@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
इंदौर में पैर पसारता लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट!! मकोका जैसे सख्त कानून की है दरकार?

इंदौर सहित पूरे मध्यप्रदेश के कद्दावर, बाहुबली कहे जाने वाले तथाकथित विधायकों, सांसदों और मध्यप्रदेश सरकार को लॉरेंस बिश्नोई जैसे अन्तर्राष्ट्रीय संगठित अपराध के सरगनाओं और उनके गुर्गों के द्वारा प्रदेश के बड़े व्यवसायियों को धमकाकर, दहशत फैला कर करोड़ो रुपए वसूलने की धमकी का जवाब उन्हीं की भाषा में देना होगा।
मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर में पिछले कुछ समय से अपराध के स्वरूप में डराने वाला बदलाव आया है। अब अपराध केवल गली-मोहल्ले की रंजिश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लॉरेंस बिश्नोई जैसे अंतरराष्ट्रीय अंडरवर्ल्ड गिरोहों के गुर्गे शहर के नामचीन कॉलेज संचालकों, रियल एस्टेट कारोबारियों और बड़े उद्योगपतियों को करोड़ों की फिरौती के लिए धमका रहे हैं। संगठित अपराध का यह नया चेहरा पुलिस प्रशासन और राज्य के लिए खतरे की घंटी है।
संगठित और माफिया अपराधों पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए महाराष्ट्र के ‘मकोका’ जैसे सख्त कानूनों की आवश्यकता है मध्यप्रदेश में?
इंदौर में रियल एस्टेट और शिक्षा क्षेत्र तेजी से फल-फूल रहा है। यदि इन क्षेत्रों के दिग्गजों को खुलेआम धमकियां मिलेंगी, तो शहर का निवेश और आर्थिक ढांचा चरमरा सकता है। ड्रग्स माफिया, वसूली माफिया, गैंगस्टर और हथियार तस्करों के बढ़ते सिंडिकेट को तोड़ने के लिए भी विशेष अदालतों (Special MCOCA Court) की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जिस तरह से संगठित अपराध के बड़े गैंगस्टर और माफिया अपराधी जेलों के भीतर से नेटवर्क चला रहे हैं, उसे देखते हुए वर्तमान कानून कमजोर नजर आ रहे हैं। ऐसे हालातों में मध्य प्रदेश सरकार को अब महाराष्ट्र की तर्ज पर मकोका (MCOCA – Maharashtra Control of Organised Crime Act) जैसे सख्त कानून को लागू करने पर तत्काल विचार करने की आवश्यकता है।
मकोका एक ऐसा हथियार है जो संगठित अपराध की जड़ों पर प्रहार करता है।
इसके तहत:
- कठोर रिमांड: सामान्य मामलों में पुलिस रिमांड सीमित होती है, लेकिन मकोका में आरोपी को 30 दिनों तक पुलिस रिमांड पर रखा जा सकता है।
- चार्जशीट की समय सीमा: पुलिस को बारीकी से जांच करने के लिए 180 दिनों का समय मिलता है।
- जमानत में बाधा: इस कानून के तहत एक बार गिरफ्तार होने पर आरोपी का बाहर आना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
- कठोर दंड: इसमें न्यूनतम 5 साल की जेल से लेकर फांसी तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
दिल्ली और महाराष्ट्र ने इस कानून के जरिए अंडरवर्ल्ड की कमर तोड़ी है। अब समय आ गया है कि मध्य प्रदेश सरकार भी “संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम” जैसा कोई सख्त कानून लेकर आए ताकि इंदौर के व्यापारियों में व्याप्त डर को खत्म किया जा सके और अपराधियों को यह कड़ा संदेश जाए कि यह ‘शांति का टापू’ माफियाओं की चरागाह नहीं है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
