@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
वैष्णव विद्यापीठ प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति पुरुषोत्तम पसारी और छोटे भाई विष्णु पसारी को आजन्म कारावास तक की सजा वाली भादवि की धाराओं में दूसरी बार अग्रिम जमानत!!

सवाल यह है कि आदतन और कई बार समान अपराध करने वाले आरोपी कॉलेज संचालकों को सेशन न्यायालय द्वारा दी गई अग्रिम जमानत स्थिर रखे जाने योग्य है? और दूसरा सवाल कि सरकारी छात्रवृत्ति घोटाले में कॉलेज संचालकों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस द्वारा की गई जांच संदिग्ध और संदेहास्पद है? यह घोटाला कुछ छात्रों का नहीं बल्कि हजारों छात्रों के साथ हुआ है!! इसकी जांच कौन करेगा??
करोड़ो रुपए की सरकारी छात्रवृत्ति जो गरीब अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों को उच्च अध्ययन के लिए सरकार द्वारा सरकारी खजाने से हर साल दी जाती हैं। उस सरकारी छात्रवृत्ति को एक दो कॉलेज नहीं! दर्जनों कॉलेजों द्वारा षड्यंत्र, धोखाधड़ी, छल, बेईमानी और कूटरचित, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हड़पने और गबन करने वाले कॉलेज और यूनिवर्सिटी के संचालकों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ऍफ़ आई आर दर्ज करती हैं!! 11 साल बाद न्यायालय में चालान पेश करती है?? और माननीय जज साहेब अपराध की गंभीरता और अपराधियों की संलिप्तता और आदतन अपराधियों जिनके खिलाफ कई बार ऍफ़ आई आर समान अपराध के लिए हो चुकी हैं! के बावजूद अग्रिम जमानत स्वविवेक और मैकेनिकल तरीके से दे, दे रहे है??
दिनांक 24 मार्च 2026, मंगलवार को इंदौर जिला न्यायालय के प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायालय के जज डॉ अकबर शेख ने विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त द्वारा भादवि की धारा 420, 467, 468, 471, 406 एवं 120 बी, षड्यंत्र, धोखाधड़ी, छल, बेईमानी और कूटरचित, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकार के पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से, गरीब वर्ग के अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दी जाने वाली छात्रवृत्ति के गबन के अपराध में आदतन अपराधी वर्तमान में वैष्णव विद्यापीठ प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति पुरुषोत्तम पसारी और छोटे भाई विष्णु पसारी को 20 हजार रुपए की प्रतिभूति पर अग्रिम जमानत के आदेश दिए!!
मंगलवार 24 मार्च को दिए लिखित अग्रिम जमानत आदेश में माननीय जज साहेब द्वारा यह लिखित रूप से माना कि अपराध गंभीर प्रवृत्ति का है! अधिकतम दंड आजीवन कारावास है! प्रथम दृष्टया इस न्यायालय का मत है कि अभियुक्त के विरुद्ध प्रकरण बनता प्रतीत होता हैं! लेकिन न तो लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज की गई ऍफ़ आई आर में लगाए गए आरोप, और न हीं लोकायुक्त पुलिस द्वारा ली गई किसी प्रकार की आपत्ति या अनापत्ति, और न हीं अपराध के घटक आदि का कोई उल्लेख करते हुए सीधे अग्रिम जमानत के आदेश दे दिए!
सन 2015 में भी वर्तमान कुलाधिपति पुरुषोत्तम पसारी और उनके छोटे भाई विष्णू पसारी द्वारा संचालित श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भी गरीब छात्रों को सरकार द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति को फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के साथ धोखाधड़ी के अपराध में लोकायुक्त पुलिस ने ऍफ़ आई आर दर्ज की थी! उस समय के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश संजय गुप्ता ने छात्रवृत्ति घोटाले को गंभीर अपराध करार देते हुए उपरोक्त दोनों पसारी बंधुओं की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी! अभी दोनों भाई उस प्रकरण में हाईकोर्ट से जमानत पर है! यह पसारी बंधुओं का सरकारी छात्रवृत्ति गबन करने का दूसरा अपराध है?
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
