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चंडीगढ। न्यायिक अधिकारियों तथा जजों की तबादला नीति के कोई तय नियम नहीं हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया नियुक्त होने के बाद जस्टिस तीरथङ्क्षसह ठाकुर ने अपने पहले इंटरव्यू में यह स्पष्ट कर दिया कि तबादलों को लेकर कोई घोषित नीति नहीं है, पर आगे भी ऐसा जारी रहेगा। जस्टिस ठाकुर 3 दिसंबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का पद संभालेंगे। वे निवर्तमान चीफ जस्टिस एचएल दत्तू का स्थान लेंगे, जो 2 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ट्रिब्यून के साथ खास इंटरव्यू में उन्होंने यह भी साफ कहा कि अदालतों के कार्यों को डिजिटाइलेजेशन करने का महत्वपूर्ण कार्य आगे भी जारी रहेगा। संभावना है कि यह प्रक्रिया पूरी होने में 2 दशक लगेंगे और तब अदालतों का कार्य पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगा। वर्तमान में कुछ जज छोटी स्क्रीन के साथ काम कर रहे हैं, जिनके साथ वे सहज महसूस नहीं कर रहे। जस्टिस ठाकुर ने कहा कि डिजिटलीकरण प्रक्रिया बहुत जरूरी थी। इससे उन युवा जजों को बूस्ट मिलेगा, जो कम्प्यूटर पर कार्य करना चाहते हैं। जस्टिस ठाकुर खुद टेक्नोसेवी जज हैं। जस्टिस ठाकुर न्याियक सर्कल में ‘जज विद ए ह्यूमेन टचÓ के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए कि उनके कार्यकाल के दौरान अदालतों में भी वॄकग कंडीशन सुधारी जाएगी। मधुर स्वभाव के जस्टिस ठाकुर 43वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया होंगे। जस्टिस ठाकुर यहां पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट की नई बनी सेंट्रेलाइज्ड ‘जूडीशियल रिकॉर्ड बिङ्क्षल्डगÓ का उद्घाटन करने आए थे।

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