@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

राहुल गांधी के साहस और हिम्मत की तो दाद देनी ही पड़ेगी। चुनावी असफलताएं, व्यक्तिगत हमले और अपमान भी आत्मविश्वास को डिगा नहीं पाए।

देश के 18 साल से 50 साल तक की उम्र के लोग राहुल गांधी से बहुत कुछ सीख सकते है, प्रेरणा ले सकते है।

लगातार असफलताएं, अवहेलना, अस्वीकारिता , अपमान भी आत्मविश्वास, साहस और लक्ष्य को डिगा नहीं सकते यह राहुल गांधी से सीखा जा सकता है।

140 साल पुरानी कांग्रेस में सिर्फ राहुल गांधी एक ऐसा शख्स है जो 140 करोड़ भारतीयों के लोकतान्त्रिक्त देश में विपक्ष की सबसे दमदार आवाज है।

यह देश के लोकतंत्र के लिए न सिर्फ गंभीर चिंता बल्कि शर्म की बात भी है कि जनता के वोटो से चुनी गई सरकार और उसके हुक्मरानों से सवाल पूछने में देश का बुद्धिजीवी वर्ग डर रहा हैं?

देश सर्वप्रथम है। पार्टियां टूटती – बिखरती रहती हैं। सत्ता आती – जाती हैं।

सरकार से सवाल पूछना देश के प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष की आड़ मे, या अपने निजी स्वार्थ के तहत् चुप रहना देश के साथ गद्दारी है।

जब सरकारों और हुक्मरानों से सवाल पूछने में डर लगने लगे तो निश्चित मानिए कि हम आज भी गुलाम है।

इस पोस्ट का यह कतई मतलब नहीं है कि मै कांग्रेस पार्टी का समर्थक हूं लेकिन राहुल गांधी का सत्ता से सवाल पूछने के साहस और जज्बे को मै सलाम और नमन करता हूं।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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