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कॉर्पोरेट ज्वेलर्स के लुभावने और चमकीले विज्ञापनों का सच: झांसे में न आएं!

त्योहारों और शादियों के सीजन में अखबार ज्वेलर्स के रंग-बिरंगे विज्ञापनों से पटे रहते हैं।
ज्वेलर्स के इन लुभावने विज्ञापन में—
“मेकिंग चार्ज पर 100% छूट”,
“सबसे सस्ता सोना” या “शुद्धता की 100% गारंटी”—
• अपना पुराना सोना एक्सचेंज करे और पाए 105 फीसदी मूल्य यह ऑफर सिर्फ डायमंड ज्वेलरी की खरीद पर!!
• 90 फीसदी बाय बैक डायमंड ज्वेलरी पर मेंकिंग चार्ज सहित!
• 100 फीसदी तक की छूट डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी के मेकिंग चार्जेस पर!!
• 95% एक्चेंज डायमंड ज्वेलरी पर मेंकिंग चार्ज सहित!
• एंटीक ज्वेलरी 3.99% मेकिंग चार्जेस!
• फ्लैट 0% कटौती किसी भी ज्वेलर्स से लिए गए पुराने सोने पर!
अखबारों में ज्वेलर्स के यह लुभावने विज्ञापन जितने आकर्षक दिखते हैं, इनके पीछे का गणित और छुपी हुई शर्तें, * का चिह्न मतलब कंडीशन अप्लाई का मार्क (Hidden Terms & Conditions) उतनी ही पेचीदा होती हैं।
कोई भी बिजनेस घाटे में काम नहीं करता हैं इसलिए जब आपको एक जगह भारी छूट मिलती है, तो उसकी भरपाई किसी दूसरे रास्ते से कर ली जाती है।
सोना सिर्फ एक आभूषण नहीं बल्कि आपकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का निवेश है, इसलिए विज्ञापनों की तड़क-भड़क के पीछे छिपे गणित और धोखाधड़ी को समझना बेहद जरूरी है।
आइए इन सभी ऑफर्स के पीछे छिपे असली सच को एक-एक करके विस्तार से समझते हैं।
1. विज्ञापन में बताते हैं: “मेकिंग चार्ज पर 100% छूट या 0% मेकिंग चार्जेस!!
आपको लगता है कि गहने बनाने की मजदूरी बिल्कुल मुफ्त है और आपको सिर्फ सोने की कीमत देनी है।
छिपा हुआ सच:
सोने की दर (Gold Rate): अक्सर ऐसे ऑफर्स में ज्वेलर सोने का प्रति ग्राम रेट मार्केट रेट जो इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन से प्रतिदिन निर्धारित किया जाता है से ₹200 से ₹400 तक बढ़ा कर लगाते हैं। या सोने की शुद्धता मतलब 22 कैरेट की जगह 20 या 21 कैरेट का सोना दे रहा हो।
इसके अलावा यह छूट अक्सर केवल चुनिंदा, भारी या पहले से बनी-बनाई मशीन या फैक्ट्री में बनाई ज्वेलरी पर होती है, जिनकी डिजाइनिंग कॉस्ट ज्वेलर को बहुत कम पड़ी होती है।
कई ज्वेलर्स मेकिंग चार्ज भले ही 0% ले रहे हो लेकिन वो आपसे 10% से 15% तक ‘वेस्टेज चार्ज’ (सोना काटने-गढ़ने में हुआ नुकसान) वसूल लेते हैं, जो असल में मेकिंग चार्ज का ही दूसरा नाम है।
2. “पुराना सोना एक्सचेंज करने पर 105% मूल्य” (लेकिन सिर्फ डायमंड ज्वेलरी की खरीद पर)
विज्ञापन में बताते हैं: आपके पुराने सोने की कीमत बाजार से 5% ज्यादा लगाई जा रही है।
छिपा हुआ सच:
डायमंड में भारी मार्जिन: डायमंड (हीरे) की ज्वेलरी में प्रॉफिट मार्जिन सबसे ज्यादा (30% से 50% तक) होता है। हीरे की असली कीमत, उसकी कटिंग और लेबर कॉस्ट का मूल्यांकन पूरी तरह ज्वेलर के हाथ में होता है। इसके अलावा आर्टिफिशियल डायमंड या लैब ग्रोन डायमंड जिसे लैबोरेटरी में बनाया जाता हैं वो भी असली हीरे के नाम पर बेच दिए जाते है ।
अक्सर ज्वेलर आपको सोने पर जो 5% एक्स्ट्रा दे रहा है, वह नए डायमंड सेट की कीमत को थोड़ा बढ़ाकर या उसमें लगे हीरों के दाम में आसानी से वसूल कर लेता है।
3. “90% बाय-बैक और 95% एक्सचेंज” (डायमंड ज्वेलरी पर, मेकिंग चार्ज सहित)
विज्ञापन में बताते हैं: भविष्य में जब आप उस डायमंड ज्वेलरी को बेचेंगे या बदलेंगे, तो मेकिंग चार्ज जोड़कर कुल वैल्यू का 90% या 95% पैसा वापस मिलेगा।
छिपा हुआ सच:
यह नियम सिर्फ तभी काम करता है जब आप उसी ज्वेलर के पास वापस जाएं। अगर वह दुकान बंद हो गई या आप किसी दूसरे शहर चले गए, तो दूसरा ज्वेलर इसे इस वैल्यू पर कभी नहीं खरीदेगा।
4. “एंटीक ज्वेलरी पर सिर्फ 3.99% मेकिंग चार्जेस?
