14 साल से 22 साल की उम्र जीवन का खतरनाक मोड़!

इंदौर, (री-डिस्कवर इंडिया न्यूज)। 14 साल की उम्र से 22 साल की उम्र यह उम्र का वह दौर है जो किसी भी युवा वर्ग के लिए जीवन का सबसे अहम हिस्सा होता है। यहीं 8 साल आपकी बाकी की 80 साल की उम्र के लिए बीज का काम करते हैं। आपकी जो जिंदगी, लाईफ स्टाईल, कॅरियर, शारीरिक स्वास्थ्य, सफलता सोच आदि को निर्धारित करती है।
जिंदगी के ये 8 साल बहुत जिम्मेदारी के साल है। यह उम्र का सबसे नाजुक पड़ाव है। इसी उम्र में हम बचपन से युवा अवस्था की तरफ पलायन करते हैं। इसी उम्र में आप अपना भविष्य रंग से राजा, चपरासी से कलेक्टर, लेबर से इंजीनियर, बिमार शरीर से डॉक्टर, सेल्समैन से बिजनेसमैन, अपराधी से जज, आम इंसान से खास मुकाम, रेड लाईट एरिए के अंधेरी गलियों से लालबत्ती के शक्तिशाली वाहन से सफर करने की तरफ ले जा सकते हैं।

इसी उम्र में आप अपनी शारीरिक व मानसिक शक्तियों का जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियों को प्राप्त करने व सफलता के शिकर तक पहुंचाने के लिए विकसित कर सकते हैं। यही वो उम्र का दौर है जब आप अपने मां-बाप, भाई-बहनों, गुरुओं तथा अपने खुद के सपने को सच करने व उन्हें साकार रूप देने के लिए शिक्षा व ज्ञान के भंडार से अपने आपको श्रृंगारित कर सकते हैं।
यदि आप इस उम्र में अपने जीवन रूपी महल की नींव मजबूती से नहीं डालेंगे तो जीवन को इस महल रूपी इमारत जहां दुनिया के सारे सुख-सुविधाएं व ख्वाब जो आप चाहते हैं वो किसी रेत के महलकी तरह ध्वस्त हो जाएगी। जरूरी है आपको अपनी जिंदगी के प्रति जवाबदार होने की। आप कहीं भी रहे, कहीं भी जाएं, जैसे खेल के मैदान में, सिनेमा घर में, कॉलेज कैम्पलस में, होटल, बार, पब, राईबर कैफे, पर्यटन स्थल, घर, कोचिंग, शीला लाऊंज कहीं पर भी जहां आप जीवन का आनंद व जिंदगी का तुल्फ उठाते हैं। वहां पर आपका नजरिया चीजों को जानने, समझने व एजुकेटेड तरीके से सीखने का हो। आप अपने आपको जिंदगी का लुत्फ उठाने में इतना मशगूल न कर ले कि इन जगहों पर आपका कॅरियर व भविष्य तथा जिंदगीके ख्वाब मुट्ठी में बंद रेत की तरह फिसल जाए।

आप कहीं भी रहे पर अपनी जिंदगी, कॅरियर व भविष्य को दांव पर लगाकर किसी भी आमोद-प्रमोद में अपने आपको इतना ना उलझा लें कि सब कुछ वहीं खत्म हो जाए।

आज हम वैश्वीकरण के एक दौर से गुजर रहे है। कम्प्यूटर, इंटरने, मोबाइल इंटरनेट व सूचना युग का जमाना है। जहां सारी दुनिया की संस्कृति, सभ्यता, चाल-चलन, रहन-सहन, पहनावा, खान-पान सब आपकी पहुंच के इतना करीब है कि जो आपकी पिछली पीढिय़ों से कोसो दूर था।
आज समाज वैश्विक परिवर्तन के दौर में है। अब युवा पीढ़ी किसी जाति, धर्म, सम्प्रदाय, संस्कृति, सभ्यता, विरासत, खान-पान, रहन-सहन, वैवाहिक संस्कार की मिलििकयत नहीं है। इन सबमें ग्लोबलाईजेशन व वैश्वीकरण का प्रभाव बहुत गहरे तक अपनी पैठ व जड़े जमा चुका है।

