@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
32 करोड़ रूपए की जमीन के मालिक किसान की आत्महत्या के मामले मे इंदौर की रियल एस्टेट कंपनी सफल डेवलपर्स के प्रतिष्ठित बिल्डर अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन भी अपराधिक भू माफियाओं के साथ सवालो के घेरे में है?

आखिर थाना खुड़ैल किसे बचाने की कोशिश कर रहा है? उन काले और सफेदपोश लोगो को जिन्होंने इंदौर जिले में 32 करोड़ रुपए की जमीन को हथियाने के लिए जानलेवा षड्यंत्र का ऐसा जाल बुना कि जमीन मालिक किसान को आत्महत्या करना पड़ी?
(उपरोक्त खबर पुलिस को दिए आवेदन, थाना खुड़ैल द्वारा दर्ज की गई FIR और मृत किसान विजय सिंह के परिवार के द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, आडिओ और विडिओ साक्ष्य पर आधारित है।)
इंदौर जिले के खुड़ेल थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेमावर रोड पर स्थित ग्राम असरावद बुजुर्ग में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ ३२ करोड़ रुपए बाजार मूल्य की बेशकीमती जमीन को कौड़ियों के दाम हड़पने के लिए एक खूनी साजिश रची गई। इस जानलेवा जाल में आपराधिक, दबंग और राजनीतिक पृष्ठभूमि के भू-माफिया रामसिंह पारिया, प्रॉपर्टी दलाल निलेश (पिता लक्ष्मीनारायण वर्मा), योगेश कुमरावत और धोखेबाज आपत्तिकर्ता फूलसिंह, बाबूलाल व उसके परिवार ने मिलकर किसान को चारों तरफ से घेर लिया। अपनी पैतृक और बहुमूल्य जमीन को इस खौफनाक आपराधिक षड्यंत्र के दलदल में फंसता देख जमीन मालिक, ४५ वर्षीय भोले – भाले किसान विजय (पिता स्व. निर्भय सिंह) पूरी तरह टूट गए। भू-माफियाओं द्वारा पैदा किए गए षड्यंत्र से उत्पन्न घोर मानसिक तनाव, डर और खौफ के आगे जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उन्होंने बेहद हताशा में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस बेरहम और क्रूर तंत्र की साजिश ने एक हंसते-खेलते किसान को मौत के मुंह में धकेल दिया।
मृत किसान विजय की बेशकीमती 8 बीघा जमीन को कौडियों के दाम खरीदने की क्रूर और बेरहम अपराधिक साजिश को अंजाम देने मे इंदौर के प्रतिशत बिल्डर और कालोनाईजर अशोक एरन और सफल डेवलपर्स के मालिक केशव एरन की भूमिका भी न सिर्फ सवालो के घेरे में है, वरन बहुत हद तक गहरे संदेह मे है!
1 मार्च 2025 को ग्राम असरावद बुजुर्ग के किसान विजय सिंह ने आत्महत्या की थी और 11 अप्रैल 2025 को मृत किसान विजय सिंह की माँ ने थाना खुड़ेल मे अपने बेटे विजय सिंह को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने वाले आरोपियों के खिलाफ कारवाई करने के लिए आवेदन दिया!
