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दवा कंपनियां बताती हैं डॉक्टरों को इलाज की दवाइयां…

आजादी के पूर्व 40 करोड़ भारतीय बिना ऑपरेशन के पैदा हो गए, वहीं अब अधिकांश डिलीवरी ऑपरेशन से हो रही हैं?

 ये कैसे डॉक्टर हैं

इंदौर। आज मशीनें बताती हैं डॉक्टरों को बीमारी के बारे में। एक वक्त था जब भारत में वैद्य व डॉक्टर नाड़ी देखकर, आंखों की पुतलियों का रंग देखकर, पेट दबाकर, आहार-विहार की जानकारी लेकर, बदलते मौसम को देखकर बीमारियों का पता लगा लेते थे और सस्ती दवाइयां देकर मरीज को भला-चंगा कर देते थे। आज बाजारीकरण के दौर में ये कैसे डॉक्टर व अस्पताल? आज के भारत के चप्पे-चप्पे में अपने क्लिनिक, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी, अस्पताल के नाम पर रिसर्च सेंटर, डायग्नोसिस लैबोरेटरी में मरीजों को अनगिनत बीमारियों का मात्र डर बताकर उनके पूरे शरीर के सभी अंगों की जांचें तथाकथित आधुनिक उपकरणों के माध्यम से कर करोड़ों-अरबों रुपए वसूलने का काम डॉक्टरी इलाज के नाम पर कर रहे हैं, जबकि ये सिर्फ जांचें हैं, इसका इलाज से कोई लेना-देना नहीं है। इन जांचों के आधार पर अत्यधिक महंगे इलाज व फाइव स्टार होटलों के रेट के हिसाब से आईसीयू व अस्पतालों के बिस्तर व प्राइवेट रूम, जनरल, सेमी डीलक्स, एसी, नान एसी के नाम पर निर्धारित चेकआउट टाइम पर आधारित दिन की गणना के अनुसार खुलेआम मरीज को तथा उनके परिजनों को दिनदहाड़े सबके सामने लूटने के धंधे में लिप्त हैं। कोई बोलने वाला नहीं है? और इस लूट के धंधे करने वालों के लिए कोई सक्षम न्यायिक दंड व्यवस्था भी नहीं है। शर्म आनी चाहिए इस देश के नीति नियामक बनाने वालों पर।

यदि आप को कोई अंदरूनी परेशानी हो जैसे कि, आपका हाथ सुन्न महसूस हो या आपको चक्कर आदि आते हों, या फिर गैस-एसिडिटी आदि से परेशान हों, सारे शरीर में दर्द रहता हो, कमजोरी महसूस होती हो, तो ये डॉक्टर आप पर विभिन्न प्रयोग करते हुए आपको मृत्यु के कगार पर पहुंचाकरही दम लेंगे। सर्वप्रथम तो ये डॉक्टर आपसे ही पूछेंगे कि आपको क्या तकलीफ  है, फिर ये आपके असंख्य टेस्ट करवा डालेंगे और यदि टेस्ट में भी कुछ नहीं निकला, तो अंधेरे में तीर चलाते हुए आपको तरह-तरह की दवाइयां खिला-खिलाकर आपके शरीर को दवाईयुक्त बना डालेंगे, अर्थात फिर आप पर दवाइयों का असर ही नहीं होगा। एक जमाना हुआ करता था। जब प्राचीन वैद्य दूर से आते हुए मरीज को देखकर उसका मर्ज भांप लेते थे। यदि आप स्वयं अपनी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट को देख लें, तो आप खुद अपने लिए दवाई चुन सकते हैं। डॉक्टर कभी भगवान हुआ करते थे अब नहीं। आज तो वे मरीज का अधिक से अधिक दोहन करते हैं। मरीज के शव को कब्जे में रखकर आपसे पूरी फीस ले लेते हैं, तब बताते हैं कि मरीज मर चुका है। साधारण प्रसव को जटिल बनाकर ऑपरेशन की आवश्यकता बताते हैं और आपके सामने लम्बा सा बिल रख देते  हैं। इन दवाइयों में से कितनी ही दवाइयां मरीज को चढ़ती ही नहीं, किन्तु आपसे वे पैसे लेकर ही छोड़ते हैं। कई अस्पतालों में तो मरीज को बेहोशी का इंजेक्शन लगाकर उसका रक्त भी निकाल लेते हैं और आपको पता भी नहीं चलता।

सबसे पहले जनरल फिजिशियन

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अपने परिवार की सेहत-सुरक्षा के लिए एक विश्वसनीय जनरल फिजीशियन का चयन करना बेहद जरूरी है, लेकिन ध्यान रहे, डॉक्टर आपके घर के आसपास हो, जरूरत के वक्त उपलब्ध रहते हों, कम से कम फोन पर हमेशा मिल जाएं, ताकि आपातकाल में जरूरी सलाह दे सकें। वे कैसा इलाज करते हैं और कैसा व्यवहार है, इस बात की जानकारी आपको अपने आसपास के लोगों और परिचितों से मिल सकती है। किसी भी प्रकार की बीमारी में सबसे पहले अपने फिजीशियन से राय लेना लाभकारी होगा। वे आपको जरूरत पडऩे पर विशेषज्ञ डॉक्टर के पास जाने की राय देंगे। हां, बच्चों के लिए शिशुरोग विशेषज्ञ के पास ही जाएं, तो बेहतर है।

