Golu Shukla

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पाण्डे राजनीति की टूलकिट का एक टूल है? या राजनैतिक मनोरोगी? या प्रसिद्धि पाने की सुनियोजित साजिश?

जनता के ज्वलंत मुद्दों को छोड़कर, प्रसिद्धि प्राप्त राजनैतिक नेताओं के गैर जरूरी मुद्दों को पत्नी के साथ मिलकर सोशल मीडिया के माध्यम से सनसनी खेज बनाने का कही राजनैतिक मनोरोगी का खेल तो नहीं??

रीगल चोराहे पर बैठे तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पाण्डे के सोशल मीडिया पर अब तक उठाये गए सभी मुद्दे राजनैतिक और सरकारी लापरवाही के है। सामाजिक और जिंदगी की बुनियादी आवश्यकताओं के लिए कोई मुद्दा नहीं है?

पार्षद जीतू यादव (जाटव) के गुर्गो द्वारा अपनी ही पार्टी के पार्षद कमलेश कालरा के घर में घुसकर महिलाओं और नाबालिग पुत्र के साथ घृणित आपराधिक कृत्य के बाद पार्षद जीतू की शान में कसीदे पढ़ना!! अभी कुछ दिन पहले तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पाण्डे और उनकी पत्नी ने आधी अधूरी और झूठी जानकारी को लेकर केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के सामने अनशन करने के मामले में पांडे जेल की सजा भी काट चुके है!! और अब बाणगंगा क्षेत्र मे विधायक गोलू शुक्ला के होर्डिंग और बैनरों को मुद्दा बनाकर रील बनाने की वजह से समर्थकों द्वारा पीटे जाने का आरोप जो सही भी हो सकता हैं को रो रो कर रील बनाकर रीगल चोराहे पर अपनी पत्नी और कुछ सोशल मीडिया पत्रकारों के साथ रतजगा अनशन कर पूरे शहर में सुर्खिया खबर बना दी। 

आम आदमी पार्टी के नेता रहे अब तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पाण्डे के साथ हर समय उनकी पत्नी का होना, पति का दवाब है या मानसिक प्रताड़ना या स्वेच्छा से यह जांच का विषय है? 

शहर में जनता के कई ऐसे मुद्दे हैं जो ज्वलंत है। जिनकी आग में जनता जल रही हैं। उसमें होर्डिंग और बैनर कोई मुद्दा नहीं है। और यदि है तो यह हाईकोर्ट से लेकर शहर के महापौर, कमिश्नर, कलेक्टर, नगरीय प्रशासन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की शहर की स्वच्छता के प्रति जवाबदेही और जागरूकता से संबंधित मुद्दा है। 

सोशल मीडिया के जमाने में यू ट्यूब और रील आदि के माध्यम से पैसा कमाने और प्रसिद्धि पाने के लिए कई तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता, धर्माचार्य, बेरोजगार, अतृप्त और अलग – थलग पड़े बुझे हुए तथाकथित नेता किसी भी हद तक चले जाते है।

सिर्फ बाणगंगा और नंदानगर का क्षेत्र ही क्यों?

शहर में बाणगंगा का शुक्ला परिवार, कैलाश विजयवर्गीय और उनका परिवार, विधायक रमेश मेंदोला और उनके सरंक्षण प्राप्त असमाजिक तत्व, उनसे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, उनकी राजनैतिक और सामाजिक दिनचर्या आदि। शहर और प्रदेश के यू ट्यूबरो और रील बनाने वालो का सबसे पसंदीदा विषय होता हैं और खासकर जब उनके खिलाफ कोई ऐसी नकारात्मक बात हो जिसका आम जनता से कोई सरोकार भी न हो, तब तो समझो इन यू ट्यूबरो और रील बनाने वालो की जैसे लॉटरी लग गई हो।

वैसे भी सत्ता पक्ष के राजनेताओं और सरकारी लापरवाही के मुद्दों को जिन्हें शहर का मीडिया रोज अपनी पत्रकारिता का धर्म निभाते हुए प्रकाशित और प्रसारित करता है। तो फिर ये प्रहलाद पाण्डे और उनकी पत्नी सोशल मीडिया के माध्यम से सनसनी फैला कर, जोर जोर से रो – रो कर, गांधी की प्रतिमा के नीचे रात भर बैठकर लोगों की भावनाओं के साथ खेलकर कौन सा राजनैतिक लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पूरा खेल ठीक अपने पहले राजनैतिक गुरू आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल की तरह खेल रहे है?

गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठकर, उपवास कर गांधी की एक्टिंग करने मात्र से कोई गांधी नहीं बन सकता हैं। गांधी किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं करते थे। वो मुद्दों और गलत कानूनों का विरोध करते थे। गांधी जब किसी मुद्दे को लेकर कोई विरोध करते थे तो उनके साथ जनता का हुजूम होता था। वो अंग्रेजों की लाठी खाते थे, अपमान सहते थे लेकिन कभी सार्वजनिक रूप से रोते नहीं थे। गांधी की ताकत सत्य, अहिंसा और उपवास थे। गांधी नेता नहीं महात्मा थे। 

गांधी की प्रतिमा का राजनैतिक उद्देश्य की पूर्ति करने या व्यवसायिक लाभ के लिए या प्रसिद्धि पाने के लिए करना अनुचित है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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