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कुछ वकीलों को केस लडऩे के एवज में एक भी पैसा नहीं मिला
भोपाल। 2013 में सामने आए मध्यप्रदेश के चॢचत व्यापमं घोटाले के बारे में दायर एक आरटीआई के जवाब में खुलासा हुआ है कि जांच शुरू होने के बाद से अब तक व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल, मध्य प्रदेश) केस लड़ रहे वकीलों पर 60 लाख रुपए खर्च कर चुका है। इस मामले में कई अलग-अलग केस दर्ज किए गए, जिन्हें व्यापमं की ओर से 12 वकील लड़ रहे हैं। इस खुलासे में एक असमानता दिखी कि कुछ वकीलों को केस लडऩे के एवज में एक भी पैसा नहीं मिला, जबकि कई वकीलों ने इससे लाखों रुपए कमाए। मध्य प्रदेश परीक्षा बोर्ड के अजय दुबे द्वारा इस महीने दायर की गई आरटीआई में पता चला कि जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे पुरुषेंद्र कौरव को 2013 में 302 मामलों के लिए साढ़े चार लाख रुपए का भुगतान किया गया। 2014 में 407 मामलों के लिए इन्हें 38 लाख रुपए, जबकि 2015 में 76 मामलों के लिए लगभग साढ़े तीन लाख रुपए का भुगतान किया गया।
कब किसे कितना भुगतान किया

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सुप्रीम कोर्ट के एक वकील राहुल श्रीवास्तव को 2014 में दो केस लडऩे के एवज में 55 हजार रु. का भुगतान किया गया और 2015 में 42 मामलों के लिए साढ़े नौ लाख रु.का भुगतान किया गया। गौरतलब है कि इसी बीच हाईकोर्ट के एक अन्य वकील विवेक खेड़ेकर को 2015 में 12 केस लडऩे के एवज में कोई भुगतान नहीं किया। उन्हें ९ केस लडऩे के लिए 2013 में 36 हजार रु. और 2014 में 20 केस लडऩे के लिए 40 हजार रु. का भुगतान किया गया था। एक अन्य वकील शोभितादित्य श्रीवास्तव को 2014 और 2015 में ७ केस लडऩे पर कोई भुगतान नहीं दिया, जबकि 2013 में ७ केस लडऩे के लिए उन्हें ४ हजार रु. दिए गए थे। इसके अलावा मनोज त्रिवेदी को 2014 और 2015 में ७ केस लडऩे के लिए कोई भुगतान नहीं किया। आकाश शर्मा को 2013 में 22 केस लडऩे के लिए लगभग एक लाख रु.और 2014 में ९ केस लडऩे के लिए 44 हजार रु.का भुगतान किया था। 2015 में 10 केस लडऩे के लिए उन्हें अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया। एमपीएस रघुवंशी को 2014 में लड़े २ मामलों के लिए कोई भुगतान नहीं मिला और अनामिका कुमार को 2015 में लड़े अपने मामलों के लिए भुगतान नहीं मिला। अनामिका को 2013 में ७ मामलों के लिए 24 हजार रु. बतौर मेहनताना दिया गया था।  आरटीआई के जवाब में पता चला कि वकील राहुल दिबाकर ने 2013 में ९ केस लड़कर 36 हजार, 2014 में 19 केस लड़कर 24 हजार और 2015 में 11 केस लड़कर ८ हजार रु. कमाए। वकील पीयूष दुबे ने 2013 में 30 केस लड़कर 64 हजार और दीपक चंदना ने 2013 में ४ केस लड़कर ८ हजार रु. का भुगतान पाया था। रघुबीरङ्क्षसह चौहान को 2013 में ४ केस लडऩे के लिए 20 हजार रु. का भुगतान किया गया था। व्यापमं में हुए घोटाले की जानकारी तब सामने आई, जब 2013 में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन्होंने 2009 में आयोजित एक प्रवेश परीक्षा में सभी नियमों को ताक पर रखकर भर्ती की थी। व्यापमं मप्र में सरकारी कर्मचारियों का रिक्रूटमेंट करता है और मेडिकल कोर्सेस में ऐडमिशन टेस्ट आयोजित करता है। व्यापमं घोटाला सामने आने के बाद इससे जुड़े 48 लोगों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। एक के बाद एक लगातार हुई इन मौतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई, 2015 में इस केस की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई न सिर्फ घोटाले की, बल्कि केस से जुड़े लोगों की मौत की जांच भी कर रही है।

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