टीवी, केबल, इंटरनेट, मोबाइल व सूचना क्रांति ने दुनियाभर का ज्ञान व मनोरंजन के साधन, सोच, खुलापन व बिंदास जीवन शैली को जानने, समझने व उन्हें अपने जीवन में उतारने के लिए आपको पूर्ण आजादी आडियो-वीडियो स्वरूप में युवाओं की उंगलियों में समाहित कर दिया है।

जिस सेक्स को हम बंद दरवाजों में रात के अंधेरे में चोरी-छिपे, विवाह संस्कार के बाद अपने जीवन में आनंद उठाते थे, वहीं सेक्स अब आज के किशोरों व युवा पीढ़ी को कम्प्यूटर व इंटरनेट के माध्यम से पोर्नोग्राफिक या ये कहें ब्लू फिल्मों, अश्लील व सेक्स की तमाम मुद्राओं के तौर पर न सिर्फ विदेशी वरन् भारतीय स्त्री-पुरुषों की नग्न मुद्राओं के व पश्चिमी सेक्स उन्मुक्तता व ग्रुपसेक्स तथा ओरल व विभिन्न कामसूत्रीय योग मुद्राओं के पश्चिमी व देशी संस्करण के साथ अपार समुद्र के नीले जल की लहरों की तरह ब्लू फिल्मों व वीडियो क्लीपिंग के रूप में मात्र डब्ल्यूडब्ल्यू.कॉम के बटन कम्प्यूटर पर दबाते ही आज की युवा पीढ़ी के सामने नीले सेक्स के सागर की तरह मन मस्तिष्क में आंखों के जरिये लहराने लगा है।

चूंकि किसी भी युवा पुरुष व महिला में सेक्स की ऊर्जा शरीर में स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होती है। इस ऊर्जा की गरमी से उत्पन्न उत्तेजना तथा इस उत्तेजना को शांत करने के लिए युवाओं में समाज की मान्यता प्राप्त सारी वर्जनाओं को तोडऩे में पूरे बिंदास अंदाज में खुलेपन से बिना किसी के परवाह किए आनंद मग्न है।
इसी वजह से आज की युवा पीढ़ी में शादी से पहले सेक्स, लिव-इन-रिलेशनशिप, समलैंगिकता वो भी स्त्री व पुरुषों में समान रूप से, ग्रुप सेक्स, सेक्स रेव व ब्लू फिल्म पार्टियां आज भारतीय युवा पीढ़ी में सामान्य रूप से बड़े पैमाने पर होना आम बात हो चुकी है। वर्जनिटी अब कोई मुद्दा नहीं रह गया है। समाज ने भी सब कुछ जानते हुए भी इन चीजों को मूक रूप से अपना समर्थन दे दिया है।
आज भारत के अमूमन सभी बड़े व छोटे शहरों में युवाओं के बीच शारीरिक रूप से एक-दूसरे के प्रति बढ़ता आकर्षण तथा यौन संतुष्टि के प्रति बढ़ती ललक आप खुलेआम किसी भी रेस्त्रां, पब, शीशा लाऊंज, बाईक पर सवारी करते, कार की सीटों पर आगे व पीछे, कॉलेज कैम्पस, सड़कों, बाजारों, बाग-बगीचों कहीं पर भी बड़ी उन्मुक्तता से आलिंगनबद्ध एक-दूसरे को चूमते व किस करते हुए व औरल सेक्स करते हुए नजर देख सकते हैं।
बॉयफ्रेंड, लव मैरिज, खुलापन व बिंदास नजरिया अब समाज में बहुत तेजी से युवाओं में तथा समाज में भी मान्यता प्राप्त कर चुका है। जरूरी है कि समाज को युवा पीढ़ी से लड़ने के बजाए इन्हें इन चीजों के साथ जिंदगी, कॅरियर, घर व भविष्य के प्रति जवाबदार बनाने की है व एक नई हाईब्रिज स्वस्थ समाज की रचना में पुरानी पीढ़ी व युवा पीढ़ी में आपसी सामंजस्य के साथ परस्पर सहयोगात्मक दृष्किोण अपनाने की।

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