@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर 

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है??

मशहूर फिल्म अभिनेता गुरुदत्त की सन 1957 में आई कॉलेजयी  फिल्म “प्यासा” जिसे अंतर्राष्ट्रीय “टाइम” मैगजीन ने विश्व की 100 महानतम फिल्मों में शामिल किया था। उसका यह गीत 70 साल बाद भी इस आधुनिक और उन्नत दुनिया के आज के हालातों में सटीक बैठता है!!

ये महलों, ये तख़्तों, ये ताजों की दुनिया ये इंसाँ के दुश्मन समाजों की दुनिया ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनिया ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है।

हर एक जिस्म घायल, हर एक रूह प्यासी निगाहो में उलझन, दिलों में उदासी ये दुनिया है या आलम-ए-बदहवासी ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है।

जहाँ एक खिलौना है इंसाँ की हस्ती! ये बस्ती है मुर्दा परस्तों की बस्ती यहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्ती! ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है।

जवानी भटकती है बदकार बनकर जवां जिस्म सजते हैं बाज़ार बनकर यहाँ प्यार होता है व्यापार बनकर! ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है।

ये दुनिया जहाँ आदमी कुछ नहीं है! वफ़ा कुछ नहीं! दोस्ती कुछ नहीं है यहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है।

जला दो इसे फूँक डालो ये दुनिया मेरे सामने से हटा लो ये दुनिया तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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