@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

कौन कहता है? घर का बजट पेट्रोल डीजल और गैस की कीमतों से बिगड़ता है?

आज देश में आर्थिक संकट की आहट को देखते हुए प्राइवेट स्कूल, कोचिंग संस्थान, कॉलेज, प्राइवेट अस्पताल, पैथोलॉजी लैब, डॉक्टर और रियल एस्टेट व्यवसायी के अलावा कई अन्य कॉर्पोरेट और बड़े व्यवसायी अपने बेतहाशा मुनाफे के धंधों में से मात्र 10 फीसदी तक रेट और भावो में कमी कर दे तो उनकी यह पहल उनके सच्चे देश भक्त का प्रमाण होगी। और इस तरह की अपील जो विधायक और सांसद व्यवसायियों से करेंगे और करवाएंगे वो सच्चे अर्थों में प्रधानमंत्री मोदी और मोदी सरकार के सिपाही व भाजपा के सच्चे कार्यकर्ता कहलाने के हकदार होंगे।

क्या देश में महंगाई के लिए सिर्फ सरकार जिम्मेदार हैं?? क्या महंगाई के लिए सिर्फ सरकार को दोष देना सही है?? तो कौन लोग हैं जो महंगाई के नाम पर घर – परिवारों का सुख चैन छीन रहे है ?? 

पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें तो आज के भारत में मामूली बात है। असल जेब तो प्राइवेट एजुकेशन सिस्टम, कॉर्पोरेट कोचिंग, प्राइवेट अस्पताल, डॉक्टर और पैथोलॉजी लैब और रियल एस्टेट ने काटी है। इनकी बेतहाशा फीस और रेट ने निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों के घर के बजट बिगड़ने की बात तो छोड़ो इन्होंने तो पूरे परिवार और घर की नींव तक को हिला कर रख दिया है।

यदि हमें महंगाई के खिलाफ वास्तव में क्रांति करनी है, तो अपनी लड़ाई का रुख बदलना होगा। जब तक आम नागरिक महंगे निजी स्कूलों, लुटेरे अस्पतालों और ज़मीन के मुनाफाखोरो, सट्टेबाजों और ब्लैक करने वालों के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज़ नहीं उठाएगा और इनका बहिष्कार नहीं करेगा, तब तक देश का मध्यम वर्ग इस आर्थिक गुलामी से कभी आज़ाद नहीं हो पाएगा। सरकार के खिलाफ नहीं, इस सिंडिकेट के खिलाफ सड़कों पर उतरना ही सच्ची आर्थिक आज़ादी की शुरुआत होगी।

महंगाई के खिलाफ सड़को पर क्रांति करना है तो सरकार के खिलाफ नहीं, इनके खिलाफ करो। सड़क पर सरकार के खिलाफ नही, इनके खिलाफ उतरो।

कौन कहता है कि घर का बजट पेट्रोल डीजल और गैस की कीमतें बढ़ने से बिगड़ता है?? घर का बजट ये व्यवसायिक कौम सिर्फ बिगाड़ ही नहीं रही है वरन् बसने से पहले ही उजाड़ रही है घर को।

घर का बजट बिगड़ता है मकान और प्लॉट के लिए बैंकों से लिए गए लोन की ईएमआई से।

घर का बजट बिगड़ता है प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की बेतहाशा और बेलगाम फीसों से।

घर का बजट बिगड़ता है प्राइवेट अस्पतालों, प्राइवेट डाक्टरों की फीसों और पैथोलॉजी लैब में की जाने वाली जांचों के रेट से।प्राइवेट अस्पताल और डॉक्टर बजट नहीं बिगाड़ रहे, बल्कि बीमारी और मौत के डर का व्यापार कर रहे हैं। डॉक्टर, अस्पताल पैथोलॉजी टेस्ट और महंगी दवाइयों का सिंडिकेट सीधे आम आदमी की जेब पर डकैती है।

प्राइवेट स्कूलों में ABCD और 1,2,3 और बेसिक शिक्षा की फीसें हजारों से लेकर लाखों रुपए होती हैं क्या??

क्या 100 साल से चला आ रहा गणित, फिजिक्स, केमिस्ट्री, ह्यूमैनिटी, इतिहास, भूगोल कॉमर्स, बायोलॉजी, बॉटनी… इत्यादि को पढ़ाने की प्राइवेट स्कूल और कोचिंग की फीस हजारों लाखों रुपए होती हैं?? सरकारी व्यवस्थाओं की नाकामी और सरकार की उदासीनता का फायदा उठाकर निजी स्कूल और कोचिंग संस्थान बेलगाम फीस वसूल रहे हैं।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी ज़मीन की वास्तविक लागत 100 रुपए से लेकर 1000 रूपये स्क्वेयर फीट के भाव से जमीन खरीद कर बिल्डर और रियल एस्टेट व्यवसायी प्लॉट, मकान और फ्लैट के नाम पर ग्राहकों को 5 हजार से लेकर 10 हजार रुपए स्क्वायर फीट या उससे ज्यादा के रेट से बेच रहे है? रियल एस्टेट व्यवसायी मध्यम वर्ग को उम्रभर के लिए होम लोन की EMI का गुलाम बना रहे हैं। आशियाना बसने से पहले ही वित्तीय रूप से उजड़ रहे है।

और यही लोग जनता को लूट खसोट कर उसमें से कमीशन, हिस्सा सरकार और नेताओं को देते हैं।

विधायक और सांसद बेचारे क्या करेंगे इस देश में, उन बेचारों को जितनी अक्ल, ज्ञान और बुद्धि होती हैं उतना या उससे बेहतर वो करते है। चूंकि पढ़े लिखे तबके का आदमी राजनीति को चिमटे से भी छूने से डरता है? 

इसलिए कम पढ़े लिखे, दबंग और अपराधिक छवि के लोगो के लिए सत्ता और सरकार बनने के लिए खुला मैदान छोड़ दिया है। और ऐसा नेताओं की अशिक्षा और कुबुद्धि का फायदा छोटे से लेकर आला दर्जे के अधिकारियों ने सरकार की आंख के सामने भ्रष्टाचार के अथाह सागर में पूरे देश को डुबो दिया है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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