@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर 
प्रॉपर्टी खरीदने मे बैंक ब्याज और होम लोन को कहें अलविदा: सीधे बिल्डर से किश्तें बनवाकर बचाएं लाखों रुपए।
  • सीधे बिल्डर से किश्तें बनवाएं: कोई ब्याज नहीं, कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं।
  • कंस्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान चुनें: जैसे-जैसे काम होगा, वैसे-वैसे पैसे दें।
  • ब्याज के चक्रव्यूह से बचें: बैंक को प्रॉपर्टी की कीमत के बराबर एक्स्ट्रा ब्याज देने के बजाय, उस पैसे को अपने परिवार के भविष्य के लिए बचाएं।
मध्यम वर्ग के लिए अपना घर खरीदना जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है, लेकिन अक्सर यह सपना ‘होम लोन’ के भारी-भरकम ब्याज के कारण एक वित्तीय बोझ बन जाता है। क्या आपने कभी गौर किया है कि 20 साल के लोन के बाद आप बैंक को जो रकम चुकाते हैं, उसमें आप एक नहीं बल्कि दो घर खरीद सकते है? आज के दौर में समझदारी इसी में है कि बैंक के ब्याज को अलविदा कहकर सीधे बिल्डर से भुगतान की बात करे।
1. होम लोन का ब्याज का चक्रव्यूह :
एक उधारण के तौर पर जब आप 50 लाख रुपए का घर खरीदने के लिए 40 लाख का लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो 9% की औसत ब्याज दर पर आप कुल 86 लाख रुपए से अधिक का भुगतान करते हैं। यानी 40 लाख मूलधन और लगभग 46 लाख रुपए सिर्फ ब्याज!  आपकी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा बैंक को ब्याज के रूप मे देना है! क्या यह समझदारी वाली प्रॉपर्टी डील है?
2. बिल्डर पेमेंट प्लान: क्यों है यह फायदे का सौदा?
आजकल कई प्रतिष्ठित रियल एस्टेट डेवलपर्स “Construction Linked Payment Plan” (CLP) या “Interest-Free Installments” ऑफर कर रहे हैं। इसके फायदे निम्नलिखित हैं:
  •  ब्याज की सीधी बचत: सीधे बिल्डर को किश्तें देने पर आपको कोई चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) नहीं देना पड़ता।
  • पजेशन तक सुरक्षा: आपका पैसा सीधे प्रोजेक्ट के निर्माण में लगता है। बैंक लोन की तरह आपकी EMI उस समय शुरू नहीं होती जब घर सिर्फ कागजों पर हो।
  •  प्रक्रिया शुल्क में कमी: बैंक फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस और इंश्योरेंस के नाम पर लगने वाले हजारों रुपये बच जाते हैं।
3. बैंक लोन वाले प्रोजेक्ट्स से रहें सावधान?
अक्सर देखा गया है कि कुछ बिल्डर्स बैंक लोन के माध्यम से शुरुआत में ही पूरा भुगतान (Full Payment) ले लेते हैं। ग्राहकों के लिए यह सबसे जोखिम भरा सौदा है:
  •  देरी का खतरा: जब बिल्डर को पूरा पैसा पहले ही मिल जाता है, तो निर्माण कार्य की गति धीमी होने की संभावना बढ़ जाती है। अक्सर यह देखने मे आया है विज्ञापन और बुकिंग के समय किए गए वादों को पूरा नहीं किया जाता है। 
  •  रजिस्ट्री में अड़चन: पूरा भुगतान करने के बावजूद कई खरीदार सालों तक रजिस्ट्री के लिए बिल्डर के चक्कर काटते रहते हैं।
  •  ईएमआई का दोहरा बोझ: घर तैयार नहीं होता, फिर भी बैंक की ईएमआई शुरू हो जाती है। यदि आप किराए पर रह रहे हैं, तो यह स्थिति आपको कर्ज के जाल में फंसा सकती है।
4. निवेश से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान
यदि आप बिना बैंक लोन के सीधे बिल्डर के साथ किश्तें बनवा रहे हैं, तो इन बिंदुओं को एग्रीमेंट में जरूर शामिल करें:
  •  निर्माण आधारित भुगतान: किश्तें समय के आधार पर नहीं, बल्कि निर्माण के चरणों (जैसे- नींव, ढांचा, फिनिशिंग) के आधार पर होनी चाहिए।
  •  विलंब शुल्क (Penalty Clause): यदि बिल्डर पजेशन में देरी करता है, तो उसे आपको ब्याज सहित राशि वापस करने या भारी पेनल्टी देने का क्लॉज होना चाहिए।
  •  RERA की जांच: सुनिश्चित करें कि प्रोजेक्ट रेरा (RERA) में पंजीकृत है और भुगतान सीधे बिल्डर के रेरा RERA द्वारा मान्यता प्राप्त बैंक खाते में जा रहा है।
यदि आपकी वित्तीय स्थिति अनुमति देती है, तो 5-7 साल की छोटी अवधि का ‘बिल्डर पेमेंट प्लान’ चुनें। यह न केवल आपको लाखों रुपये के ब्याज से बचाएगा, बल्कि आपको जल्द ही कर्ज मुक्त घर का मालिक भी बनाएगा।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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