6 महीने बाद दिनांक 14/10/2025 को थाना खुड़ैल द्वारा मात्र दो दलालो नीलेश गुर्जर और योगेश कुमरावत के खिलाफ भारतीय न्याय सहिंता की धारा 108 और 318(4) के तहत FIR दर्ज कर ली। आरोपी नीलेश फरार है और उसकी हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज हो गई है। दूसरे आरोपी योगेश कुमरावत को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
लेकिन मुख्य साजिश कर्ता रामसिंह पारिया और 80 लाख रुपए नगद लेन देन करने वाले बिल्डर अशोक ऐरन एवं उनके पुत्र केशव ऐरन को न तो मुलजिम बनाया और न हीं उनके बयान लिए? जबकि मृत किसान विजय की मां के द्वारा दिनांक 11 अप्रैल 2025 को पुलिस थाना खुड़ैल को दिये गये लिखित आवेदन और बयान में रामसिंह पारिया को आरोपी बताते हुए गंभीर आरोप लगाये है। और मृत किसान विजय की मां के द्वारा दिए गए आवेदन और बयान में रामसिंह पारिया से बात होने के बाद बिल्डर अशोक ऐरन के द्वारा 80 लाख रुपए दलाल निलेश वर्मा को देना बताया है।
जिसकी पुष्टि मृत विजय के भाई संजय द्वारा रिकॉर्ड वीडियो में अशोक ऐरन के पुत्र केशव ऐरन से बातचीत से लेन देन की पुष्टि होती हैं। बातचीत रिकॉर्डेड वीडियो मृत किसान विजय के भाई संजय के पास है। पुलिस ने उसे जांच में क्यों शामिल नहीं किया?
पुलिस को दिए आवेदन मे माँ ने नामज़द आरोपियों के अपराधिक षड्यंत्र का सम्पूर्ण खुलासा करते हुए बताया कि कैसे उनके पुत्र पर दवाब बनाया गया! थाना खुड़ेल के बिहारी सिंह सांवले इस प्रकरण में जांच कर रहे हैं।
क्यों, कैसे और किन सवालो के घेरे में है, बिल्डर अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन तर्फे सफल डेवलपर्स?
1) बिल्डर अशोक एरन के अपराधिक, दबंग रामसिंह पारियां और उसके परिवार से ग्राम असरावद बुजुर्ग मे स्थित जमीन खरीद फ़रोख्त के पुराने व्यवसायिक संबंध थे! अशोक एरन ने अपने पुत्र केशव एरन तर्फे सफल डेवलपर्स की कंपनी के नाम पर रामसिंह पारीया और उसके परिवार से ग्राम असरावद बुजुर्ग मे काफी जमीनें 2022 से 2024 मे खरीदी!
2) मृत किसान विजय सिंह की ग्राम असरावद बुजुर्ग स्थित खसरा नंबर 136 /2, 290/5, 292 कुल रकबा 1.923 हेक्टेयर (7.6 बीघा) जिस पर पहले से ही सिविल और राजस्व न्यायालय मे तथाकथित फर्जी आपत्ति कर्ताओ फूल सिंह और बाबूलाल से विवाद चल रहा था! वही दूसरी तरफ ग्राम असरावद बुजुर्ग की कृषि भूमि पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से कालोनी विकास के लिए अनुमति पर रोक लगी हुई है।
3) तो फिर किस आधार पर केशव एरन तर्फे सफल डेवलपर्स ने 2022 मे ही मृत किसान विजय सिंह और उसके परिवार से एक कच्चा कालोनी विकास का 63 और 37 प्रतिशत के हिसाब से रेशों डील कर ली? और इस कच्चे विकास अनुबंध को 50 लाख रुपए (रिफंडेबल सिक्युरिटी डिपाजिट) चेक के माध्यम से मृत विजय सिंह और उसके परिवार के परिजनों को अलग अलग चेक के माध्यम से पेमेंट कर 22 जून 2023 को रजिस्टर्ड करवा लिया?
