@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
250 करोड़ रुपए जनता की मेहनत की कमाई से लिए गए टैक्स का पैसा है। मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों के बाप की कमाई का नही जो सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ा जा रहा हैं?

मध्यप्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव IAS संजय दुबे को खुद अपने ही विभाग के अंतर्गत आने वाला मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सामानों की खरीदी में 250 करोड़ की वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का खुलासा विभागीय मीटिंग में करना पड़ा? जिसका वीडियो वायरल हो गया!!
क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नगरीय प्रशासन विभाग के केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अपर प्रमुख सचिव संजय दुबे और MPSEDC के एडिशनल एमडी अंशुमान राज से पूरे भ्रष्टाचार की जानकारी लेकर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेंगे? खबर तो दिल्ली में बैठे न खाऊंगा न खाने दूंगा कहने वाले आलाकमान को भी मिल गई होगी।
इस वीडियो में विभाग के मुखिया संजय दुबे खुद ही नगरीय निकायों में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं!!
वीडियो में नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे निकाय के अधिकारियों की मीटिंग में MPSEDC के एडिशनल एमडी अंशुमान राज का एक प्रजेंटेशन दिखाते हैं “वह कहते हैं कि हम आप लोगों को डराने के लिए एक प्रजेंटेशन दिखा रहे हैं, जिसकी वजह से आपको नींद नहीं आए। आप क्या खरीद रहे हो ये हमारी जानकारी में है।”
मीटिंग में एसीएस संजय दुबे कहते हैं कि आप लोगों को लगता है कि आप क्या खरीद हो, हमें नहीं पता है। लेकिन आप क्या किस रेट में खरीद हो रहे हैं, इन सारी चीजों की जानकारी मुझे है। इस साल भर छोड़ दे रहे हैं लेकिन अगली बार से सभी पर कार्रवाई होगी?”
मीटिंग में मौजूद लोगों को चेताते हुए कहते हैं कि इतना समय होता नहीं है कि हम हर व्यक्ति पर कार्रवाई करें। लेकिन इस वर्ष से हमने शुरू कर दिया है। आपकी आय क्या है, मुझे पता नहीं लेकिन आप खर्चा कहां कर रहे ये हमें पता है। कई लोगों ने डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए की कचरा गाड़ी खरीद ली। लेकिन उसका यूज कहा है ये पता नहीं है। एसीएस संजय दुबे ने कहा कि इस वर्ष से यह क्षम्य नहीं होगा।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे और MPSEDC के अधिकारियों द्वारा की गई बैठक और प्रस्तुतीकरण में यह खुलासा हुआ। जिसका वीडियो वायरल हो गया? वीडियो कैसे वायरल हो गया यह अपने आप में जांच का विषय बन गया है अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के लिए।
पिछले 3 वर्षों में राज्य के 374 नगरीय निकायों ने GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल के जरिए करीब ₹1,134 करोड़ का सामान खरीदा था। विभागीय विश्लेषण के अनुसार, यदि यह खरीदी औसत और सही दरों पर होती, तो करीब ₹250 करोड़ बचाए जा सकते थे।
ये है सरकारी खरीदी के रेट –
- 33000 रूपये लीटर फिनाइल!
- 2 लाख रुपए की कचरा गाड़ी 6 लाख रुपए में!
- मात्र 200 LED बल्ब 60 लाख रुपए में।
- 60 वाट की LED 11000 रुपए में!
27 करोड़ के खंभों के लिए 49 करोड़ की स्ट्रीट लाइट सागर जिले के बड़ोदिया कला नाम से छोटी सी नगर परिषद के लिए!
शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि करीब 2,500 लोगों की यूजर आईडी, पासवर्ड और ईमेल आईडी लीक होने जैसी गंभीर गड़बड़ियां हुईं और चुनिंदा चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाया गया। एक वेंडर के पास 201 कॉन्ट्रैक्ट होने और 21 नगर पालिकाओं में सप्लाई करने की बात भी सामने आई है।
गौरतलब है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद नगरीय निकायों में फैले भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। एसीएस संजय दुबे के निर्देश पर ही यह डेटा तैयार किया गया है, जिसमें सारी सच्चाई सामने आ गई है।
कई स्थानों पर अफसरों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों (CMOs) ने अपने परिजनों और रिश्तेदारों के नाम पर फर्म बनाकर सरकारी काम और टेंडर आवंटित करवाए।
सरकारी खजाने में निकायों ने जिस तरीके से लूट मचा रखी है, वह हैरान करने वाला है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
