@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
वंदे मातरम पर रूबीना खान की बद-जुबानी मुस्लिम कौम की तहजीब, लहजा और भाषाई संस्कारों का अपमान है।

कांग्रेस पार्षद रूबीना खान का गैर-तहजीबी रवैया मुस्लिम खवातीनो के शाइस्ता वकार (शालीन और सभ्य गरिमा ) पर चोट है।
वतन की मोहब्बत इज़हार के लिए नफीस अल्फाज़ की कमी नहीं है फिर ऐसी घटिया बयानबाजी क्यों?
वतन से मोहब्बत का इज़हार करने के लिए ‘सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ या ‘मादरे-वतन जिंदाबाद’ जैसे पुर-वक़ार अल्फाज़ का सहारा लिया जा सकता था, जो न सिर्फ आईन (संविधान) के दायरे में हैं बल्कि मुस्लिम तहजीब का हिस्सा भी हैं।
कांग्रेस पार्षद रूबीना खान और फौजिया अलीम ने जिस बाज़ारी ज़बान , तहजीब और गैर-मुनासिब लहजे का मुज़ाहिरा (प्रदर्शन) किया है, वह मुस्लिम खवातीन की रिवायती पाकीज़गी और वकार (गरिमा)के सरासर खिलाफ है।
वंदे मातरम के तईं (प्रति) जिस तरह की गुफ्तगू और तर्ज़-ए-अमल (बर्ताव) उन्होंने अपनाया, वह मुस्लिम कौम के तहजीबी और लिसानी (भाषाई) मियार की नुमाइंदगी हरगिज़ नहीं करता। उनके इस गैर-संजीदा रवैये ने पूरी कौम का सर शर्म से झुका दिया है।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
