके बच्चो को शिक्षा के नाम पर धोखा दे रहा है?लर्न बाइ फूल एंड फ्राड(एल. बी. फ )।

जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरीजी ने एलबीएफ पब्लिकेशन प्रायवेट लिमिटेड के मंच से इन एलबीएफ किताबों का कथाकथित लोकार्पण किया था, वहीं दूसरी ओर तथाकथित फर्जी लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल ने स्वामीजी को इन किताबों का प्रेरणास्रोत बताया था। क्या स्वामीजी ऐसी लगत, भ्रामक, अर्थ का अनर्थ, नकारात्मक धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत किताबों को, जिसमें मात्राओं एवं भाषा का स्तर निम्न कोटि का है, को संरक्षण देंगे या धूर्त फर्जी लेखक को स्वामीजी का व्यवसायिक इस्तेमाल की चाल है?

Leave a Reply

Your email address will not be published.