@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
अपने पेट के पाप खोलो पुलिस वालों, आबकारी वालों और नेताओं?

अवैध शराब के धंधे में 100 फीसदी से लेकर 500 फीसदी से ज्यादा का प्रॉफिट है।
किस बात की जांच करोगे सिर्फ खातेगांव की घटना की या फिर पूरे सिस्टम की?
बिना पुलिस को महीना दिए कोई भी शख़्स अवैध शराब का धंधा कर ही नहीं सकता। और बिना विधायक को पैसा दिए कोई ठेकेदार ठेका नहीं चला सकता।
अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और परिवहन को पकड़ने का काम आबकारी विभाग और उसके अमले का है। इसलिए उन्हें पुलिस जैसी यूनिफॉर्म और हथियार दिए जाते है।
चूंकि वैध और अवैध शराब का पूरा धंधा आबकारी विभाग की मिलीभगत से चलता हैं। इसलिए वो बड़े ठेकेदारों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं करते हैं। देशी और विदेशी शराब के जितने भी सरकारी ठेकेदार हैं वो सब के सब अवैध शराब बनाने से लेकर बेचने तक के धंधों में पूरी तरह से लिप्त है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
