@री डिस्कवर इंडिया न्यूज़ इंदौर
अब तो वाकई सब कुछ घंटा हो गया! हालात तो यह हो गए हैं कि न घर के रहे न घाट के!

महापौर और मंत्री जी को तत्काल इस्ती़फा देना चाहिए। जब मुख्यमंत्री और सरकारी अधिकारी आपके आदेश का पालन नहीं कर रहे है! तो आप पद पर रहकर आखिर क्या कर रहे है?
महापौर और केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय दोनों एक सुर में कह रहे है कि अधिकारी आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं? यह बात हजम तो नहीं होती है। खासकर केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मुंह से। एक समय ऐसा भी था विपक्ष में रहकर कैलाश जी ने एडिशनल एस पी पर जूता उठा लिया था! विपक्ष में रहकर न जाने किस बात पर शहर में आग लगाने की बात कर दी थी! अब अपनी ही सरकार में असहाय है? यह बात समझ से परे है?
या फिर अंदरखाने में कोई राजनैतिक खिचड़ी पक रही हैं! यह तो सियासतदार ही बता सकते है।
लेकिन यदि कोई खिचड़ी पक भी गई थी तो एक पत्रकार के उकसाने में झुलझलाहट में और दो नंबर क्षेत्र की जन्मस्थली – कर्मस्थली और अभी तक वही की मित्रमंडली और सलाहकार होने की वजह से सब कुछ “घंटा” हो गया! हालात इस तरह के हो गए कि “न घर के रहे न घाट के”?
बहरहाल इंदौर शहर के महापौर और केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय यदि वाकई जनता के प्रतिनिधि हैं, और सरकारी अधिकारी इनकी नहीं सुन रहे है तो इन दोनों को तत्काल महापौर पद और मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
