@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर 

गैंगस्टर सतीश भाऊ के खजराना मंदिर गर्भ गृह में पहुंचकर भगवान् गणेश को शिवाजी जयंती की यात्रा का निमंत्रण देने पर मीडिया और खजराना मंदिर प्रशासन में इतना हंगामा क्यों??

खजराना मंदिर के गर्भ गृह में जाकर दर्शन, पूजा अर्चना कौन करेगा, ये कौन निश्चित करता है खजराना मंदिर में? खजराना मंदिर की प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी? वो महिला गार्ड? मंदिर के पुजारी? भट्ट परिवार? कलेक्टर इंदौर या मीडिया?

क्या कलेक्टर इंदौर या मंदिर प्रशासन की तरफ से कोई सूचना बोर्ड लगा है मंदिर में कि गर्भ गृह में घुसकर दर्शन, पूजा – अर्चना निषेध है, मनाही है? यदि किसी भी आम या खास ने दवाब, प्रभाव से घुसने की कोशिश की या किसी ने करवाई तो उसके खिलाफ सख्त कानून करवाई की जाएगी, ऐसा आदेश डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और मंदिर प्रशासन के तहत कलेक्टर इंदौर जारी कर सकते है या सूचना बोर्ड लगा सकते है। क्या कभी जारी किया या मंदिर के गर्भ गृह के पास कोई सूचना बोर्ड लगाया है?

देश के प्रत्येक नागरिक को फिर चाहे वह पुलिस और कानून के रिकॉर्ड में अपराधी ही क्यों न हो, भगवान के मंदिर में पूजा – अर्चना के लिए संविधान से प्रदत्त उसकी धार्मिक स्वतंत्रता के तहत मौलिक अधिकार है। जिसे इस देश मे कोई रोक नही सकता हैं। वैसे भी भगवान के मंदिर में सब बराबर हैं।

क्या गैंगस्टर सतीश भाऊ अभी पुलिस या कानून में वांटेड है? सार्वजनिक स्थलों और दीवारों पर पोस्टर लगे हैं?

क्या सतीश भाऊ को मंदिर जाने पर कोई सरकारी, कानूनी, धार्मिक या सामाजिक फरमान के तहत मनाही है?

क्या सतीश भाऊ ने गर्भगृह में घुसने के लिए कोई जोर जबरदस्ती, गुंडागर्दी या किसी को धमकाया?

सतीश भाऊ अपनी पत्नी के साथ एक सामान्य दंपत्ति की तरह मंदिर गए थे न कि किसी गैंगस्टर की तरह, इसमें किसी को क्या आपत्ति है?

मंदिर प्रशासन कलेक्टर इंदौर ने गर्भगृह में घुसकर भगवान् गणेश की पूजा करने के लिए कोई कानूनी निषेधाज्ञा जारी कर रखी हैं?

क्या इंदौर के किसी पार्षद, विधायक, सांसद और मंत्री ने या मंदिर के किसी पुजारी या भट्ट परिवार ने कोई शिकायत या आपत्ति का मौखिक या लिखित आवेदन मंदिर प्रशासन (कलेक्टर) साहेब को दिया है?

खामीया और गलतियां खजराना मंदिर की व्यवस्था, मंदिर के पुजारियों और मंदिर प्रशासन में है, न कि सिक्योरिटी एजेंसी की महिला गार्ड में, न ही सिक्योरिटी एजेंसी में और न हीं गैंगस्टर सतीश भाऊ के मंदिर के गर्भ गृह में दर्शन करने में। भट्ट पुजारी परिवार और मंदिर प्रशासन सिर्फ अपने गिरेबां में झांक कर देखे कि वो कैसे तलवे चाट रहा हैं शहर के धनाढ्य, प्रभावशाली और दबंग लोगों के कि उसे मंदिर की गरिमा और भगवान गणेश की सुचिता और पवित्रता से समझौता करने में कोई गुरेज नहीं है।

@प्रदीप मिश्र री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

One thought on “गैंगस्टर सतीश भाऊ के खजराना मंदिर गर्भ गृह में पहुंचकर भगवान् गणेश को शिवाजी जयंती की यात्रा का निमंत्रण देने पर मीडिया और खजराना मंदिर प्रशासन में इतना हंगामा क्यों??”
  1. किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले सभी तथ्यों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। बिना आधिकारिक आदेश या लिखित निषेधाज्ञा के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं है।”

    “भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन और पूजा-अर्चना का अधिकार देता है। मंदिर में सभी श्रद्धालु समान हैं, इसलिए किसी भी टिप्पणी में संतुलन और संवेदनशीलता जरूरी है।”

    मीडिया की जिम्मेदारी पर टिप्पणी:

    “मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। अतः समाचार प्रस्तुत करते समय तथ्यों की पुष्टि और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि समाज में भ्रम या अनावश्यक विवाद न फैले।”

    गरिमा बनाए रखने की अपील:

    “मंदिर आस्था का स्थान है। किसी भी विषय पर चर्चा करते समय मंदिर की गरिमा, परंपराओं और सामाजिक सौहार्द का सम्मान किया जाना चाहिए।”

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