@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

कलेक्टर साहेब समस्या का हल सिर्फ़ हेलमेट नही है?

काश!! कलेक्टर साहेब टू व्हीलर पर स्कूल, कॉलेज और कोचिंग आने पर छात्रों पर पाबंदी लगा सकते? न इनके पास ड्राइविंग लाइसेंस हैं और न ही सुरक्षित ड्राइविंग का अनुभव?

सरकारी और अर्ध शासकीय कार्यालयों में टू व्हीलर से आने पर प्रतिबंध लगा देते? 55 से 75 साल के अधेड़ और बुजुर्ग सड़को पर टू व्हीलर लेकर घूमते हैं! इन पर तो रोक लगाओ?

जनता की जान की इतनी ही परवाह हैं तो बायपास, रिंग रोड, शहर से बाहर जाने वाले हाइवे, व्यस्त बाजारों जहां पर एक्सीडेंट का ज्यादा ख़तरा है वहां पर टू व्हीलर चलाने पर पाबंदी लगा देते?

लेकिन लगा नही सकते है क्योंकि वर्ल्ड क्लास पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने की सरकार में क्षमता ही नहीं है? साईकिल ट्रैक, पैदल चलने के लिए छायादार वृक्षों से आच्छादित फुटपाथ, फुटपाथ पर विश्राम के लिए किनारे पर बैंच, पब्लिक युटिलिटी सुविधा गृह बनाने की नीयत और वर्ल्ड क्लास सोच नगर निगम के महापौर और निगम परिषद में ही नही हैं? पता नहीं विदेश जा कर क्या देखते है?

पूरा इंदौर शहर मात्र 15 से 20 किलोमीटर के अंदर सिमटा हुआ हैं! 90 फीसदी जनता को अपने घर से शहर में मात्र 1 किलोमीटर से लेकर अधिकतम 10 किलोमीटर तक जाने के लिए टू व्हीलर का इस्तेमाल करती हैं! आज इंदौर की अनुमानित जनसंख्या 35 लाख के आस पास होगी और इंदौर के प्रत्येक घर में कम से कम 2 और अधिकतम 4 टू व्हीलर उपलब्ध है! एक प्रकार से कह सकते है जितनी जनसंख्या हैं उतने ही या मात्र 10 -15 फीसदी कम टू व्हीलर है! मतलब 25 से 30 लाख टू व्हीलर! और शहर में कुल मिलाकर 10 मुख्य सड़के भी नही है! जहां ये 25 से 30 लाख टू व्हीलर रोज़ मात्र 10 से 20 किलोमीटर में दौड़ते नही सिर्फ़ रेंगते हैं?

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर 

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