@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
इंदौर शहर में पुलिस के रिकॉर्ड में जो भू माफिया हिस्ट्री शीटर है! थानों में अनेको FIR है! न्यायालय में जिन जमीनों के मामले में क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं! उन्हीं जमीनों के मालिक घोषित किए जा रहे है सिविल न्यायालयों के फैसलों में? कैसे मिलेगा पीड़ित को इंसाफ?

इंदौर शहर में दिवंगत सुरेन्द संघवी, उसका बेटा प्रतीक संघवी, दीपक मद्दा, बॉबी छाबड़ा कुख्यात और हिस्ट्रीशीटर भू माफिया गैंग द्वारा 350 करोड़ रुपए की एबी रोड, LIG चौराहे से लगी अयोध्या पुरी की बेशकीमती जमीन और 500 करोड़ की कनाड़िया रोड स्थित डायमंड कॉलोनी की जमीन को कानूनी रूप से हड़पने के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और परिवार, इंदौर कलेक्टर कार्यालय, नगर निगम, पुलिस, इंदौर की राजनीति के कांग्रेसी और भाजपाई कद्दावर एवं बाहुबली नेताओं को बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।
उपरोक्त दोनों ग्रह निर्माण संस्थाओं के सदस्यों को आवंटित प्लॉट की जमीनें हड़पने में एक जैसी Modus Operandi (मोडस ऑपेरेंडी) षडयंत्र का इस्तेमाल किया गया!! बधाई हो।
हमे भू माफिया कहते है। तुम्हारी औकात क्या है डायमंड कॉलोनी और अयोध्या पुरी रहवासी संघ के प्लाॅट धारकों? कोर्ट को जो हम बताएंगे वही अंतिम सत्य होगा। किस कलेक्टर और सरकारी अधिकारी की इतनी हिम्मत और औकात है कि हमारे खिलाफ कोर्ट में जवाब दे दे? तुम्हारे नेताओं, सरकार और प्रशासन को हम अपनी जेब में रखते है।
जालसाजी और धोखाधड़ी करने वाला भू-माफिया समाज के लिए साधारण चोरों या जेबकतरों से कहीं अधिक खतरनाक और घातक होता है। जेबकतरे या छोटे-मोटे चोर किसी व्यक्ति का कुछ नगदी, सोना या सामान चुराते हैं, जिससे पीड़ित को तुरंत झटका तो लगता है, लेकिन वह पूरी तरह तबाह नहीं होता।
इसके विपरीत, भू-माफिया जालसाजी, धोखाधड़ी, फर्जी और कूट रचित दस्तावेजों का ऐसा जाल बुनता है कि उस जाल में इंसान की जीवनभर की जमा-पूंजी और उसकी छत ही छीन लेता है। एक आम आदमी अपनी पूरी जिंदगी मेहनत करके, पेट काटकर एक प्लॉट या मकान के लिए पैसे जोड़ता है। भू-माफिया का शिकार होने के बाद पीड़ित व्यक्ति सालों-साल कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने को मजबूर हो जाता है।
छोटे चोर कानून से डरकर भागते हैं, जबकि भू-माफिया कानून, प्रशासन और सिस्टम की खामियों का पूरे सिस्टम के साथ मिलीभगत कर फायदा उठाते हैं। समाज का सफेद पोश और धनाढ्य वर्ग नेताओं और भ्रष्ट आला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संबंध रखकर रसूखदार कहलाते है। नेताओं के वरदहस्त और भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर संगठित अपराध चलाते हैं।
यह माफिया सरकारी जमीनों, गृह निर्माण सहकारी साख संस्थाओं और विवादित संपत्तियों पर अपनी पैनी नजर रखते हैं।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
