@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
ये क्या हो रहा है? सब खुलेआम? इंदौर रजिस्ट्रार कार्यालय के उप पंजीयक अरविंद खरे का 50 करोड़ रूपए की बेशकीमती जमीन को अवैध विक्रय पत्र के आधार पर मात्र 1 करोड़ 75 लाख में खरीदने का दावा सेशन न्यायालय ने खारिज किया!!

इंदौर लोकायुक्त और मध्यप्रदेश सरकार के लिए यह जांच का विषय है कि इंदौर में पदस्थ उप पंजीयक अरविंद खरे जो एक सरकारी अधिकारी है वो 1 करोड़ 75 लाख रुपए कहां से लाए है? उन्होंने अरनेजा बंधुओं को इतनी बड़ी धन राशी उधार कैसे दी? या फिर उन्होंने 50 करोड़ की बेशकीमती जमीन खरीदने का अनुबंध कैसे न्यायालय को शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत कर दिया? क्या उन्होंने धोखाधड़ी, फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों की आधार पर न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया था? इन सबकी जांच होना अति आवश्यक है। क्योंकि वो सरकार के सबसे भ्रष्ट कार्यालय के सबसे बड़े अधिकारी हैं।
इंदौर रजिस्ट्रार कार्यालय ऑफिस 1 मोती तबेला कलेक्टर कार्यालय कैंपस में पदस्थ उप पंजीयक 47 वर्षीय अरविंद खरे ने इंदौर के ग्राम हुकमा खेड़ी में सुरेंद्र सिंह और सुरजीत सिंह पिता चंचल सिंह अरनेजा के पेट्रोल पंप की 0.308 हेक्टेयर (33152 स्क्वायर फीट) जिसका आज बाजार मूल्य तकरीबन 50 करोड़ रुपए तथा प्रचलित गाईड लाइंस के अनुसार 15 करोड़ रुपए है, को मात्र 1 करोड़ 75 लाख रुपए में एक ऐसे विक्रय अनुबंध पत्र के माध्यम से जिसमें अनुबंध की कोई तारीख अंकित नहीं है! क्रेता का नाम बाद में हाथ से लिखा गया है! खरीदने का दावा इंदौर जिला न्यायालय की न्यायाधीश वर्षा भाटी के न्यायालय में सन् 2023 में प्रस्तुत किया था।
उपरोक्त विक्रय अनुबंध के मुताबिक रजिस्ट्रार कार्यालय में पदस्थ उप पंजीयक अरविंद खरे ने 1 करोड़ 70 लाख रूपए अर्नेजा बंधुओं और उनकी माता को विभिन्न तारीखों में देना बताया और प्राप्ति पर अरनेजा बंधुओं और उनकी माता के हस्ताक्षर भी विक्रय अनुबंध में होना बताया। मात्र 5 लाख रुपए का भुगतान प्राप्त कर अर्नेजा बंधुओं और उनकी माता को सब रजिस्ट्रार अरविंद खरे को उपरोक्त भूमि की रजिस्ट्री करना बाकी हैं। किन्तु उनके द्वारा रजिस्ट्री न करते हैं उपरोक्त भूमि किसी अन्य बिल्डर को बेच न दे इसके लिए निषेधाज्ञा आदेश पारित करने के लिए यह मुकदमा दायर किया है।
अरनेजा बंधुओं ने न्यायालय को बताया कि सब रजिस्ट्रार अरविंद खरे द्वारा प्रस्तुत किया विक्रय पत्र अवैध और बनावटी है। यह लेन देन का दस्तावेज प्रतीत होता हैं।
दिनांक 26 मार्च 2026 को जिला न्यायालय की न्यायाधीश वर्षा भाटी ने रजिस्ट्रार अरविंद खरे के विक्रय अनुबंध पत्र को उधार पैसे देने के सम्बन्ध में अनुबंध किया जाना माना। चूंकि रजिस्ट्रार अरविंद खरे शासकीय सेवक है उनके द्वारा इतनी बड़ी राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता हैं। उनके द्वारा असत्य कथन और विभिन्न दिनांकों में राशि के दिए जाने का उल्लेख अपने वाद पत्र में किया गया है। रजिस्ट्रार अरविंद खरे द्वारा पेश किया गया तथाकथित विक्रय अनुबंध पत्र कहीं से भी रजिस्टर्ड नहीं है। का उल्लेख करते हुए सब रजिस्ट्रार अरविंद खरे का निषेधाज्ञा का वाद खारिज कर दिया।
@ प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
