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सामान खरीदने से पहले गुणवत्ता परखना जरूरी
क्या आप जागरूक ग्राहक हैं, क्या खरीदी करने से पहले क्वॉलिटी, मात्रा और कीमत जैसे मापदंडों को याद रखते हैं? अगर ऐसा नहीं है तो आज से ही एक ग्राहक के तौर पर खुद को बेहतरीन साबित करने की कोशिश शुरू कर दें। ग्राहक के तौर पर क्या हैं आपके अधिकार और कैसे इन अधिकारों का लाभ उठाएं, यह समझना जरूरी है।
बिल लेना बहुत जरूरी
बिल लेकर क्या करना है? इस रवैये में बदलाव लाइए, क्योंकि एक बिल आपको खराब प्रोडक्ट से छुटकारा दिला सकता है। दुकानदार अगर सामान वापस नहीं करेगा तो बदलेगा तो जरूर ही। यहां पर आपको ध्यान रखना है कि बिल कच्चा है या पक्का। जब दुकानदार कागज पर सामान की कीमत लिखकर दे रहा है तो उसे कच्चा बिल कहते हैं, वहीं प्रिंटेड रसीद को पक्का बिल कहते हैं। पक्का बिल उपभोक्ता फोरम में क्लेम में सबूत के तौर पर काम आ सकता है, पर कच्चा बिल नहीं। आमतौर पर लोग कम कीमत की चीजों में ठगे जाने पर कोई कदम उठाते ही नहीं हैं, पर सुधार चाहिए तो जागरूक होना पड़ेगा। इसके लिए जरूरी है खरीदारी का बिल संभालकर रखें। अदालती कार्रवाई में यह बहुत काम का है। खाने-पीने के सामानों की खरीदारी करें तो एक्सपाइरी डेट जांच लें।
खरीदारी से पहले पढ़ें शर्त

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ब्रोशर में प्रोडक्ट से जुड़ी शर्ते लिखी होती हैं, जैसे किस स्थिति में विक्रेता की क्या जिम्मेदारी होगी और आपके क्या-क्या हक होंगे। कब आप सामान वापसी के लिए ला सकते हैं और कब यह वापस नहीं हो पाएगा। ऐसी ही बातें नियम व शर्तों के हेड में लिखी होती हैं। बड़ी कीमत का सामान खरीद रही हैं तो इनको जरूर पढ़ लें। यदि कभी उपभोक्ता फोरम में जाना पड़े तो यह आपके बड़े काम आएगा।
पैकिंग रखें संभाल कर
जो सामान खरीद कर लाएं उसके ब्रोशर और पैकिंग को संभालकर रख दें। एक पैकेट बना लें, जिसमें इस तरह के पेपर ही रखे हों। फ्रिज और वॉशिंग मशीन के डिब्बे को भी फेंके नहीं। बड़े के अंदर छोटा और छोटे के अंदर और छोटा डिब्बा डालकर स्टोर रूम में डाल दें। अगर कभी उपभोक्ता फोरम में जाने की नौबत नहीं भी आई, तो जब कभी सामान को कहीं ले जाना होगा, तो इन्हीं डिब्बों में रखकर काम चल जाएगा। इसलिए इन बातों का सदैव ध्यान रखें।
देख लें कितनी है गारंटी
आप हमेशा से परिवार की सुरक्षा और सेहत को लेकर सजग हैं। आप जो प्रोडक्ट खरीदकर ला रहे हैं, वह सेहत के लिए सही है कि नहीं, इसकी निशानी होती है। ये निशानियां हैं, आईएसआई और एगमार्क की मोहर। कुछ भी खरीदते समय यह मोहर जरूर देखें। इसके साथ गारंटी कितने समय की है, इस पर भी ध्यान देना होगा, क्योंकि गारंटी के समय के अंदर तो आप पूरे हक से प्रोडक्ट का बदलाव कर सकते हैं।
एक्सपायरी डेट जरूर देखें
किसी भी चीज की एक मैन्यूफैक्चरिंग डेट यानी बनने की तारीख होती है और एक्सपाइरी डेट यानी खराब होने की तारीख होती है, जो प्रोडक्ट पर लिखी होती है। एक्सपाइरी डेट निकलने के बाद अगर आप इसे खरीद रही हैं तो गलत है। आप दुकानदार से कहकर इसे बदल लें। इन तारीखों के साथ-साथ आपको चार और जानकारियों को प्रोडक्ट पर जांच लेना चाहिए। कीमत, सामग्री, मात्रा और इस्तेमाल करने का तरीका। कंज्यूमर एक्ट यह सारी जानकारी वाला लेबल मुहैया कराने की बात कहता है। इसलिए आप इस लेबल को जांच कर ही खरीदारी करें।
लिखी सामग्री भी परख लें
ग्राहक अपने लिए खाने-पीने का सामान खरीदने से पहले यह जरूर देख लें कि उसमें क्या-क्या सामग्री मिली है। संभव है कि उसमें कुछ ऐसी सामग्री डाली गई हो, जिसका आपको या परिवार में किसी को परहेज करना हो। मतलब सेहत के हिसाब से वो सामग्री सही न हो। इसलिए इस बात को भी ध्यान रखें।
ऐसे उठाएं अपने अधिकारों का लाभ

