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धीमे जहर – पान मसाले कितने हैं टोबैको एवं मैग्नीशियम फ्री : जांच करो और दोषियों
को डालो जेल में…!
मुख्यमंत्री को जनता के स्वास्थ्य की चिंता और खाद्य विभाग मौन!
तम्बाकू-जर्दायुक्त पान मसालों (गुटखा) पर प्रतिबंध के बावजूद इनकी चोरी-छिपे बिक्री आज भी हो रही है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का रुख भी इस मामले में काफी सख्त रहा है। धुआं रहित तम्बाकू उत्पादों के साथ ही प्लास्टिक पैकिंग पर प्रतिबंध के बावजूद कागजी पाउचों में धड़ल्ले से 100 प्रतिशत टोबैको फ्री, शून्य प्रतिशत तम्बाकू का प्रचार करते हुए बेचे जा रहे सादे पान मसाले भी क्या निकोटिन एवं घातक मैग्नीशियम कार्बोनेट से मुक्त हैं? यदि इसकी जांच की जाए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले, एक तरह से मौत के सौदागर बने ऐसे निर्माताओं को क्या जेल में डाला जाएगा यह अहम् सवाल है?
ये कैसी स्वास्थ्य गारंटी योजना?
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य के प्रति कुछ ज्यादा ही चिंतित नजर आ रहे हैं, और इसीलिए प्रदेश में स्वास्थ्य गारंटी योजना भी शुरू की गई है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिले, गरीबों को नि:शुल्क दवाइयां मिलें आदि सभी निर्णय तो अच्छे हैं, लेकिन जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले जो पान मसालों के रूप में धीमा जहर बेचते हुए लोगों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई किए बिना कैसे स्वास्थ्य गारंटी योजना पूरी तरह सार्थक होगी? यह सवाल अहम् इसलिए भी है, क्योंकि जर्दा-तम्बाकू युक्त पान मसाले (गुटखा) भले ही प्रतिबंधित हों पर उसकी बिक्री चोरी-छिपे बड़े पैमाने पर हो रही है। पान की दुकानें ही नहीं किराना दुकानों पर भी ये गुटका उपलब्ध हो रहे हैं और खाद्य विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, स्थानीय प्रशासन सभी जैसे आंखें मूंदे बैठे हैं। खाद्य पदार्थों में मिलावट की कभी-कभार जांच करके इतिश्री कर ली जाती है, जबकि जन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक गुटका सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद बिक रहा है, और जब बिक रहा है, तो माल भी बाकायदा बन रहा है। बनाने वाले भी वही निर्माता हैं, जो खुलेआम 100 प्रतिशत टोबैको-फ्री (तम्बाकू मुक्त), शून्य प्रतिशत तम्बाकू का प्रचार करते हुए अपने-अपने उत्पादों को तेजी से खपा रहे हैं, इसके लिए वे प्रतिदिन करोड़ों रुपए आकर्षक विज्ञापनों पर भी खर्च कर रहे हैं। कोई कह रहा है ‘केसरयुक्तÓ तो किसी का स्लोगन है सुरक्षा लेंस, क्वालिटी, सुरक्षा और असली की 100 प्रतिशत गारंटी। क्या है ये सब गोरखधंधा? ये सादे पान मसाले भी स्वास्थ्य के लिए काफी घातक हैं। हालांकि, केंद्र सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद से इन पर भी ये तो लिखा जाने लगा है कि पान मसाला चबाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, लेकिन मात्र ये चेतावनी क्या लोगों को इस जहर से मुक्ति दिलाने में कारगर हो सकी है? इसका स्पष्ट उत्तर तो कंपनियों द्वारा विज्ञापनों पर किए जा रहे करोड़ों रुपए के खर्च को देखकर ही लग जाता है कि आज भी पान मसाला निर्माताओं के वारे-न्यारे हो रहे हैं। टोबैको-फ्री हथकंडे से वे तो फल-फूल रहे हैं, जबकि लोग अपने जीवन को धीरे-धीरे मौत के मुंह में धकेल रहे हैं।
शून्य प्रतिशत तम्बाकू क्या है ये धोखा?

