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वाणिज्य एवं उद्योग संगठन एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में कुल 3,540 प्रोजेक्ट्स में से 75 फीसदी पर काम शुरू नहीं हो पाया है। रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर निवेशकों का कुल बकाया 14 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। देशभर में 2,300 से अधिक प्रोजेक्ट का काम शुरू नहीं हुआ है, जबकि 1,000 प्रोजेक्ट तय समय से काफी देरी से चल रहे हैं। देरी से चल रहे ज्यादातर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट डेवलपर्र्स के हैं। इनके प्रोजेक्ट्स की मार्केट हिस्सेदारी 95 फीसदी है। वहीं पब्लिक सेक्टर के 49 प्रोजेक्ट्स देरी से चल रहे हैं। इसके अलावा 6 प्रोजेक्ट्स विदेशी प्राइवेट कंपनी के हैं, जो देरी से चल रहे हैं। एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल ने बताया कि भारत में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट 33 महीने की औसत देरी से पजेशन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह रियल एस्टेट रेगुलेशन और डेवलपमेंट बिल को जल्द पास कर दें। रियल एस्टेट बिल पास होने से प्रोजेक्ट लांच करना आसान हो जाएगा और इसके विकास में आ रही बाधा को दूर किया जा सकेगा। रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश के मामले में महाराष्ट्र नंबर वन पर है। कुल 14 लाख करोड़ रुपए के बकाया में महाराष्ट्र की कुल हिस्सेदारी 21 फीसदी है। दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जिसकी हिस्सेदारी 14 फीसदी है। तीसरी और चौथे स्थान पर गुजरात और कर्नाटक हैं। इन दो राज्यों की हिस्सेदारी क्रमश: 13 और 12 फीसदी है। पांचवें स्थान पर हरियाणा है और इसकी हिस्सेदारी 8 फीसदी है। तमिलनाडु और तेलंगाना की हिस्सेदारी 6 फीसदी है। असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, ओडिशा और उत्तराखंड की हिस्सेदारी कुल निवेश में बहुत ही कम है। इन राज्यों की हिस्सेदारी 2 फीसदी के करीब है।
निवेशकों को आकर्षित करने में केरल नंबर वन :- एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार केरल कम्पाउंड एनुअल ग्रोथ रेट देने में नंबर वन पर है। 2005-06 और 2014-15 के बीच केरल ने 59 फीसदी रियल एस्टेट निवेशकों को आकर्षित किया है। इसके बाद कर्नाटक 40 फीसदी और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 32 है। हरियाणा रियल एस्टेट मार्केट में निवेशकों का रुझान कम हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में निवेशकों द्वारा निवेश में 5 फीसदी की गिरावट आई है। पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश में भी निवेश में गिरावट आई है। इन राज्यों में क्रमश: 4 और 3 फीसदी की गिरावट आई है। रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का पजेशन देने में आंध्र प्रदेश सबसे पीछे है। यहां पर प्रोजेक्ट्स 45 महीने की देरी से चल रहे हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश 41 महीने, तेलंगाना 40 महीने और पंजाब 38 महीने की देरी से प्रोजेक्ट का पजेशन दे रहे हैं।

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