विज्ञापन में बताते हैं: एंटीक (बारीक नक्काशी वाली) ज्वेलरी आमतौर पर 20-25% मेकिंग चार्ज पर मिलती है, जो यहाँ बेहद सस्ती मिल रही है।
छिपा हुआ सच:
स्टार्टिंग प्राइस (Starting From…): विज्ञापन के कोने में एक छोटा सा स्टार (*) लगा होता है, जिसका मतलब है कि 3.99% मेकिंग चार्ज केवल सबसे साधारण या बहुत भारी चेन/कड़े पर लागू है।
सुंदर और बारीक एंटीक सेट पर मेकिंग चार्ज 18% से 24% ही लिया जाएगा।
कई ज्वेलर्स कम मेकिंग चार्ज दिखाकर, गहने के वजन में 5% से 8% का वेस्टेज अलग से जोड़ देते है।
5. “फ्लैट 0% कटौती किसी भी ज्वेलर्स से लिए गए पुराने सोने पर?
विज्ञापन में बताते हैं: आप किसी भी दुकान का पुराना सोना लाएं, बिना एक भी रुपया काटे उसे शुद्ध सोने के भाव बदला जाएगा।
छिपा हुआ सच:
जब आप किसी अन्य ज्वेलर का सोना लाते हैं, तो उसे ‘कैरटमीटर’ में डाला जाता है। पुराने समय में 22 कैरट कहकर बेचे गए गहने अक्सर टेस्ट में 18 या 20 कैरट के निकलते हैं।
6. कम कैरेट का सोना देकर पूरे पैसे वसूलना।
विज्ञापन में 22 कैरेट का भाव दिखाकर, आपको 18 या 20 कैरेट का गहना थमा दिया जाता है। बेईमान ज्वेलर्स मुनाफ़ा कमाने के लिए तांबा या जस्ता 15% से 20% तक बढ़ा देते हैं।
आजकल सोने में तांबे की जगह इरीडियम और रुथेनियम मिला दिया जाता है। इनका वजन और घनत्व (Density) बिल्कुल सोने जैसा होता है। साधारण वजन मशीन पर यह असली जैसा भारी लगता है और बिना आधुनिक लैब टेस्ट (XRF मशीन) के इसे पकड़ना नामुमकिन है।
टांके (Soldering Alloy) का खेल: गहने के हिस्सों को जोड़ने वाले टांके में सस्ते मेटल (जैसे कैडमियम) का इस्तेमाल होता है। खरीदते समय ज्वेलर इसे सोने के वजन में जोड़कर पूरे पैसे लेता है, लेकिन जब आप उसे बेचने जाते हैं, तो टांके का वजन काटकर पैसे कम कर देता है।
मोम या लाख की छुपी हुई भराई (Wax/Lac Filling): कई बार विज्ञापनों में भारी दिखने वाले मोटे कंगन या हार अंदर से खोखले होते हैं। उन्हें भारी बनाने के लिए अंदर मोम, लाख या शीशा (Lead) भर दिया जाता है। खरीदते समय आप इस कचरे का दाम भी सोने के भाव (Gross Weight) में चुकाते हैं, लेकिन बेचते समय ज्वेलर इसे पिघलाकर वजन घटा देता है।
याद रखें विज्ञापन सिर्फ दुकान तक बुलाने का जरिया हैं। समझदारी और पक्के सबूत ही आपकी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रख सकते हैं। सतर्क रहें, सुरक्षित खरीदारी करें!
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
