@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
माइक्रो मिट्टी के स्वयंभू CEO और तथाकथित रियल एस्टेट फिनटेक विशेषज्ञ मनोज धनोतिया आखिर कॉर्पोरेट सेलिब्रिटी लेखक चेतन भगत को भी नहीं समझा पाए कि माइक्रो मिट्टी क्या है और वो उसमें निवेश क्यों करे?

अखबारों, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर करोड़ों रुपये के विज्ञापनों और सैकड़ों प्रायोजित (पैसे और विज्ञापन देकर) इंटरव्यूज, की बाढ़ लाने के बावजूद, माइक्रो मिट्टी (Micro Mitti) और इसके स्वयंभू रियल एस्टेट विशेषज्ञ व सीईओ मनोज धनोतिया आज तक इंदौर की जागरूक और शिक्षित जनता को यह समझाने में नाकाम रहे हैं कि आखिर यह कंपनी है क्या?
स्थिति यह है कि चेतन भगत जैसे कॉर्पोरेट जगत के दिग्गज लेखक और सेलिब्रिटी भी इस उलझन को नहीं सुलझा पाए कि माइक्रो मिट्टी असल में एक रियल एस्टेट डेवलपर है? जमीन की मालिक है? या सिर्फ फ्लैट और प्लॉट बेचती है? या एक प्रॉप फिनटेक दलाल है? जो आम जनता को प्रोजेक्ट का मालिक बताकर उनसे पैसा निवेश कराकर वास्तविक मालिक को प्रॉफिट दिलाकर एक्जिट करवाने का कोई सुनियोजित खेल?
पिछले हफ्ते इंदौर में दैनिक भास्कर स्टार कनेक्ट के तहत देश के जाने-माने लेखक चेतन भगत ने माइक्रो मिट्टी के फाउंडर व CEO मनोज धनोतिया का इंटरव्यू लिया। इसमें उन्होंने मनोज धनोतिया के व्यक्तिगत जीवन और बिज़नेस में उनकी शुरुआत और उनके विज़न के बारे में खुलकर बात की।
इंटरव्यू के दौरान माइक्रोमिट्टी के इस स्वयंभू कर्ताधर्ता ने पूरे समय फ़िज़ूल की बेबुनियाद, अतार्किक, असंगत, अव्यावहारिक और अनुपयोगी बातें की लेकिन किसी भी बात का स्पष्ट और पारदर्शी जवाब नहीं दिया!
1 घंटे से ज्यादा चले इस इंटरव्यू में माइक्रोमिट्टी के स्वयंभू CEO मनोज धनोतिया अपने शुरूआती जीवन से लेकर उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक अभावों के चलते अमेरिका कैसे पहुंचे, अमेरिका से रातों रात अचानक भारत कैसे आ गए? यह स्पष्ट तरीके से बताने में पूर्ण रूप से असफल रहे?
भारत आने के बाद माइक्रोमिट्टी की शुरुआत कैसे हुई? किसके निवेश से 1000 करोड़ का लैंडबैक तैयार हुआ? माइक्रोमिट्टी के बैनर तले डेवलप होने वाले तीनों प्रोजेक्ट में लैंड से लेकर डेवलपमेंट तक कौन पैसा लगा रहा हैं? प्रोजेक्ट का असली मालिक कौन है और वो मीडिया या पब्लिक के सामने क्यों नहीं जा रहे है? इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के कोई जवाब माइक्रोमिट्टी के तथाकथित स्वयंभू फाउंडर ने अपनी तरफ से नहीं दिए?
अगर यह एक प्रॉप-टेक कंपनी है, तो सवाल उठता है कि इसके बैनर तले इंदौर में चल रहे तीन प्रोजेक्ट्स में अब तक कितने लोगों ने मुनाफा कमाने के लिए निवेश किया है— 50, 100, 500 या 1000? या करेंगे?
कॉर्पोरेट लेखक चेतन भगत के एक प्रश्न की यदि कोई आम निवेशक 5 से 10 लाख रूपए माइक्रोमिट्टी में 3 साल के लिए निवेश करता है, तो उसे कितना प्रॉफिट कब और कैसे मिलेगा इसका कोई स्पष्ट जवाब माइक्रोमिट्टी के स्वयंभू CEO मनोज धनोतिया के पास नहीं था?
ज़मीन से लेकर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट और इसके भारी-भरकम प्रचार-प्रसार में पूंजी लगाने वाला असली मालिक कौन है, और वह अपना प्रॉफिट कमाकर एग्जिट कैसे लेगा?
प्रॉप-टेक के इस उलझाऊ फॉर्मेट में निवेश करके इंदौर शहर के इन प्रोजेक्ट्स में कितने लोग ‘कागज़ी’ मालिक बन चुके हैं या बनेंगे?
उपरोक्त सभी बुनियादी और महत्वपूर्ण सवालो के सीधे और पारदर्शी जवाब देने में माइक्रो मिट्टी के तथाकथित रियल एस्टेट फिनटेक विशेषज्ञ मनोज धनोतिया पूरी तरह असफल रहे हैं।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