  • अगर प्रोडक्ट में कोई दोष है
  • अगर आपको प्रोडक्ट पर लिखी कीमत से ज्यादा भुगतान करना पड़ा है
  • जानलेवा वस्तु का व्यापार ठ्ठ सेवाओं में कमी आ सकते हैं ये परिणाम
  • सामान की कमी दूर करना
  • बदलकर नया सामान देना
  • उपभोक्ता को सामान के पैसे वापस देना
  • उपभोक्ता को उसकी परेशानी के हिसाब से हर्जाना देना
  • चेतावनी देना कि सेवाएं बेहतर करें।

कैसे करें अपील
सबसे पहले कंपनी को नोटिस भेजें। अगर नियत समय के अंदर निपटारा नहीं हो तो कानूनी सहायता लें। इसके लिए आपको जिला उपभोक्ता फोरम में अपील करनी होगी। 21 दिनों के भीतर तय होगा कि अदालत मुकदमा दायर करेगी या नहीं, इतना ही समय विपक्ष को जानकारी भेजने में लगाया जाता है और एक महीने के अंदर विपक्ष को जवाब देना होता है। फिर फैसला आने पर अगर आप असंतुष्ट हैं तो 30 दिनों के अंदर स्टेट कमीशन में अपील कर सकती हैं। इसके बाद नेशनल कमीशन में अपील का मौका भी मिलता है।
जब लिखित में करना हो शिकायत
अगर आप एक उपभोक्ता के तौर पर सच में ठगा हुआ महसूस कर रही हैं, तो लिखित में अपनी शिकायत देना अच्छा रहेगा। एडवाइस सेंटर और इससे जुड़ी दूसरी संस्थाओं को एप्लीकेशन लिख रही हैं, तो इन बातों का ध्यान रखना होगा।

  • 1. नाम और पूरा पता लिखें।
  • 2. परेशानी को कम शब्दों में खरीदारी की जगह और तारीख के साथ लिखें।
  • 3. परेशानी हल करने के लिए अभी तक की गई कार्रवाई का उल्लेख करें।
  • 4. निश्चित समय के अंदर जवाब मांगें।
  • 5. अभी तक आपने जो भी कार्रवाई की है, उससे जुड़े कागजात की कॉपी संलग्न करें।
  • 6. प्रोडक्ट से जुड़े कागजात जैसे वारंटी, रसीद आदि की कॉपी भी भेजें।
  • 7. ऊपर लिखे सभी कागजातों की एक कॉपी अपने पास संभालकर रखें और डाक या कॉरियर से भेजने की तारीख कहीं नोट कर लें।

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