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100 प्रतिशत टोबैको-फ्री, शून्य प्रतिशत तम्बाकू क्या वास्तव में ऐसा है, या महज यह भी धोखा है? इस संदर्भ में जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार तम्बाकू का मुख्य तत्व निकोटिन है और जब तम्बाकू ही नहीं है, तो फिर निकोटिन होने का तो सवाल ही नहीं उठता। लेकिन, सेंट्रल टोबैको रिसर्च इंस्टिट्यूट राजमुंदरी (आंध्र) के परीक्षण में रजनीगंधा ब्रांड के पान मसाले में 2.26 ग्राम निकोटिन प्रति 100 ग्राम मात्रा में मिला। पराग प्रीमियम पान मसाला में 0.16 ग्राम निकोटिन की मात्रा मिली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया से इस संदर्भ में जांच के लिए कहा था, तो खाद्य मिलावट निरोधक कानून का हवाला देकर इससे मना कर दिया गया एवं बाद में जांच सीटीआरआई ने की थी।

नागपुर में जलाया था घटिया पान पराग!

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‘खातिरदारी में है जरूरी, इसके बिना महफिल अधूरी…Ó जैसे स्लोगन से एक समय में देश में सर्वाधिक बिक्री हासिल करने वाले सादे पान पराग ब्रांड में ही मैग्नीशियम कार्बोनेट की मात्रा काफी अधिक पाई गई थी। नागपुर के एक प्रमुख दैनिक में यह समाचार प्रथम पृष्ठ की सुर्खी बना, क्योंकि वहां के खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पान पराग के जब्त सेम्पल में मैग्नीशियम कार्बोनेट जैसे घातक तत्व की मौजूदगी पर विक्रेता एवं कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की थी एवं जब्त सेम्पल को बाद में जलाया गया था। पान मसालों में मैग्नीशियम कार्बोनेट की जांच हेतु उक्त कार्रवाई विभाग के अधिकारियों ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के निर्देश
पर की थी।

बना सकता है नपुंसक…!

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पान मसाले भले ही सादे, तम्बाकू-मुक्त के नाम से बेचे जाएं, लेकिन इनका नियमित उपयोग शुक्राणुओं को बुरी तरह प्रभावित करता है। नेशनल इंस्ट्टियूट ऑफ ऑक्यूपेशनल हेल्थ अहमदाबाद ने पाया, इससे पुरुषों की प्रजनन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। पूर्व में भी कुछ शोध हुए, जिनमें पाया गया कि इनसे व्यक्ति नपुंसकता की स्थिति में भी आ सकता है। जो बच्चे कम आयु से पान मसालों का सेवन करते हैं शादी के बाद उनके बच्चे विकलांग भी हो सकते हैं। ये भी सिद्ध हुआ कि किसी व्यक्ति द्वारा 0.5 से 1.5 व 3 प्रतिशत तक चाहे वह सादा पान मसाला हो, उसके मात्र 6 माह तक सेवन पर शुक्राणु तेजी से घटे हैं। टेस्टीक्यूलर डैमेज का ये बड़ा कारण है। देश में एक दशक पूर्व हुए सर्वे में तम्बाकू सेवन करने वालों की संख्या 28 करोड़ थी। इनमें से 23.19 करोड़ नियमित सेवन करने वाले थे। प्रतिबंध के बावजूद 11 राज्यों में तम्बाकू युक्त गुटका-पान मसालों की चोरी-छिपे बिक्री हो रही है। पान मसाला लॉबी ने पैसे के बूते नया हथकंडा शुरू किया और आज टोबैको-फ्री, शून्य प्रतिशत तम्बाकू के नाम पर खुलेआम गुटके की बिक्री कर रहे हैं और यही निर्माता तम्बाकू-जर्दा युक्त गुटका भी बना ही रहे हैं, बाजार में ये उत्पाद अवैध रूप से बिक ही रहा है।

मैग्नीशियम कार्बोनेट भी है घातक

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सादे पान मसालों में चाहे वो विमल, पान पराग, रजनीगंधा, राजश्री, इंदौर के निर्माताओं के सादे पान मसालों के ब्रांड कोई भी हो, उनमें मानव स्वास्थ्य के लिए घातक मैग्नीशियम कार्बोनेट की मौजूदगी भी जांच का विषय है। वैसे सादे पान मसालों में 2 से 5 प्रतिशत तक मैग्नीशियम कार्बोनेट पाया गया। स्थानीय नोबल हॉस्पिटल के डायरेक्टर नाक, कान, गला, विशेषज्ञ डॉ. मुकेश जैन एवं फिजिशियन-कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप मेहता ने कहा कि इसकी अधिकता से मानव स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। वैसे भी मैग्नीशियम कार्बोनेट के मानव स्वास्थ्य पर किए गए शोध से सिद्ध हुआ है कि इससे हायपोटेंशन, कार्डियक अरेस्ट (हृदय रोग) वोमेटिंग, त्वचा में विकार, कोमा तक में जाने की स्थिति, श्वसन तंत्र, रक्त संचार के बुरी तरह प्रभावित होने जैसी जटिल स्थितियां उत्पन्न होती हैं। इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल साइंस ने भी इन प्रभावों की पुष्टि की है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए मोदी दें कड़े निर्देश

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केंद्र में सत्तासीन मोदी सरकार से अच्छे दिनों की उम्मीद लगाए बैठे आमजन के अच्छे दिन तो तभी आएंगे, जब हर व्यक्ति की रोटी, कपड़ा, मकान की बुनियादी जरूरतें पूरी होंगी। हर एक को खाद्य सुरक्षा, मकान के वादे किए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले पान मसालों की बिक्री पर पूरे देश में पूर्णत: प्रतिबंध लगाने की आज पहली जरूरत है। इस कठोर निर्णय के पूर्व धीमा जहर बेचने वाले मौत के सौदागरों के इन उत्पादों की देशभर में जांच कराते हुए भी उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जा सकती है, बशर्ते पान मसाला लॉबी से मिलने वाले भारी राजस्व को तिलांजलि देने का भी साहस दिखाना होगा।

सादा पान मसाला भी खतरनाक

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जब ये सिद्ध हो चुका है कि सादे पान मसाले भी मानव स्वास्थ्य के लिए घातक हैं, तो इनकी बिक्री पर पूरे देश में प्रतिबंध क्यों नहीं लग पा रहा है? राजस्थान बांसवाड़ा की पूर्णिमा दवे अधिक सुपारी के सेवन से ही मुख के कैंसर से पीडि़त हो गई। पान मसालों का भी मुख्य घटक सुपारी है और यह भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसके अलावा पान मसालों में कत्था, मेंथाल, केसर, इलायची आदि कंटेंट बताए जाते हैं। शोध में पाया गया है कि पान मसाले व सुपारी का सेवन गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा घातक होता है।

जहर की अनुमति देने में पूर्व केंद्र सरकार दोषी

गौरतलब है, पान मसालों जैसे धीमे जहर की बिक्री को अनुमति देने में पूर्व केंद्र सरकार दोषी रही है। आजादी के बाद से सत्ता में अधिक समय काबिज रही कांग्रेस सरकार ने इसकी अनुमति दी थी। पिछले दशकों में सर्वप्रथम पाउच में पान पराग नाम से बिक्री करने का लायसेंस कानपुर के कोठारी प्रोडक्ट्स ने लिया, तब किसी ने नहीं सोचा कि ये सादा मसाला भी कितना खतरनाक हो सकता है। पान पराग की बढ़ती बिक्री देख कई निर्माता मैदान में आ गए, फिर तम्बाकू युक्त पान मसालों का दौर शुरू हुआ। सरकार बहुत देर से जागी, तब तक लाखों लोग मुंह के कैंसर व अन्य घातक बीमारियों के शिकार हो चुके थे। पान मसाले सादे हों, तब भी उनकी तलब तम्बाकू समान ही लगती है और ये आदत में शुमार हो जाते हैं। इसी का फायदा मौत के सौदागरों ने भरपूर उठाया और आज भी उठा रहे हैं। बरसों बाद पूर्ण बहुमत मोदी सरकार बनी है और उम्मीद की जाती है कि राजस्व का अन्य विकल्प तलाशते हुए पान मसाले जैसे धीमे जहर की बिक्री पूरे देश में सख्ती से प्रतिबंधित हो। लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होगा, तभी वे अच्छे दिनों को महसूस करेंगे। शुरुआत इससे भी करें कि टोबैको-फ्री, मैग्नीशियम कार्बोनेट आदि की सख्ती से जांच हो और दोषी पाए जाने वालों को जेलों में डाला जाएगा, तब ही कुछ हल निकल सकेगा।
मध्यप्रदेश क्या पूरे देश में की जाए जांच
सादे पान मसाले कितना निकोटिन तम्बाकू मुक्त हैं, अथवा इनमें मैग्नीशियम कार्बोनेट जैसे घातक तत्व की मौजूदगी कितनी है, इसकी मध्यप्रदेश के सभी जिलों में ही नहीं, अपितु देशभर में सख्ती से जांच किए जाने की जरूरत है, ताकि सच्चाई आम जन के सामने आ सके।

One thought on “क्यों नहीं हो रही मौत के सौदागरों पर कड़ी कार्रवाई?”
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