4) चूंकि मृत किसान विजय सिंह की ग्राम असरावद बुजुर्ग की उपरोक्त जमीन पर लंबे समय से सिविल और राजस्व न्यायालय मे फूल सिंह और बाबूलाल के परिवार से मुकदमा चल रहा था। इन्ही विवादित मुकदमों को न्यायालय के बाहर सुलझाने और खत्म करने के लिए दलाल निलेश पिता लक्ष्मीनारायण वर्मा और मुरली महाराज दलाल ने मृत किसान विजय सिंह को 2022 मे अशोक एरन से मिलवाया। दलाल निलेश ने अशोक एरन की बात राम सिंह पारिया से कराई, तो अशोक एरन ने बताया कि फूल सिंह और उसके परिवार से झगड़ा खत्म करने के लिए प्रति बीघा 10 लाख रुपए खर्च लगेगा। इस प्रकार अशोक एरन द्वारा दलाल निलेश पिता लक्ष्मीनारायण वर्मा को 80 लाख रुपए नगद रामसिंह पारिया के कहने पर दिए। उक्त रुपए निलेश ने फूल सिंह और बाबूलाल से राजीनामा करने और राजस्व न्यायालय के खसरो मे त्रुटिवश जो नाम फूल सिंह और बाबूलाल के चढ़ गए थे उन लोगों का नाम खसरो से कम करने का बोलकर प्राप्त किए थे। थाना खुड़ैल के जांच अधिकारी ने आपत्तिकर्ता बाबूलाल और फूल सिंह के न तो बयान लिए और न हीं यह जानने की कोशिश की कि उन्हें कितना पैसा प्राप्त हुआ है राजीनामा करने के लिए?
5) रुपए प्राप्त करने के बाद 4 अगस्त 2022 को निलेश के द्वारा राम सिंह पिता वृंदावन पारिया के मार्फत फूलसिंह और बाबूलाल को सिविल कोर्ट मे लेकर आए थे और उनसे राजीनामा का शपथ पत्र भी बनवाया था और कोर्ट मे प्रस्तुत भी किया था। और इसके बाद राजस्व न्यायालय मे फूल सिंह और उसके परिवार के सभी सदस्यों का नाम भी हट गया था।
लेकिन जनवरी 2025 मे फूलसिंह और बाबूलाल ने फ़िर से जमीन पर आपत्ति ले ली और राजस्व न्यायालय मे फ़िर से अपना नाम चढ़ाने के लिए आवेदन कर दिया। जब इस बात से नाराज मृत किसान विजय सिंह दलाल निलेश को लेकर राम सिंह पारिया के पास गया तो राम सिंह पारिया ने कहा 2 करोड़ रुपए और लगेगे नहीं तो उक्त जमीन मुझे बेच दो और कहा जब तक मै नहीं चाहूँगा तब तक तुम्हारी जमीन का कुछ नहीं होगा।
(जैसा की मृत किसान विजय सिंह की माँ ने 11 अप्रैल 2025 को पुलिस को दिए गए शिकायती आवेदन मे बताया।)
6) आत्महत्या के लिए किसान विजय सिंह को मजबूर करने के लिए मृत किसान विजय सिंह की माँ के द्वारा 11 अप्रैल 2025 को थाना खुड़ेल को दिए गए आवेदन मे आरोपियों की आपराधिक साजिश और सम्पूर्ण घटनाक्रम मे बिल्डर अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन का बयान लिया जाना नितांत आवश्यक है। क्योंकि आरोपियों को लाखों रुपए का सम्पूर्ण लेन देंन नगद मे बिल्डर अशोक एरन द्वारा रामसिंह पारिया के कहने पर किया है। इस सम्पूर्ण घटनाक्रम मे बिल्डर अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन की चुप्पी संदेहस्पद है।
थाना खुड़ैल के जांच अधिकारी के द्वारा इस केस में की गई जांच पूरी तरह से दवाब, प्रभाव और प्रलोभन के साथ नगद नारायण पर आधारित है। जब जांच ही निष्पक्ष नहीं है, तो मृत किसान विजय के परिवार वालों को न्याय कैसे मिलेगा?
मृत किसान को न्याय अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन, की गवाही के बाद ही मिलेगा। रामसिंह पारिया, आपत्तिकर्ता बाबूलाल और फूलसिंह को बिना मुल्जिम बनाए थाना खुड़ैल द्वारा दर्ज की गई FIR सिर्फ और सिर्फ़ रद्दी कागज के टुकड़े के अलावा कुछ नहीं है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
