साँवेर, इंदौर, महू और देपालपुर की ग्राम पंचायतों के स्कूलों में 100 से ज्यादा शिक्षको की डी. एड की मार्कशीट फर्जी है!
@प्रदीप मिश्रा री डिसकवर इंडिया न्यू्ज इंदौर
पूरे प्रदेश में फर्जी मार्कशीट के आधार पर हज़ारों की तादाद में अयोग्य शिक्षक सरकारी टीचर की नौकरी कर हर माह करोड़ों रुपये की सैलरी ले रहे हैं!
@प्रदीप मिश्रा री डिसकवर इंडिया न्यू्ज इंदौर*
सन 2006 और 2007 मे संविदा शिक्षक वर्ग तीन मे भर्ती के लिए डी एड की मार्कशीट आवश्यक योग्यता थी. लेकिन इंदौर जिले की साँवेर, देपालपुर, इंदौर और महू तहसील के अधीन आने वाली ग्राम पंचायतों के गाओ के सरकारी स्कूलों में बड़ी तादाद में फर्जी डी. एड की मार्कशीट के आधार पर भारी रिश्वत लेकर अयोग्य शिक्षको को भर्ती किया गया!?
और पिछले 15 सालो से सेकड़ो की तादाद में ये अयोग्य शिक्षक न सिर्फ सरकारी टीचर की नौकरी कर रहे हैं वरन सरकार से हर महिने हज़ारों रुपए की सैलरी व अन्य शासकीय लाभ प्राप्त कर रहे हैं!
वही दूसरी तरफ लाखो योग्य फर्स्ट क्लास इंजिनियर, एम बी ए, पोस्ट ग्रेजुएट, और ग्रेजुएट सरकारी चपरासी बनने के लिए धक्के खा रहे हैं!?
इन अयोग्य शिक्षको की नियुक्ति के लिए सन 2006 और 2007 के उस समय के जनपद अध्यक्ष, जनपद पंचायत की शिक्षा समिति के सदस्य, एस डी एम (राजस्व), CEO जनपद पंचायत, जिला शिक्षा अधिकारी DEO के अलावा सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण और विकास खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) पूरी तरह से जिम्मेदार है!?
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 6 मई 2005 को मध्यप्रदेश राजपत्र के गजट नोटिफिकेशन में प्रकाशित नियमों, शर्तों और आवश्यक शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर
मध्यप्रदेश ग्राम पंचायतों में संविदा स्कूल शिक्षकों को गाओ मे स्थित सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में नियुक्त किया जाता है!
ये संविदा शिक्षक जिला पंचायत या जनपद पंचायत द्वारा उनके नियंत्रण मे आने वाले स्कूलों में पढ़ाने के लिए नियुक्त किए जाते हैं!
कितने संविदा शिक्षकों की आवश्यकता है, इसके लिए जिले के कलेक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाती है. इस कमेटी मे CEO जिला पंचायत, CEO जनपद पंचायत, जिला शिक्षा अधिकारी DEO, डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर मुख्य रूप से होते हैं!
@प्रदीप मिश्रा री डिसकवर इंडिया न्यू्ज इंदौर

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