@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
महापौर साहेब? इंदौर के स्वाद की पहचान “सराफा चौपाटी” सराफा की तंग गलियों में ही क्यो लगेगी?
इंदौर एक आधुनिक और स्मार्ट शहर की तरफ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है, यह गलियों का शहर नहीं है। छप्पन दुकान, भवरीलाल मिठाईवाला, जे.एम.बी, अपना स्वीट्स, मधुरम स्वीट्स, जॉनी हॉटडॉग…… ये आधुनिक इंदौर शहर के पूरे देश और दुनिया मे स्वाद के ब्रांड बन चुके है। वही दूसरी तरफ़ सराफा की गलियों मे सराफा चौपाटी जिसके दुकानदारों और दुकानों के स्वाद और मालिकों के नाम तक किसी को नही मालूम को आप क्यों अवैध रूप से सराफा की एक गली मे ही क्यों रखना चाहते हो महापौर साहब?
सवाल यह है कि आज के इंदौर मे –
- सरकार इंदौर के सराफा बाजार को देश और दुनिया में फेमस करना चाहती हैं कि सराफा चौपाटी के भाटियारो के स्वाद को?
- सरकार को राजस्व और जनता को रोजगार कौन ज्यादा दे रहा हैं? 2000 सराफा व्यवसाई या 80 से लेकर 200 स्वाद के भटियारे?
- 80 साल पहले का इंदौर, उसका क्षेत्रफ़ल, उस समय की जनसंख्या और आज का इंदौर, आज की जनसंख्या और आज का इंदौर! जमीन आसमान का अंतर है? आज को सामने रखकर निर्णय लो! 80 साल पहले की तरह सोचना समझदारी नहीं है!
- क्या इंदौर का “स्वाद” किसी गली का मोहताज है?
क्या शहर के एम.जी रोड जहां एक तरफ कॉर्पोरेट और बड़े ज्वैलर्स के भव्य शो रूम्स ने आधुनिक मशीनों से निर्मित डिजाइनर ज्वेलरी के कॉर्पोरेट सराफा बाज़ार की पहचान बना रखी हैं! उसके सामने की तरफ जहां काफ़ी जगह खाली पड़ी हैं वहां “सराफा चौपाटी” के नाम से इंदौर के परंपरागत और आधुनिक स्वाद की हाइजीनिक दुकानों का मॉल या कॉम्प्लेक्स बनाकर प्रदेश और देश का भव्य और विशाल फूड मार्केट नहीं खोल सकते हैं या खुलवा सकते हैं?
जहां पूरी सराफा चौपाटी को शिफ्ट कर सकते है। सालों से लाखों करोड़ों रुपए कमाए है उन्होंने ओटलों पर बैठ कर।
रही बात पहचान और विरासत की तो, पहचान तो है इंदौर का सराफा! पहले सराफा बाजार ने पूरे शहर, मालवा और प्रदेश में पहचान बनाई।बाद में आए भटियारे?
2000 सराफा व्यवसाई और हजारों की तादाद में कारीगर जो हाथ, अनुभव की कारीगरी से एक बढ़कर एक स्वर्ण, रजत और हीरे के आभूषण बनाने की परंपरागत विरासत को जिंदा रखे हुए है!
आज जहां इंदौर का सराफा बाजार, बड़े कॉरपोरेट ज्वैलर्स,भव्य शो रूम की चकाचौंध और उनके बड़े पैमाने पर अत्यधिक खर्चीले मार्केटिंग और विज्ञापन अभियान के सैलाब में अपनी विरासत और आस्तित्व को ढूंढ रहा हैं!
तो वहीं दुसरी तरफ इंदौर नगर निगम और इंदौर की नेता नगरी को मात्र 500 मीटर की सराफा की मुख्य गली में अवैध रूप से दुकानों के ओटलों पर लगने वाले खाने पीने के खोमचे जिन्हें इंदौर के सराफा की गली का स्वाद बताकर सराफा चौपाटी के नाम से देश और दुनिया में फेमस करने को नाक का सवाल बना लिया है?
क्योंकि पिछले 78 सालो में देश और दुनिया को इंदौर के स्वाद, उसमें भी पहला सराफा चौपाटी और दूसरा 56 दुकान के अलावा और है भी क्या?
विरासत, परंपरा, पहचान और धरोहर की बात इंदौर नगर निगम कर रहा हैं? कान्ह नदी! इंदौर की 7 कपड़ा मिले! इंदौर का मौसम! इंदौर का गांधी हॉल! एम वाय हॉस्पिटल! नेहरू पार्क! सैकड़ों बाग बगीचों के लिए कभी इंदौर न सिर्फ पूरे देश वरन् दुनिया में पहचाना जाता था! ये आज किसी हाल में यह पूरा शहर जानता है! रही बात देश और दुनिया की तो वो सेंट्रल इंडिया के सबसे बड़े औद्योगिक और खूबसूरत शहर से काफी आगे निकल चुके है!
इंदौर का सराफा भी परंपरा ओर विरासत है! कृपया इसकी पहचान को कुछ भटियारो के लिए मत कुर्बान कर देना! कुछ फैसले वक्त, हालात और शहर के स्तर को देख कर लिए जाते है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर