@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
270 साल बाद मोदी और शाह के नेतृत्व में भाजपा ने बंगाल की राजनीति का इतिहास बदल दिया!!
बंगाल में 270 साल बाद मोदी – शाह के नेतृत्व में एक नए युग का सूत्रपात!

इंदौर और मध्यप्रदेश को आज गर्व है कि 270 साल बाद बंगाल के इतिहास की शर्मिंदगी को बदलने की नींव डालने में इंदौर शहर और प्रदेश के साहसी, प्रखर राष्ट्रवादी कद्दावर भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय का भी मोदी – शाह के नेतृत्व में अहम और बलिदानी योगदान रहा है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा अध्याय लिखा गया है जिसने इतिहास की दिशा बदल दी है। वर्ष 1757 के प्लासी युद्ध से शुरू हुई वह मानसिकता, जिसने भारत की सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर करने का प्रयास किया था, अब 2026 में आकर धराशायी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक कौशल ने बंगाल को दशकों पुरानी हिंसा, तुष्टिकरण और विदेशी वैचारिक दासता से मुक्त कर ‘राष्ट्र प्रथम’ की विजय सुनिश्चित की है।
इतिहास गवाह है कि सन 1757 में प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेजों ने बंगाल को केंद्र बनाकर ही भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव रखी थी। आजादी के बाद भी बंगाल की सत्ता पर भले ही चेहरे बदलते रहे, लेकिन शासन का तरीका वही ‘बांटो और राज करो’ (Divide and Rule) वाला रहा। ब्रिटिश कुटिलता और मुगलकालीन हिंसा आधारित मानसिकता ने बंगाल की मूल पहचान जो कभी शिक्षा, संस्कृति और अध्यात्म का केंद्र थी को हाशिए पर धकेल दिया था।
बीते कई दशकों से बंगाल की राजनीति जेहादी मानसिकता, राजनीतिक हिंसा और सत्ता के संरक्षण में होने वाले तुष्टिकरण के इर्द-गिर्द सिमटी हुई थी। विकास की जगह डर और लोकतंत्र की जगह तानाशाही ने ले ली थी। राष्ट्रवादी जनता इस घुटन से मुक्ति चाहती थी, लेकिन उन्हें एक सशक्त विकल्प और दृढ़ नेतृत्व की प्रतीक्षा थी।
आज 270 साल बाद, भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू धर्म, भारतीय सभ्यता और गौरवशाली संस्कृति के ध्वज तले उस विदेशी मानसिकता को परास्त किया है। मोदी-शाह की जोड़ी ने न केवल राजनीतिक जीत दर्ज की है, बल्कि बंगाल की जनता के मन में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का आत्मविश्वास जगाया है।
यह केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक ‘राष्ट्रवादी वैचारिक परिवर्तन’ है। बंगाल की राष्ट्रवादी जनता के सहयोग से आज एक ऐसे ‘विकसित भारत’ की नींव बंगाल में रखी जा चुकी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। 270 साल का वह काला अध्याय अब समाप्त हो चुका है, अब समय है सोनार बांग्ला के पुनरुद्धार का।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इन्दौर