जब विशेषज्ञ के पास जाएं

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किसी विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाएं, तो उनके द्वारा लिखी गई दवाएं, लैब टेस्ट आदि की जानकारी अपने फैमिली डॉक्टर को जरूर दें। वे आपको राय देंगे कि वास्तव में सारी दवाएं और टेस्ट जरूरी हैं या कुछ टेस्टों या दवाओं के बगैर भी काम चल सकता है। इससे आप फिजूल दवाएं खाने और अनावश्यक टेस्ट के पैसे खर्च करने से बच जाएंगे।

सेकंड ओपीनियन है बेहद जरूरी

अगर आप अपने फैमिली डॉक्टर या विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज करवा रहे हैं और दवा का कोर्स पूरा करने के बावजूद कोई फायदा नहीं मिल रहा या तबीयत ज्यादा बिगड़ रही है, तो तुरंत सारे प्रिस्क्रिप्शन और लैब टेस्ट की रिपोर्ट आदि लेकर किसी दूसरे चिकित्सक से शारीरिक परीक्षण करवाएं और उनसे राय लें। कई बार चिकित्सक चाहकर भी रोग की सही पहचान नहीं कर पाते, ऐसे में दूसरे डॉक्टर की राय बेहद फायदेमंद होगी।

डराकर करवा रहे हैं  जांचें- मेडिकल एक्सटार्शन

आजकल शायद ही कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ रहता हो। जाहिर है ऐसे में सबको डॉक्टर की सेवाएं लेनी पड़ती है। आजकल डॉक्टर व अस्पताल तकनीक का मिथ्या प्रचार करके लोगों के साथ न सिर्फ ठगी कर रहे हैं, वरन् जानलेवा बीमारियों का डर बताकर मोटे कमीशन के लिए तमाम तरह की वो जांचें भी करवा रहे हैं, जिसका मरीज की बीमारी से कोई लेना-देना नहीं है। यह सीधे-सीधे मेडिकल एक्सटार्शन है, जो कानूनी रूप से जुर्म है।

ये हैं मशीनों से होने वाली जांचें

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cbc-कम्पलिट ब्लड काउंट (खून में मौजूद RBC, WBC, हिमोग्लोबिन की जांच, पेशाब की जांच  (urine), ब्लड शुगर व डायबिटीज की जांच  (FBS / PPBS), किडऩी की जांच (SERUM क्रेटेनाइन), लीवर की जांच (SGPT), हृदय व कोलेस्ट्राल की जांच (लिपीड प्रोफाइल), हेपटाइटिस की जांच (HbsAg), इलेक्ट्रो कार्डियोग्राफ (ECG), सीने का डिजीटल एक्सरे (X-RAY चेस्ट), थायराइड की जांच (TSH), आर्थराइट्स की जांच (ESRU), ह्वदय की क्षमता व ताकत के लिए (TMTU)… इत्यादि।

इंदौर के किब्स हस्पिटल में जांच पैकेज

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बच्चों से लेकर 30 साल की उम्र तक के लिए  1300 रु.

30 से 35 साल की उम्र वालों के लिए   1800 रु.

35 से 40 साल की उम्र वालों के लिए   2200 रु.

40 से 50 साल की उम्र वालों के लिए   2600 रु.

40 से 50 साल के मेल-फीमेल के लिए  3500 रु.

40 से 50 साल की महिलाओं के लिए   3000 रु.

टोटल हॉस्पिटल में जांच के पैकेजों की कीमतें

विजयनगर स्थित टोटल हॉस्पिटल में मरीज की उपरोक्त जांचों के रेट 3000 रुपए से लेकर 6000 रुपए के बीच में लिए जाते हैं। जांचों की संख्या कम व ज्यादा के आधार पर होती है।

बॉम्बे हॉास्पिटल में जांच के पैकेजों की कीमत

बॉम्बे हॉस्पिटल में उपरोक्त जांचों के सम्पूर्ण चेकअप या अलग-अलग बीमारी के अलग-अलग मशीनों से आधारित जांच के आधार पर 1000 से लेकर 5000 रुपए तक लिए जाते हैं।

बनें, एक जिम्मेदार मरीज

जब भी किसी चिकित्सक के पास जाएं उन्हें ये जानकारियां जरूर दें। आपको किन दवाओं से एलर्जी है, आप कौन सी दवाएं लेते रहे हैं, ब्लडप्रेशर या डायबिटीज जैसी कोई बीमारी है या नहीं, कभी कोई ऑपरेशन करवाया है क्या, सही उम्र, ताजा टेस्ट रिपोर्ट (यदि कोई है) आदि बताएं। साथ ही डॉक्टर से अपने प्रिस्क्रिप्शन पर आपका बीपी, वजन, नाप, उम्र आदि भी लिखवा लें। रोग का संभावित डायग्नोसिस भी हर जिम्मेदार डॉक्टर लिखता है, यह चेक कर लें। दवाइयां हमेशा प्रतिष्ठित दवा दुकान से ही खरीदें, यदि दवा ज्यादा महंगी हो, तो आप डॉक्टर से तुलनात्मक रूप से सस्ते ब्रांड की दवा का सुझाव मांग सकते हैं।

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