@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर 

है प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Modi) में ये दम??

देश में होने वाले धार्मिक भोजन – भंडारों में बनने वाली पुड़ियों, भजियों और देश के लाखों शनि मंदिरों में तेल चढ़ाने पर रोक लगाने के लिए क्या कोई अपील जारी करेंगे??

पूड़ी, भजिए, कचौड़ी, समोसे, भटूरे और आलुबड़े इस देश के राष्ट्रीय भोज्य पदार्थ है। ये सभी तेल की कढ़ाई में तले जाते हैं।

धर्म प्रधान और धर्म प्रथम को मानने वाले देश भारत में पूड़ी तो दिव्य ईश्वरीय (Divine) भोज्य है। तेल के दिए हमारे जीवन में दिव्य ईश्वरीय प्रकाश लाते हैं? हमारे जीवन से अंधियारा मिटा कर प्रकाश लाते हैं?? ऐसी हमारी धार्मिक मान्यताएं हैं!!

 क्या प्रधानमंत्री इन सब में तेल को बर्बाद न करने की अपील जारी कर सकते है??

शादी ब्याह से लेकर पारिवारिक संस्कारों और अनुष्ठानों के अलावा किसी भी धार्मिक आयोजन, तिथि, त्योहार, कथाओ के समापन, अनुष्ठानों या सामाजिक और पारिवारिक भोज निमंत्रणों में मुख्य भोजन तेल में तली गरमागरम पुड़ियों, भजियों, पापड़, कचौरी, समोसे, आलु बड़े के बिना होने की कल्पना तक नहीं कर सकता है!! क्योंकि इनके सेवन से सीधे मोक्ष और बैकुंठलोक की प्राप्ति होती हैं।

तेल के लाखों करोड़ो दियों से दिवाली मनाना, न सिर्फ देश की जनता वरन् अयोध्या और काशी जैसे मंदिरों में सरकार का संवैधानिक कर्त्तव्य है!! क्या प्रधानमंत्री इस तेल की बर्बादी को रोकने की अपील देश की जनता और सरकारों को कर सकते है?

देश भर में फैले लाखों शनि मंदिरों में अनिष्ट से बचाने के साथ भगवान् शनि पर तेल की धार चढ़ाने को क्या प्रधानमंत्री रोक पाएंगे?? क्या प्रधानमंत्री इस तेल की बर्बादी को रोकने की अपील करने का 56 इंच का सीना रखते है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी हाल ही में देश वासियों से खाने के तेल को लेकर कटौती की अपील देश हित में जारी की है। इस अपील को जारी करने के पीछे मुख्य कारण यह है कि देश में खाने का तेल (Edible Oil) विदेशों से मंगवाया जाता हैं जिस पर भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती हैं।

इस खौफनाक और भयावह तथ्य से शायद कृषि प्रधान देश भारत की 90 फीसदी जनता परिचित न हो कि हम अपनी जरूरत का 65 फीसदी खाने का तेल विदेशों से आयात करते हैं! 

कृषि प्रधान देश भारत खाने के तेल (Edible Oil) के आयात पर सालाना लगभग 18.3 अरब डॉलर (dollar) से 19.5 अरब डॉलर (करीब 1.61 लाख करोड़ रुपए) की भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है। और अपनी घरेलू खपत को पूरा करने के लिए हर साल करीब 160 लाख टन (16 मिलियन टन) वनस्पति तेल बाहर से मंगवाता है।

और पूरा 65 फीसदी विदेशों से विदेशी मुद्रा में मंगवाए गए इस विदेशी खाने के तेल का इस्तेमाल धर्म प्रधान देश में पूड़ी, धार्मिक दिए, और धार्मिक भंडारों और शादी ब्याह जैसे समारोह में होता हैं।

सरकार और जनता को तय करना है कि धर्म प्रथम या राष्ट्र प्रथम??

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज

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