संजय शुक्ला महापौर प्रत्याशी की मतदाताओं के बीच लोकप्रियता देख थर्रायी भाजपा!?
@प्रदीप मिश्रा री डिसकवर इंडिया न्यू्ज इंदौर
हिंदू, हिन्दुत्व, धार्मिक मान्यताओं, आस्थाओं के प्रति आस्था, समर्पण और मान्यता के लिए इंदौर नगर निगम के महापौर प्रत्याशी संजय शुक्ला जो स्वयं परशुराम ब्राह्मण पुत्र है को वोट की राजनीति करने के लिए इस्तेमाल करने और वोटो के ध्रुवीकरण का डर लेशमात्र भी नहीं हो सकता है!
इंदौर शहर की जनता को यह भलीभाँति पता है कि हिंदू, हिन्दुत्व और हिन्दू धर्म उनकी रगो में पारिवारिक और खानदानी है
इंदौर शहर का न सिर्फ़ पूरा हिंदू समाज वरन मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समाज भी “बानेश्वरी” और वरिष्ट भाजपाई विष्णु शुक्ला, युवा भाजपाई गोलू शुक्ला और इंदौर की जनता मे लोकप्रिय मर्यादापुरुषोत्तम संजय शुक्ला के नेतृत्व में कल भी निर्भय था और आज भी है!
किसी भी तरह के व्यक्तिगत हल्के, सस्ते और मनगढ़ंत ख़बरों का प्रचार और प्रसार किसी भी राजनीतिक पार्टी या उसके मीडिया तंत्र का मानसिक दिवालिया पन के साथ शहर की जनता के हक, अधिकार और जीवन जीने की बुनियादी आवश्यकताओं के साथ चारण भाटी विश्वास घात है!
पिछले 22 सालो मे इंदौर भाजपा कभी भी किसी भी चुनाव में राजनीतिक रूप से इतनी चिंताग्रस्त और भयाक्रांत कभी भी नहीं हुई जितनी इस बार के इंदौर शहर के महापौर के चुनाव में लग रही है!?
यह चिंता और भय से उपजी झुंझलाहट राष्ट्रीय महासचिव के बयानों से परिलक्षित होती है! स्वयं शहर के कद्दावर और प्रदेश के प्रभावी नेता कैलाश जी को भी संजय शुक्ला पर निर्थक टिप्पणी करने को मजबूर होना पड़ा! क्योंकि उनके पास अनुभव और राजनीतिक रूप से नाबालिग भाजपा प्रत्याशी पुष्य मित्र भार्गव की तरफ से और निगम के उनके बाद के महापौरो की कोई विशेष उपलब्धि पर बोलने के लिए कुछ नही है!
यही मजबूरी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भी है! पिछले दिनों प्रबुद्ध वर्ग के सम्मेलन में इन्दौर नगर निगम के कामों की जगह वो राज्य सरकार के कामों की उपलब्धियों का ही गुणगान करते रहे!
स्वयं पुष्य मित्र भार्गव अपने सोशल मीडिया से प्रधानमंत्री मंत्री मोदी की योजनाओं का प्रचार प्रसार करते हैं!?
पिछले 22 सालो में इंदौर शहर के विकास में इंदौर नगर निगम के खाते में कोई खास उपलब्धि नहीं है! जो भी विकास स्वच्छता अभियान और स्मार्ट सिटी योजनाओं के तहत दिख रहा है वो राज्य और केन्द्र सरकार के खाते में है!? निगम में फैला व्यापक भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अराजकता, रिश्वतखोरी और तानाशाही रवैये ने इंदौर नगर निगम को शहर में स्व घोषित विकास का हिटलर शाही चेहरा बनाकर रख दिया है!?
 संजय शुक्ला की सादगी, विनम्रता, इंदौरी अपनापन के साथ इंदौर की जनता खासकर गरीब, मजदूर और निम्न मध्यमवर्गीय लोगों के लिए उनके हक, अधिकार, रोजगार और बुनियादी सुख सुविधाओं के लिए जी जान से उनके साथ संघर्ष करना हो! या फिर उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं और आस्थाओं का सामूहिक रूप से आयोजन कर मनाना हो! ने उन्हें इंदौर के मतदाताओं के बीच में अभूतपूर्व रूप से से लोकप्रिय बना दिया!
संजय शुक्ला की लोकप्रियता को कई भाजपाई भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं!
इससे बड़ी बात क्या होगी कि भाजपा के महापौर प्रत्याशी पुष्य मित्र भार्गव स्वयं संजय शुक्ला के कोरोंना के विपत्तिकाल में जिस तरह आम जनता की सेवा की उसकी न सिर्फ भूरि भूरि प्रशंसा की वरन उनकी लोकसेवा के कायल है! जिसे उन्होंने पब्लिक के सामने स्वीकारा है!
वही दूसरी तरफ इंदौर भाजपा के 22 सालो में पहली बार महापौर पद के लिए एक ऐसे उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा है जो इंदौर की भाजपाई गुटबाजी और खेमे की राजनीति में किसी गुट का नहीं है!? *इंदौर भाजपा राजनीति के लिए उसे बच्चा तो नही कहेंगे लेकिन किशोरवय का नाबालिग कह सकते हैं! इस तरह के चयन भाजपा की राजनीति में तानाशाही प्रव्रती को दर्शाती है! क्योंकि भाजपा मे व्यक्ती से ज्यादा संगठन महत्वपूर्ण है!?
सिर्फ “एक व्यक्ति” संजय शुक्ला जो कांग्रेस प्रत्याशी है की लोकप्रियता से घबराकर पैदा हुए भय से उपजी कुंठा, कपट और ईर्ष्या की मानसिक कृतघ्नता इस हद तक जा पहुंची की जनता के मुद्दो की लड़ाई को छोड़कर व्यक्तिगत और पारिवारिक व्यवसाय को निशाना बनाया जाने लगा और वो भी उन पारिवारिक संस्थाओ को जो शहर में 5000 लोगों को परोक्ष – अपरोक्ष रूप से रोजगार प्रदान करती है जिससे 2 से 3 लाख लोगों का परिवार अपनी रोजी रोटी चलाता है! उन संस्थानों के मालिक कल और आज की इंदौर भाजपा के आधार स्तंभ है!?
@प्रदीप मिश्रा री डिसकवर इंडिया न्यू्ज इंदौर

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