@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

“कैलाश” तुम पार्टी और सरकार के “नीलकंठेश्वर” हो!

पार्टी, पार्टी आलाकमान और मुख्यमंत्री के मान सम्मान के लिए भागीरथपुरा मे खुद की सरकार और सरकारी अधिकारियों की रस्साकशी से उत्पन्न पीने के पानी के नाम पर “गंदे पानी के जहर” को “कैलाश” ने पी लिया!

मुख्यमंत्री मोहन यादव जी को केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कई बार कह चुके थे कि अधिकारी सुन नहीं रहे है। मुख्यमंत्री की बैठक में मंत्रियों और अधिकारियों के सामने कहा था कि अधिकारी मुख्यमंत्री का नाम लेकर चमकाते है! सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री को यह तक बोलना पड़ा कि आप अधिकारियों को कह दे कि वृक्षारोपण के लिए पौधे उपलब्ध करा दे! इस तरह कई बार बोलने के बावजूद भी मुख्यमंत्री जी ने सीधे कोई जवाब नहीं दिया? 

किसी केबिनेट मंत्री वो भी कैलाश विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठ, कद्दावर और पार्टी को अपनी मां की तरह सम्मान देने वाला और मां के आदेश की तरह पार्टी का हर आदेश का पालन करने वाले! पार्टी द्वारा दी गई कठिन से कठिन जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और सम्मान के साथ, हस्ते हुए निभाने वाले! प्रदेश भाजपा के सबसे अनुभवी, कद्दावर और वरिष्ठ नेता के बार बार अधिकारियों के रवैये के बारे में की जाने वाली शिकायत को मुख्यमंत्री द्वारा गंभीरता से न लेना कहा तक जायज है?

दूसरी तरफ त्रासदी के समय तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया NDTV के भोपाल निवासी साहसी पत्रकार को जो सवाल इंदौर शहर के प्रभारी और प्रदेश के मुख्यमंत्री जो हर दूसरे दिन इंदौर आते है उनसे करना था? वो सवाल उनसे न करते हुए भागीरथ पुरा क्षेत्र के विधायक (न की मंत्री की हैसियत से) कैलाश विजयवर्गीय से रात के समय कर लिया? उस वक्त वो पिछले दो दिनों से रात दिन अपनी विधानसभा और गृहक्षेत्र के भागीरथ पुरा की जनता को बचाने के लिए उसी तरह जी जान से जुटे थे जैसे भोपाल गैस त्रासदी कांड की रात हो। 

ऐसे कठिन समय में उनके मुंह से निकले “घंटा गए थे” शब्द का आपत्तिजनक अर्थ निकाल कर देश प्रदेश के मीडिया ने कैलाश जी की मनःस्थिति और उनके द्वारा लगातार 48 घंटे भागीरथ पुरा की गरीब जनता को बचाने और स्थिति की गंभीरता को संभालने के लिए किए गए भागीरथी प्रयासों को नजरंदाज कर दिया? 

आज कैलाश जी के मुख से अनायास निकला “घंटा” शब्द प्रदेश और सरकार के लिए जागरूकता का “डमरू” बनकर पूरे देश में बज रहा है।

कल्पना करो यदि उस वक्त कैलाश जी भागीरथ पुरा में 48 घंटे युद्धस्तर पर न जुटे होते तो क्या होता? क्या तथाकथित राष्ट्रीय और प्रादेशिक मीडिया और हल्ला मचा कर राजनीति करने वाला विपक्ष का कोई भी नेता या उनकी पार्टी ने त्रासदी के समय से लेकर आज तक भागीरथ पुरा की पीड़ित जनता की मदद के लिए सिर्फ़ साफ पीने के पानी की एक बाल्टी भी लेकर पहुंचा है? और दूसरी मदद की तो बात करना भी बेमानी होगा।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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